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बरेली से उत्तराखंड और मथुरा जाना होगा बेहद आसान, अब चलेंगी 25 नई एसी बसें; जानें रूट और सुविधाएं

Published: Fri, 09 Oct 2026 10:59 PM (IST)

बरेली को जल्द ही 25 नई एसी बसें मिलेंगी, जिससे पीलीभीत, शाहजहांपुर, बदायूं, मथुरा और हल्द्वानी तक यात्रा आसान हो ...और पढ़ें

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HighLights

  1. पुराना बस अड्डा पर चार्जिंग स्टेशन बनाने का शुरू हो चुका काम

  2. शहर में दो साल से कराया जा रहा 25 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन

जागरण संवाददाता, बरेली। शहर में नगर निगम की ओर से 25 एसी बसों का संचालन कराया जा रहा है। अब पीलीभीत, शाहजहांपुर, बदायूं ही नहीं मथुरा और उत्तराखंड के हल्द्वानी तक यात्रियों को एसी बस से यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। कैबिनेट में जिले को 25 एसी बसों का आवंटन करने की मंजूरी मिल चुकी है।

प्रदेश के 18 शहरों में 1,725 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें चलेंगी। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद इस योजना को जीसीसी (ग्रास कास्ट कांट्रैक्ट) माडल पर लागू किया जाएगा। पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने बताया कि बसें 9 और 12 मीटर लंबाई की होंगी।

आगरा से नोएडा तक 18 शहरों को मिलेगी नई बस सेवा योजना में आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, बरेली, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मथुरा-वृंदावन, मेरठ, मुरादाबाद, प्रयागराज, शाहजहांपुर, सहारनपुर, वाराणसी और नोएडा जेवर सहित 18 शहरों को शामिल किया गया है।

बता दें कि बरेली रीजन में 25 एसी बसों का आवंटन सालभर पहले ही कर दिया गया था, लेकिन यहां चार्जिंग स्टेशन न होने के कारण बसें नहीं मंगाई गई थीं। पिछले महीने पुराना बस अड्डा परिसर में चार्जिंग स्टेशन बनाने का काम शुरू हो चुका है।

परिवहन निगम के अधिकारियों ने एसी बसों के संचालन के लिए बरेली से पीलीभीत, शाहजहांपुर, बदायूं, मथुरा, हल्द्वानी जैसे रूटों का भी चिह्नांकन करा लिया है।

बस खरीदने पर 35 से 40 लाख रुपये तक मदद

सरकार 12 मीटर की हर बस की खरीद पर 40 लाख रुपये और नौ मीटर की बस पर 35 लाख रुपये का अनुदान देगी। योजना के मुताबिक, डिपो बनाने के लिए संबंधित नगर निगम और नोएडा प्राधिकरण जरूरत के अनुसार मुफ्त जमीन उपलब्ध कराएंगे।

बसों में यात्रियों से कितना किराया लिया जाएगा, यह प्रदेश सरकार तय करेगी। परिवहन विभाग की नीति के अनुसार उत्तर प्रदेश में निर्मित बसों को खरीद में प्राथमिकता दी जाएगी।

सरकार को उम्मीद है कि इस योजना से शहरों में सार्वजनिक परिवहन के विकल्प बढ़ेंगे और इलेक्ट्रिक बसों के निर्माण व आपूर्ति से जुड़े निवेश और रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।

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