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बरेली की साक्षी का कमाल: पिता से सीखा ताइक्वांडो, अब 500 से अधिक बेटियों को बना रहीं आत्मनिर्भर

Published: Mon, 12 Oct 2026 06:00 AM (IST)

बरेली की साक्षी बोरा ताइक्वांडो के जरिए बेटियों को आत्मरक्षा का हुनर सिखाकर आत्मनिर्भर बना रही हैं। उन्होंने 500 से ...और पढ़ें

छात्राओं को ताइक्वांडो का प्रशिक्षण देते हुए कोच साक्षी। सौ. स्वयं

छात्राओं को ताइक्वांडो का प्रशिक्षण देते हुए कोच साक्षी। सौ. स्वयं

HighLights

  1. खुद की ताकत पहचानने का हुनर सिखा रहीं अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी साक्षी बोरा

हिमांशु अग्निहोत्री, बरेली। नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूप शक्ति, साहस और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का संदेश देते हैं। इसी शक्ति का एक रूप हैं इज्जतनगर की साक्षी बोरा, जो ताइक्वांडो के जरिए बेटियों को आत्मरक्षा का हुनर सिखा रही हैं।

उनके लिए ताइक्वांडो सिर्फ खेल नहीं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनमें आत्मविश्वास जगाने का माध्यम है। पिता से सीखी कला को उन्होंने अपनी पहचान बनाया और अब इसी के सहारे सैकड़ों बच्चों को अपनी सुरक्षा के लिए सक्षम बना रही हैं।

छात्राओं को ताइक्वांडो का प्रशिक्षण देते हुए कोच साक्षी

रेलवे कालोनी निवासी साक्षी के पिता हरीश सिंह बोरा रेलवे में टेक्नीशियन होने के साथ ताइक्वांडो कोच भी थे। वर्ष 1998 में जन्मीं साक्षी को बचपन से ही खेलों में रुचि थी।

वर्ष 2004 से उन्होंने पिता के मार्गदर्शन में ताइक्वांडो सीखना शुरू किया, तब शायद उन्होंने भी नहीं सोचा होगा कि एक दिन यही कला उनके जीवन का उद्देश्य बन जाएगी।

पिता के जाने के बाद खुद संभाली जिम्मेदारी

वर्ष 2019 में पिता के निधन ने साक्षी के जीवन की दिशा बदल दी। परिवार को आर्थिक मजबूती देने के लिए उन्होंने ताइक्वांडो और आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देना शुरू किया।

शुरुआत में उनके पास केवल 10 से 12 विद्यार्थी आते थे, लेकिन मेहनत, अनुशासन और प्रशिक्षण की गुणवत्ता ने धीरे-धीरे उनकी पहचान बना दी। आज वह करीब 100 विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दे रही हैं। पिछले सात वर्षों में 500 से अधिक बच्चों को प्रशिक्षित कर चुकी हैं।

बनाई अंतरराष्ट्रीय पहचान, बेस्ट नेशनल रेफरी का मिला पुरस्कार

साक्षी की उपलब्धि सिर्फ विद्यार्थियों की संख्या तक सीमित नहीं है। उनके प्रशिक्षण से तैयार हुए तीन बच्चे, जिनमें दो लड़कियां और एक लड़का शामिल हैं, राष्ट्रीय स्तर पर रेफरी की भूमिका निभा रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी और राष्ट्रीय स्तर की रेफरी साक्षी वर्ष 2024 में तीन महीने दक्षिण कोरिया में प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी हैं। उन्हें बेस्ट नेशनल रेफरी का पुरस्कार भी मिल चुका है।

बेटियों के लिए खुला प्रशिक्षण का रास्ता

साक्षी आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को निश्शुल्क प्रशिक्षण देती हैं। उन्होंने दिशा इंटर कालेज में विशेष बच्चियों को भी ताइक्वांडो सिखाया है। इसके अलावा पुलिस के सहयोग से महिला दिवस पर पुलिसकर्मियों को आत्मरक्षा का विशेष प्रशिक्षण देती हैं। उनका प्रयास है कि कोई भी लड़की केवल संसाधनों की कमी के कारण अपनी सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की राह में पीछे न रह जाए।

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