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80 हजार किसान परेशान, नीलाम हो रहीं 2 चीनी मिलें; गन्ना मंत्री पर करीबियों को नई मिल दिलवाने के आरोप

Published: Thu, 05 Nov 2026 06:36 PM (IST)

बरेली में गन्ना मंत्री संजय सिंह गंगवार पर दो चीनी मिलों (नवाबगंज और बहेड़ी) को बचाने में दिलचस्पी न लेने ...और पढ़ें

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HighLights

  1. नवाबगंज और बहेड़ी चीनी मिलों को बचाने में नहीं दिखाई कोई दिलचस्पी

  2. शासन से बजट का दिलाकर 80 हजार किसानों को दिलवा सकते थे राहत

जागरण संवाददाता, बरेली। बकाया गन्ना मूल्य भुगतान नहीं होने से हजारों किसान परेशान हैं, जबकि प्रदेश के गन्ना विकास राज्यमंत्री संजय सिंह गंगवार पीलीभीत के विधायक हैं। मंडल में मंत्री होने के बावजूद नवाबगंज व बहेड़ी की दो चीनी मिलें नीलामी तक पहुंच गईं। मंत्री ने इन मिलों को बचाने में दिलचस्पी दिखाने के बजाय बहेड़ी में अपने करीबियों की नई मिल खुलवाने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाई।

अगर वह शासन स्तर पर पैरवी कर सरकार से बजट का इंतजाम कराने की कोशिश करते, इन मिलों को बचाया जा सकता था। जिससे प्रभावित हो रहे दोनों चीनी मिल क्षेत्रों के 80 हजार किसानों को राहत मिल सकती थी।

ओसवाल चीनी मिल, नवाबगंज पेराई सत्र 2023-24 में ही हिचकोले खाने लगी थी। मिल पर गन्ना किसानों का 107.12 करोड़ रुपये बकाया हो गया था। हालांकि बाद में मिल प्रबंधन ने 91.64 करोड़ का भुगतान कर दिया था, लेकिन 15.48 करोड़ रुपये बकाया रह गया।

2024-25 में मिल ने किसानों से 39.45 करोड़ रुपये का गन्ना खरीदा, लेकिन भुगतान एक रुपये का भी नहीं किया। इस तरह बकाया रकम बढ़कर 54.93 करोड़ पहुंच गई, जो अब ब्याज सहित करीब 70 करोड़ रुपये तक हो चुकी है।

गन्ना विभाग ने पिछली साल ही चीनी मिल को आवंटित होने वाला गन्ना रोक दिया था। बसंत दादा शुगर इंस्टीट्यूट पुणे की तकनीकी टीम ने चीनी मिल का 180 करोड़ रुपये मूल्यांकन किया है। इसी के आधार पर नीलामी की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी, लेकिन हाईकोर्ट से मिल प्रबंधन को स्थगन आदेश मिल गया है।

केसर चीनी मिल, बहेड़ी पर भी गन्ना किसानों का 170 करोड़ बकाया हो चुका है। पिछली साल तो इस चीनी मिल में गन्ने की पेराई हुई थी और किसानों को भुगतान भी मिला था, लेकिन पिछली साल का बकाया नहीं मिल सका।

प्रशासन ने मिल की संपत्तियां कुर्क कर नीलामी कराने की कोशिश तो कई महीनों से कर रही है, लेकिन नीलामी अभी तक नहीं हो सकी है। इस बीच मिल का 431 करोड़ में सौदा होने की बात भी सामने आई।

मगर,  क्रेता का 66 करोड़ का चेक बाउंस हो जाने के बाद मामला अधर में पड़ गया। कुर्क भूमि की 24 अक्टूबर को नीलामी होनी थी, जिसमें बोलीदाताओं के चेक लेकर पहुंचने से नीलामी नहीं हो सकी, अब 17 नवंबर को अगली तारीख तय हुई है।

बहेड़ी चीनी मिल के गन्ना सेंटरों में से 11 सेंटर फरीदपुर, 12 मीरगंज, तीन सेमीखेड़ा, पांच पीलीभीत, नौ निगोही, नौ मिलक नरायनपुर और सात रोजा चीनी मिल को आवंटित कर दिया गया है।

गन्ना मंत्री के स्तर से इन चीनी मिलों को बचाने के कोई प्रयास दिखाई नहीं पड़े। अगर वह मुख्यमंत्री से मिलकर बजट का इंतजाम करा लेते तो दोनों चीनी मिल क्षेत्रों के 80 हजार किसानों को राहत मिल सकती थी।

बताते हैं कि उनका जोर बहेड़ी क्षेत्र के बोरवली में अपनी करीबी हर्ष आर्य किलाचंद की नई त्रिवटीनाथ चीनी मिल स्थापित करवाने पर रहा। पिछली साल उन्होंने इसका उद्घाटन भी किया था।

पिछली साल इस मिल को ज्यादा गन्ना आवंटित हुआ था, लेकिन चीनी मिल में तकनीकी खराबी आ जाने के कारण ठीक से चल नहीं पाई थी। इस बार इस मिल को छह सेंटरों का 19 लाख क्विंटल गन्ना आवंटित किया गया है।

इस संबंध में गन्ना मंत्री संजय गंगवार को फोन लगाया गया, मगर कॉल रिसीव नहीं हुआ। उनके कार्यालय सहायक को भी फोन किया गया। वाट्सएप संदेश भेजकर भी पक्ष मांगा गया। मगर, कोई जवाब नहीं आया।

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