रील्स की दुनिया छोड़ रामलीला के मंच तक पहुंची जेन-जी, स्मार्टफोन पीढ़ी को क्यों भा रहा श्रीराम का जीवंत मंचन?
जेन-जी, जो आमतौर पर डिजिटल मनोरंजन में व्यस्त रहती है, अब रामलीला के जीवंत मंचन में गहरी रुचि दिखा रही ...और पढ़ें

बरेली के सुभाष नगर में रामलीला मंचन करते हुए कलाकार। जागरण
HighLights
संवाद और अभिनय से जुड़ रहे आस्था और बचपन की यादों के तार
हिमांशु अग्निहोत्री, बरेली। हाथों में स्मार्टफोन, इंटरनेट मीडिया पर रील्स और मनोरंजन के लिए तमाम डिजिटल विकल्प...। जेन-जी की जिंदगी का यह आम नजारा है, लेकिन जब रामलीला का मंच सजता है तो इस पीढ़ी का अंदाज भी बदल जाता है।
मोबाइल की स्क्रीन पर दुनिया देखने वाले युवा भगवान श्रीराम की लीला को सामने बैठकर महसूस करना चाहते हैं। उनके लिए रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, भावनाओं और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का जरिया भी है।
सुभाष नगर की रामलीला में सोमवार शाम राम विवाह और कन्यादान लीला का मंचन हुआ। राजा दशरथ बरात लेकर मिथिला पहुंचे। बरात सुभाष नगर के विभिन्न मार्गों से होते हुए रामलीला मैदान पहुंची।
इसके बाद चारों भाइयों के विवाह की रस्में पूरी हुईं और उन्होंने फेरे लिए। मंचन देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। युवाओं के लिए यह आयोजन खास आकर्षण रहा।
स्क्रीन पर वीडियो, सामने सजीव अनुभूति
रामलीला देखने पहुंचे जेन-जी का कहना है कि फोन पर पूरी दुनिया देख सकते हैं, लेकिन भगवान श्रीराम को जीवंत रूप में देखने का अनुभव अलग है। श्रीराम उनके आराध्य हैं। कलाकारों के संवाद, चेहरे के भाव और अनूठा अभिनय सीधे हृदय में उतरता है।
मंच पर साकार होते प्रसंग आस्था को गहरा करते हैं और संस्कृति से जुड़ने का अवसर देते हैं। यह उन्हें परिवार के साथ समय बिताने, दोस्तों से मिलने और अपनी परंपराओं को करीब से जानने का मौका भी दे रही है।
रामलीला में मिलता है अपनापन
शिवा बताते हैं कि वह बचपन में परिवार के साथ रामलीला देखने आया करते थे। अब पूरे साल कहीं भी रहें, रामलीला के दौरान यहां पहुंचना नहीं भूलते। यहां आकर बचपन की यादें ताजा हो जाती हैं। समाज के लोगों से मिलने और उनके साथ घुलने-मिलने का अवसर भी मिलता है।
परंपराओं से भी जुड़ी पीढ़ी
शहर में सात से आठ स्थानों पर रामलीला का आयोजन होता है। डिजिटल दौर में इन आयोजनों की मौजूदगी बताती है कि तकनीक के साथ कदमताल करने वाली नई पीढ़ी अपनी परंपराओं से भी जुड़ी रहना चाहती है। जेन-जी के लिए रामलीला का अनुभव यही संदेश देता है कि कुछ भावनाएं स्क्रीन पर नहीं, सामने बैठकर ही महसूस की जा सकती हैं।
मोबाइल पर रील्स देखने से इतर रामलीला को सामने बैठकर देखने का आनंद बिल्कुल अलग है। कलाकारों के हाव-भाव, संवाद और मंच पर जीवंत होते प्रसंग मन को छू लेते हैं। ऐसा लगता है जैसे हम खुद उस युग की कहानी का हिस्सा बन गए हों। - कृष्णा
इंटरनेट मीडिया पर कुछ सेकंड की रील देखकर हम आगे बढ़ जाते हैं, लेकिन रामलीला में बैठकर हर प्रसंग को देखना अपने आप में खास अनुभव है। यहां मनोरंजन के साथ बहुत कुछ सीखने को भी मिलता है। - चंदू

रामलीला अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर देती है। मंच पर कलाकारों को किरदार निभाते हुए देखना और उनके संवादों को महसूस करना रील्स देखने से बिल्कुल अलग है। रामलीला में हमारी संस्कृति, आस्था और जीवन के मूल्यों की झलक मिलती है। - बाबू
हमारे लिए रामलीला देखना एक अलग तरह का अनुभव है। मोबाइल पर वीडियो तो कभी भी देख सकते हैं, लेकिन रामलीला का माहौल, मंच की भव्यता, कलाकारों का अभिनय और दर्शकों के बीच बैठकर प्रसंगों को महसूस करने का मजा कहीं और नहीं मिलता। यह मनोरंजन के साथ हमारी परंपराओं को करीब से समझने का मौका भी है। - कुश शर्मा
