कर्नाटक में छात्रा ने प्रोफेसर को चप्पल से पीटा, तो बरेली में मिली बम की धमकी; क्या है 'डॉक्टर' वाला विवाद?
बरेली क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। धमकी भरा ईमेल हिंदी में था, जिसमें कर्नाटक ...और पढ़ें

पुराना पासपोर्ट कार्यालय में बम की सूचना पर जांच करती डाग स्क्वायड की टीम।
HighLights
हिंदी में पूरे पेज का लिखा था ई-मेल, कर्नाटक के निजी मेडिकल कालेज प्रकरण का किया जिक्र
कर्नाटक के मेडिकल कालेज के प्रोफेसर की ओर से छात्रा को प्रपोज करने के प्रकरण ने पकड़ा है तूल
छात्रा ने चप्पलों से पीटा तो मचा हंगामा, ई-मेल में लिखा डाक्टर का अपमान यानी डीएमके का अपमान
मेडिकल कालेज के प्रोफेसर की पहचान डा. अब्दुल मुहम्मद के रूप में हुई, जांच में जुटी सभी एजेंसियां
जागरण संवाददाता, बरेली। क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले आरोपित ने पूरे एक पेज का ई-मेल लिखा था उसने पूरा ई-मेल हिंदी में लिखा था। मेल पढ़ने से ऐसा महसूस हो रहा था जैसे किसी साउथ के व्यक्ति ने लिखा है। साउथ से इसे ऐसे भी कनेक्ट किया जा रहा है, क्योंकि पिछले दिनों कर्नाटक के निजी मेडिकल कालेज के प्रोफेसर ने छात्रा को प्रपोज किया था, जिस पर छात्रा ने उसे चप्पलों से पीटा था।
इसी मामले का जिक्र करते हुए मेल में लिखा है कि डाक्टर का अपमान मतलब डीएमके का अपमान है। अनुमान है कि जिसने भी मेल किया है वह प्रोफेसर और डीएमके का समर्थक है। हालांकि, अभी पुलिस और खुफिया एजेंसियां पूरी जानकारी जुटाने में लगी हुई हैं। शाम तक ई-मेल भेजने वाले व्यक्ति के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई थी।
पिछले दिनों कर्नाटक के निजी मेडिकल कालेज में प्रोफेसर ने क्लास की छात्रा को प्रपोज किया और पूरी क्लास को चाकलेट बांटने की बात कही थी। इससे पूरे कालेज में हंगामा कटा और छात्रा ने प्रोफेसर को चप्पलों से पीटा था। इसका वीडियो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है।
बताया जा रहा है कि प्रोफेसर की पहचान अब्दुल के रूप में हुई थी। इस प्रकरण ने इन दिनों काफी तूल पकड़ा हुआ है। बताया जा रहा है कि शुक्रवार को क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय में जो धमकी भरा ई-मेल भेजा गया था, उसमें भी इस घटना का जिक्र किया गया था।
ई-मेल में लिखा था कि कर्नाटक में डाक्टर (प्रोफेसर) का अपमान सिर्फ उनका अपमान नहीं हैं बल्कि, पूरी डीएमके का अपमान हैं। इससे आंशका है कि मेल भेजने वाला हो सकता है कि डीएमके का समर्थक हो। पेज में कुछ अन्य बातें भी लिखी हैं।
पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने ई-मेल को डाउनलोड कर लिया है और उसकी गहन विवेचना की जा रही है। जांच टीम संबंधित ई-मेल का आइपी एड्रेस से उसका पता लगाने में जुटी है कि आखिर किस स्थान से ई-मेल भेजा गया। शुक्रवार देर शाम तक इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपित का पता लगा लिया जाएगा।
वीपीएन इस्तेमाल करने की आशंका
खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, जब भी इस तरह के ई-मेल भेजे जाते हैं तो आरोपित वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) का इस्तेमाल करते हैं। आंशका है कि इस केस में भी आरोपित ने वीपीएन का इस्तेमाल किया ताकि जल्दी से पुलिस उसे ट्रेस न कर सके। इस आइपी एड्रेस को ट्रेस करने पर पुलिस या खुफिया एजेसियों को सटीक लोकेशन नहीं मिलेगी। हालांकि, फिर भी टीम अपने पूरे प्रयास में जुटी हैं। पुलिस का कहना है कि जल्द से जल्द आरोपित को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
मच गया हड़कंप, दहशत में थे लोग
पुलिस ने जब पासपोर्ट कार्यालय समेत आस-पास के सभी कार्यालयों और दुकानों को खाली कराया तो हड़कंप मच गया। पुलिस ने सभी से स्पष्ट कहा कि दो बजे तक कोई भी न तो अपने कार्यालय में रहेगा और न ही दुकान पर बैठेगा। दो बजे के बाद ही सभी को अपने कार्यालय या दुकान में जाने की अनुमति दी गई।
बता दें कि, जिस बिल्डिंग में पासपोर्ट कार्यालय है उसमें एक बैंक भी है। इसके अलावा ग्राउंड फ्लोर पर कई दुकानें भी हैं। एक डाक्टर का क्लीनिक भी है। ऐसे में सभी से बाहर आने को कहा तो कुछ देर के लिए हड़कंप मचा रहा।
पासपोर्ट का कार्य हुआ बाधित
ई-मेल आने के बाद से पूरे पासपोर्ट कार्यालय का काम बाधित हो गया। पहले तो सभी अपने कार्यालय की जांच में जुटे रहे। जब पुलिस पहुंची तो सभी से दो बजे तक के लिए पूरे कार्यालय को खाली करा लिया गया। जो भी आवेदक आए उन्हें दो बजे के बाद ही अपना काम कराने को मिला। जिससे करीब दो घंटे तक पूरे कार्यालय का काम बाधित रहा।
पासपोर्ट कार्यालय में घुसना आसान नहीं
क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय में किसी भी असामान्य व्यक्ति का घुसना इतना आसान नहीं हैं। क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी शैलेंद्र सिंह ने वहां पर सुरक्षा के मजबूत इंतजाम किए हैं। मुख्य द्वार पर लगी सिक्योरिटी किसी भी व्यक्ति या कर्मचारी को बिना मेटल डिटेक्टर से जांच के अंदर प्रवेश नहीं करने देती।
यहां तक की क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी स्वयं भी अपनी जांच कराने के बाद ही कार्यालय में प्रवेश करते हैं। जो भी आवेदक आते हैं उनके दस्तावेज देखने के बाद ही उन्हें कार्यालय परिसर के अंदर प्रवेश दिया जाता है। ऐसे में कोई भी ऐसा व्यक्ति जिसके पास बम हो घुसना आसान नहीं हैं।
