बरेली के इस गांव में एक भी वाल्मीकि परिवार नहीं, फिर भी नाम है 'मेहतरपुर'... 22 साल से 'रामगढ़' बनने का इंतजार!
बरेली के मेहतरपुर करोड़ गांव का नाम 'रामगढ़' में बदलने का प्रस्ताव 22 साल से सरकारी फाइलों में अटका है। ...और पढ़ें

मेहतरपुर करोड़ का कंपोजिट विद्यालय। जागरण
HighLights
तत्कालीन डीएम मूलचंद यादव के सुझाव पर बना था प्रस्ताव
क्षेत्र पंचायत बोर्ड ने भी सर्वसम्मति से प्रस्ताव किया था पारित
कमलेश शर्मा, बरेली। बिथरी चैनपुर विधानसभा के भुता ब्लाक क्षेत्र में मेहतरपुर करोड़ गांव को 22 साल पहले रामगढ़ में परिवर्तित करने के लिए ग्राम पंचायत और क्षेत्र पंचायत स्तर से प्रस्ताव पास किया गया था। जिला प्रशासन ने प्रस्ताव अनुमोदित कर शासन को भेजा था, लेकिन अभी तक गांव का नाम परिवर्तित होने वाली फाइल सरकारी फाइलों में दबकर रह गई है।
प्रधान ने यह पहल तत्कालीन जिलाधिकारी के सुझाव पर की थी, क्योंकि मेहतरपुर गांव में एक भी वाल्मीकि परिवार नहीं रहता है। ग्राम पंचायत की ओर से पुरानी फाइल निकलवाकर दोबारा प्रयास शुरू किए जा रहे हैं ताकि मेहतरपुर की पहचान रामगढ़ के रूप में होने लगे।
सरकारी अस्पताल, पशु चिकित्सालय, प्राथमिक विद्यालय, जूनियर हाईस्कूल, कन्या पाठशाला, साधन सहकारी समिति से समृद्ध आदर्श गांव मेहतरपुर करोड़ में सप्ताह में दो दिन बाजार भी लगता है।
गांव का नाम परिवर्तन की कवायद 2004 में तत्कालीन प्रधान सुषमा यादव और उनके पति पूर्व प्रधान ओमपाल सिंह यादव ने की थी। ग्राम पंचायत की किसी समस्या को लेकर वह लोग तत्कालीन जिलाधिकारी मूलचंद यादव से मिलने उनके कार्यालय में पहुंचे थे।
गांव का नाम सुनकर डीएम ने सवाल किया था कि क्या गांव में वाल्मीकि समाज के लोगों की संख्या अधिक है, लेकिन जब यह बताया गया कि गांव में एक भी वाल्मीकि परिवार नहीं रहता तो उन्होंने नाम परिवर्तित कराने की सलाह दी थी।
इसके बाद ग्राम पंचायत की बैठक बुलाकर गांव का नाम रामगढ़ किए जाने का प्रस्ताव पारित किया गया। फिर क्षेत्र पंचायत बोर्ड की बैठक में ग्राम पंचायत के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से अनुमोदन कर दिया गया।
उस समय उत्तर भारतीय सहकारी आवास निगम के प्रशासक रहे वीरपाल सिंह यादव ने भी जिलाधिकारी को पत्र लिखकर मेहतरपुर गांव का नाम बदलकर रामगढ़ किए जाने की सिफारिश की थी।
डाक विभाग के तत्कालीन वरिष्ठ डाक अधीक्षक की ओर से भी रिपोर्ट दी गई थी कि गांव का नाम परिवर्तन किए जाने से डाक सुविधाओं में कोई अड़चन नहीं आएगी।
उसी समय चमर सुकटिया का नाम बदलकर अंबेडकर नगर किए जाने का प्रस्ताव भी भेजा गया था, सुकटिया का नाम तो बदल गया, लेकिन मेहतरपुर का नाम आज तक नहीं बदल सका।
वर्तमान में ओमपाल सिंह यादव के छोटे भाई सोमपाल सिंह यादव की पत्नी शशिप्रभा यादव प्रधान हैं। आजादी के बाद से सिर्फ एक चुनाव को छोड़कर अन्य सभी चुनावों में इसी परिवार में प्रधानी रही है।
प्रधान शशिप्रभा यादव, पूर्व प्रधान ओमपाल सिंह यादव और क्षेत्र पंचायत सदस्य सुषमा यादव ने पुराना रिकार्ड निकलवाकर दोबारा जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री से मिलकर गांव का नाम परिवर्तन कराने की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की है।
शासन से ऐसे गांवों के नाम परिवर्तन के लिए प्रस्ताव मांगे गए थे, लेकिन अभी ग्राम पंचायत अस्तित्व में नहीं होने के कारण प्रस्ताव शासन को नहीं भेजा गया है। ग्राम पंचायत अस्तित्व में आने के बाद प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा।
पूर्णिमा सिंह, एडीएम (प्रशासन)
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