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आम जनता पर सख्ती, सरकारी विभागों पर नर्मी? बरेली नगर निगम के 137 करोड़ दबाए बैठे हैं IVRI और बरेली कॉलेज

Published: Sat, 10 Oct 2026 02:35 PM (IST)

बरेली नगर निगम सरकारी विभागों से 137 करोड़ रुपये का संपत्ति कर वसूलने में जूझ रहा है, जिसमें IVRI और ...और पढ़ें

आईवीआरआई और बरेली कॉलेज

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HighLights

  1. ओटीएस के तहत भुगतान कराने की अपील, ब्याज-सरचार्ज में भी राहत का आश्वासन

जागरण संवाददाता, बरेली। आम आदमी से संपत्तिकर (हाउस टैक्स) वसूली के लिए नगर निगम सख्ती करता है, मगर सरकारी विभागों पर करोड़ों का बकाया जमा कराने में पसीने छूट रहे हैं। शहरी क्षेत्र में आईवीआरआई, बरेली कालेज, पीडब्ल्यूडी, प्रधान डाकघर समेत दस सरकारी विभागों ने ही निगम के 137 करोड़ दबाए बैठे हैं।

बीते कई वर्ष से बकाया जमा कराने को पत्राचार भेजने की प्रक्रिया के तहत एक बार फिर से निगम ने पत्राचार कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर दी है।

मुख्य कर निर्धारण अधिकारी के अनुसार चालू वित्त वर्ष में ओटीएस के तहत आवेदन कर बकाया जमा नहीं करने पर संबंधित विभागों-संस्थानों के विभागाध्यक्षों को लेकर शासन को पत्र लिखा जाएगा।

Municipal Arrears Infographic in Hindi

शहर के 80 वार्डों में 1.79 लाख भवन हैं। इन भवनों पर लगने वाले गृहकर जमा करने और उस पर लगे ब्याज-सरचार्ज को शासन ने माफ करने के लिए ओटीएस योजना लागू की है।

15 अगस्त से 15 दिसंबर तक चल रही योजना के तहत अब तक सिर्फ 6400 आवेदन आए हैं और इनसे 6.85 करोड़ का ही बकाया मांग सृजित हुई है, जिनमें 1.56 लाख की राशि जमा हुई है।

इन सबके बीच नगर निगम टैक्स विभाग ने शुक्रवार को शहर क्षेत्र में संचालित सरकारी विभागों पर बकाया का लिस्ट जारी की। इसमें सबसे बड़े बकायेदारों में भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) पहले स्थान पर है।

इसके बाद बरेली कालेज और महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय का नंबर है। इन तीनों संस्थानों पर ही 120 करोड़ से अधिक की मांग दर्ज है। इतनी बड़ी रकम फंसे होने से निगम के राजस्व पर असर पड़ रहा साथ ही शहर का विकास भी प्रभावित हो रहा।

 

संपत्तिकर शहर की सफाई, सड़क, जल निकासी और अन्य नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाती है। ऐसे में सरकारी विभागों-संस्थानों से भी ओटीएस के तहत भुगतान की अपील की गई है, इसके बाद भी लापरवाही पर संबंधित विभागों व विभागाध्यक्षों को लेकर शासन को पत्र लिखा जाएगा।

- पीके द्विवेदी, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी


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