बिना डॉक्टरी जांच के बन रहे थे दिव्यांग प्रमाणपत्र! मेरठ के छात्र का नीट यूजी काउंसलिंग कनेक्शन आया सामने
बरेली सीएमओ कार्यालय में फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाने के मामले में आउटसोर्सिंग कर्मचारी कुलदीप की गिरफ्तारी के बाद प्रमाणपत्र बनने ...और पढ़ें

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HighLights
आउटसोर्सिंग कर्मचारी की गिरफ्तारी के बाद से दिव्यांग प्रमाणपत्र बनने हुए बंद
दिल्ली पुलिस कंप्यूटर सिस्टम भी ले गई साथ, नए कर्मचारी की तैनाती भी नहीं
जागरण संवाददाता, बरेली। फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाने के मामले में आउटसोर्सिंग कर्मचारी कुलदीप की गिरफ्तारी के बाद से मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय स्थित दिव्यांगजन कार्यालय से प्रमाणपत्र बनने बंद हो गए हैं। दिल्ली पुलिस के अपने साथ कंप्यूटर सिस्टम और हार्ड डिस्क ले जाने के बाद से कोई कर्मचारी भी कार्यालय में नहीं बैठ रहा है।
लोग अपने प्रमाणपत्र के संबंध में जानकारी लेने आ रहे हैं लेकिन मायूस होकर वापस लौट रहे हैं। वहीं इस मामले में नोडल अधिकारी और पटल बाबू से भी प्रमाणपत्र बनाने की जिम्मेदारी वापस ली जा सकती है।
कुलदीप को दिल्ली पुलिस ने बीते शुक्रवार को गिरफ्तार किया था। इसके बाद शनिवार को पुलिस उसको लेकर सीएमओ कार्यालय पहुंची और जांच की थी।
पुलिस सोमवार को दोबारा पहुंची थी जिसकी वजह से काम न होने से सभी दिव्यांग वापस हो गए थे। अब रोजाना दिव्यांग आते हैं लेकिन कार्यालय में किसी के न मिलने पर वापस चले जाते हैं।
सीएमओ डाॅ. विश्राम सिंह का कहना है कि मेडिकल बोर्ड में डाॅ. एलके सक्सेना को हटाकर नए डाक्टर जितेंद्र कुमार को शामिल कर दिया गया है, जल्द ही नए कर्मचारी और बाबू की तैनाती कर प्रमाणपत्र बनाने की प्रक्रिया शुरू करा दी जाएगी।
प्रमाणपत्र बनाने की प्रक्रिया
दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाने के लिए स्वावलंबन पोर्टल पर आनलाइन आवेदन किया जाता है। इसके बाद एक आइडी जनरेट होती है। इसके बाद आवेदन आवेदक को निर्धारित तिथि में सीएमओ आफिस स्थित दिव्यांगजन कार्यालय में मेडिकल बोर्ड के सामने पेश किया जाता है। मेडिकल बोर्ड की संस्तुति के बाद पोर्टल पर रिपोर्ट लगाई जाती है और फिर आनलाइन प्रमाणपत्र जारी हो जाता है।
नोडल अधिकारी ने मोरिस नगर थाने में जाकर सौंपी रिपोर्ट
बरेली के सीएमओ कार्यालय से जारी आठ दिव्यांग प्रमाणपत्रों की दिल्ली पुलिस जांच कर रही है। इसमें तीन के संबंध में नोडल अधिकारी एसीएमओ डा. राकेश से जांच रिपोर्ट मांगी थी।
इनमें सुनने की दिव्यांगता डाॅ. एलके सक्सेना ने प्रमाणित की है। दिल्ली पुलिस ने नोडल अधिकारी, डाॅक्टर और पटल बाबू सुनील को गुरुवार को मोरिस नगर थाने में बुलाया था, जिसमें नोडल अधिकारी ने थाने में जाकर रिपोर्ट सौंप दी है।
मेरठ के छात्र का भी बना कार्ड, नीट यूजी की काउंसिलिंग में इस्तेमाल का शक
बरेली सीएमओ कार्यालय से जारी आठ फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्रों में से एक प्रमाणपत्र मेरठ के एक छात्र का है। दिल्ली पुलिस को ललित के पास से मेरठ के छात्र के नाम से फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के साथ नीट यूजी में एमबीबीएस, बीडीएस आदि की काउंसिलिंग के दस्तावेज भी मिले हैं। ललित ने पूछताछ में बताया कि उसने सभी दिव्यांग प्रमाणपत्र बिना डॉक्टर के परीक्षण के बनवाए हैं।
