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DU में दाखिले का 'दिव्यांग' स्कैम: Aligarh से निकला मास्टरमाइंड, Bareilly और Badaun CMO ऑफिस से जुड़ा कनेक्शन

Published: Wed, 09 Sep 2026 04:18 PM (IST)

दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रवेश के लिए फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्रों का खुलासा हुआ है। पुलिस ने मास्टरमाइंड ललित कुमार को गिरफ्तार ...और पढ़ें

एआई इमेज है।

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HighLights

  1. दिल्ली पुलिस ने ललित की गिरफ्तारी के बाद 16 फर्जी प्रमाणपत्र किए बरामद

  2. आठ दिव्यांग प्रमाणपत्र बरेली और चार बदायूं के सीएमओ आफिस से बनाए गए

जागरण संवाददाता, बरेली। दिल्ली यूनिवर्सिटी व अन्य संस्थानों में जेबीटी, बीटेक आदि पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए बरेली और बदायूं के सीएमओ कार्यालय स्थित दिव्यांगजन कक्ष से फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाए गए थे। प्रमाणपत्र के लिए अधिकांश में कान और आंखों की दिव्यांगता में खेल किया गया था।

फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने के लिए दिल्ली के छात्रों का पता बदलकर बरेली और बदायूं किया गया था जो प्रमाणपत्र मिले हैं, उनमें सीएमओ बरेली और बदायूं के डिजिटल सिग्नेचर हुए हैं।

उत्तरी दिल्ली के मोरिस नगर के स्पेशल स्टाफ ने 31 अगस्त को मूल रूप से अलीगढ़ निवासी ललित कुमार उर्फ आदित्य को गिरफ्तार किया था। ललित वर्तमान में हरियाणा के फरीदाबाद के जाजरू में रहता है।

वह दिल्ली यूनिवर्सिटी में छात्रों को प्रवेश दिलाने के लिए छात्रों के फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाता है। इसके बदले में वह छात्रों से मोटी रकम भी वसूलता था। पुलिस ने उसके पास से कई शैक्षिक प्रमाण पत्र, दिव्यांग प्रमाणपत्र, आधार कार्ड आदि की प्रतियां बरामद की हैं।

पुलिस ने जब दस्तावेज चेक किए तो उसके पास 16 दिव्यांग प्रमाण पत्र मिले, इनमें बदायूं सीएमओ कार्यालय स्थित दिव्यागंजन आफिस से चार दिव्यांग प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं। इसके अलावा आठ दिव्यांग प्रमाणपत्र बरेली सीएमओ आफिस से जारी किए गए हैं।

बदायूं से जो दिव्यांग प्रमाणपत्र बने हैं, उसमें आंखों की दिव्यांगता दिखाई गई है और जो बरेली से बने हैं, उनमें अधिकांश में कान की दिव्यांगता दिखाई गई है। ललित की निशानदेही के बाद दिल्ली पुलिस ने सीएमओ आफिस के आउटसोर्सिंग कर्मचारी कुलदीप को गिरफ्तार किया।

इसके बाद उसे शनिवार और फिर सोमवार को जांच के लिए सीएमओ कार्यालय लेकर पहुंची थी। यहां सीएमओ डाॅ. विश्राम सिंह, नोडल अधिकारी एसीएमओ डाॅ. राकेश और वरिष्ठ कान, नाक एवं गला रोग विशेषज्ञ डाॅ. एलके सक्सेना से जानकारी ली थी।

दिल्ली पुलिस फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्रों की जानकारी लेने के साथ अपने साथ हार्ड डिस्क भी लेकर गई है ताकि पता चल सके कि कितने फर्जी प्रमाणपत्र बनवाए गए थे।

दिव्यांग प्रमाणपत्र पर बरेली-बदायूं का पता, आधार पर दिल्ली का

बरेली और बदायूं सीएमओ आफिस से जो दिव्यांग प्रमाण पत्र बने हैं, वह बरेली और बदायूं के अलग-अलग पते पर बने हैं। बरेली में फरीदपुर, बुखारा, इज्जतनगर सहित अन्य पतों पर फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाए गए हैं।

यह दिव्यांग प्रमाणपत्र दिल्ली के रहने वाले छात्रों के ही हैं, क्योंकि आधार कार्ड पर पता दिल्ली का ही लिखा हुआ है। इसका मतलब साफ है कि इन छात्रों के पहले फर्जी आधार कार्ड बरेली-बदायूं के पते पर बनाए गए और फिर दिव्यांग प्रमाणपत्र बनने के बाद प्रवेश के लिए इनका इस्तेमाल किया गया।

सीएमओ ने भी शुरू कराई जांच

फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाने के मामले में दिल्ली पुलिस की जांच के बाद सीएमओ डाॅ. विश्राम सिंह ने भी जांच समिति बनाई है। समिति कुलदीप के कार्यालय में बनाए गए प्रमाणपत्रों की जांच करेगी।

इसके अलावा जिन प्रमाणपत्रों की दिल्ली पुलिस ने जानकारी मांगी है, उसके संबंध में भी जांच की जाएगी। इसके अलावा अलग-अलग ब्लाक के 100-100 प्रमाणपत्रों की भी रैंडम जांच कराई जाएगी।

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