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बरेली में बदल गए सियासी समीकरण! BJP के राज्यसभा दांव से इन 3 विधानसभा सीटों पर नए चेहरों की एंट्री तय

Published: Tue, 06 Oct 2026 05:03 PM (IST)

बरेली में भाजपा के राज्यसभा प्रत्याशियों के चयन से आंवला और बहेड़ी विधानसभा सीटों पर नए चेहरों की तलाश तय ...और पढ़ें

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HighLights

  1. आंवला, बहेड़ी और फरीदपुर में नए प्रत्याशियों की तलाश तय

  2. जिले की कुछ अन्य सीटों पर भी पार्टी बदल सकती है चेहरा

अशोक आर्य, बरेली। जिले की राजनीति में राज्यसभा चुनाव ने नई हलचल पैदा कर दी है। भाजपा ने बरेली से प्रदेश सरकार के मंत्री धर्मपाल सिंह और श्रुति गंगवार को राज्यसभा का प्रत्याशी बनाकर विधानसभा चुनाव की सियासी तस्वीर में बड़ा बदलाव कर दिया है। दोनों के राज्यसभा पहुंचने की स्थिति में आंवला और बहेड़ी विधानसभा सीटों पर नए चेहरों की तलाश शुरू होना तय माना जा रहा है।

वहीं, सुरक्षित सीट फरीदपुर विधायक प्रो. श्याम बिहारी के निधन से पहले ही खाली है। ऐसे में जिले की नौ विधानसभा सीटों में कम से कम तीन पर नए चेहरे सामने आने की संभावना मजबूत हो गई है। इसके अलावा पार्टी के आंतरिक सर्वे और प्रदर्शन के आधार पर कुछ अन्य सीटों पर भी प्रत्याशी बदले जा सकते हैं।

आंवला विधानसभा सीट पर धर्मपाल सिंह का प्रभाव लंबे समय से कायम है। वह पांच बार विधायक चुने जा चुके हैं और लोधे समाज में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।

संगठन में सक्रियता और क्षेत्र में व्यक्तिगत प्रभाव के चलते आगामी विधानसभा चुनाव में भी उनका टिकट लगभग तय माना जा रहा था। यही वजह है कि उनके सामने चुनाव लड़ने की इच्छा रखने वाले कई दावेदार खुलकर सामने नहीं आ रहे थे।

अब राज्यसभा के लिए उनका नाम घोषित होने के बाद आंवला में भाजपा को नए चेहरे पर दांव लगाना होगा। संगठन से जुड़े कई लोगों की सक्रियता बढ़ने की संभावना है और आने वाले दिनों में दावेदारों की संख्या भी बढ़ सकती है।

वहीं, श्रुति गंगवार के राज्यसभा प्रत्याशी बनने से बहेड़ी की राजनीति भी नए मोड़ पर पहुंच गई है। कुर्मी समाज से आने वाली श्रुति गंगवार लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय थीं।

उनके पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार की राजनीतिक विरासत और क्षेत्र में उनके संपर्कों को देखते हुए उन्हें बहेड़ी से संभावित दावेदार माना जा रहा था।

पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी रहे छत्रपाल सिंह गंगवार अब सांसद हैं। ऐसे में पार्टी के सामने बहेड़ी में कुर्मी समीकरण के साथ नया चेहरा चुनने की चुनौती होगी।

सुरक्षित फरीदपुर विधानसभा सीट पर विधायक प्रो. श्याम बिहारी के निधन के बाद से ही नए प्रत्याशी को लेकर चर्चा है। क्षेत्र में उनके परिवार से किसी सदस्य को आगे किए जाने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन अंतिम निर्णय पार्टी संगठन और नेतृत्व को करना है।

ऐसे में यहां भी नए चेहरे पर दांव लगाए जाने की संभावना है। पार्टी के लिए चुनौती यह होगी कि वह दिवंगत विधायक की राजनीतिक विरासत, स्थानीय स्वीकार्यता और संगठन की पसंद के बीच संतुलन कैसे बनाए।

भोजीपुरा और बहेड़ी में वापसी की चुनौती

भाजपा वर्ष 2022 में हारी हुई भोजीपुरा और बहेड़ी सीटों को दोबारा जीतने के लिए भी रणनीति तैयार कर रही है। दोनों सीटों पर पार्टी के स्तर से दावेदारों का आकलन किया जा रहा है।

आंतरिक सर्वे में स्थानीय पकड़, संगठन में सक्रियता, सामाजिक प्रभाव और चुनावी जीत की संभावना जैसे बिंदुओं को आधार बनाया जा रहा है। ऐसे में इन सीटों पर भी पुराने चेहरों के बजाय नए और मजबूत विकल्पों को मौका मिलने से इन्कार नहीं किया जा सकता।

जातीय समीकरण के साथ तय होगी चुनावी बिसात

बरेली जिले में नौ विधानसभा सीटें हैं। भाजपा आगामी चुनाव में प्रत्याशी चयन के दौरान जातीय समीकरण को भी प्रमुख आधार बनाएगी। जिले में कुर्मी, लोधे, मौर्य, वैश्य, ब्राह्मण और कायस्थ समेत प्रमुख सामाजिक समूहों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश होगी। पार्टी लोकसभा क्षेत्रवार सामाजिक समीकरण और विधानसभा स्तर पर प्रत्याशी की व्यक्तिगत पकड़ को मिलाकर निर्णय ले सकती है।

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