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भगवान राम ने जहां ग्रहण की शिक्षा, वही सप्तऋषि आश्रम बनेगा श्रीराम गुरुकुल कॉरिडोर

Published: Tue, 20 Oct 2026 12:02 PM (IST)

अयोध्या में श्रीराम मंदिर के बाद अब बाराबंकी के सतरिख स्थित सप्तऋषि आश्रम को श्रीराम गुरुकुल कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की तैयारी है।

सतरिख स्थित सप्तऋषि आश्रम को श्रीराम गुरुकुल कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की तैयारी।

 सतरिख स्थित सप्तऋषि आश्रम को श्रीराम गुरुकुल कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की तैयारी।

HighLights

  1. बाराबंकी के सतरिख में श्रीराम गुरुकुल कॉरिडोर बनेगा।

  2. भगवान श्रीराम ने यहीं शिक्षा ग्रहण की थी, ऐसी मान्यता है।

  3. पहचान विवाद के बावजूद कॉरिडोर विकास का प्रस्ताव तैयार।

प्रेम अवस्थी, बाराबंकी। अयोध्या में श्रीरामलला का भव्य मंदिर बनने के बाद अब बाराबंकी के सतरिख स्थित सप्तऋषि आश्रम को श्रीराम गुरुकुल कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की तैयारी है।

मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने अपने भाइयों लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न के साथ यहीं शिक्षा ग्रहण की थी। जिला मुख्यालय से सात किमी दक्षिण में नगर पंचायत सतरिख को ही सप्तऋषि आश्रम कहा जाता है। दिक्कत यह है कि इसकी पहचान पर पांच दावेदार हैं।

दो साल पहले तत्कालीन डीएम सत्येंद्र कुमार उदासीन अखाड़ा गए थे और संत नानक शरण दास से मिले थे, जिन्होंने अपने आश्रम को सप्तऋषि आश्रम बताया था। इसके बाद हरवंश औषधालय परिसर, प्राचीन देवघरा माता मंदिर, श्रीरामचंद्र मिशन व मक्कीदास बाबा कुटी सहित पांच स्थलों ने स्वयं को सप्तऋषि आश्रम घोषित कर दिया।

पहचान की इसी दुविधा के कारण वंदन योजना के तहत जीर्णोद्धार का प्रस्ताव लटक गया। क्योंकि दावे वाले सभी स्थल नगर पंचायत सतरिख की सीमा से बाहर हैं। इस गतिरोध को खत्म करने के लिए साहित्यकार अजय सिंह गुरु ने अप्रैल माह में तत्कालीन डीएम शशांक त्रिपाठी को ज्ञापन दिया।

उन्होंने मांग की कि सभी आश्रमों को समायोजित करते हुए पूरे क्षेत्र को श्रीराम गुरुकुल कॉरिडोर घोषित किया जाए। उन्होंने थाने के दक्षिण-पश्चिम कोने को अधिग्रहण के लिए उपयुक्त बताते हुए सर्वे भी किया।

तत्कालीन डीएम शशांक त्रिपाठी ने संयुक्त मजिस्ट्रेट एसडीएम सदर गुंजिता अग्रवाल और क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी को जांच के लिए नामित कर कारिडोर की संभावना पर आख्या मांगी। दो सदस्यीय टीम ने आख्या में कहा है कि श्रीराम गुरुकुल कारिडोर बनाना शासन स्तर से संभव है।

वहीं मौजूदा डीएम ईशान प्रताप सिंह का कहना है कि श्रीराम गुरुकुल कॉरिडोर के लिए एक बार फिर स्थलीय सर्वे कराकर प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा जाएगा।

उधर श्री लोधेश्वर महादेव कॉरिडोर निर्माण में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिला प्रशासन के बीच अहम कड़ी रहे खाद्य रसद एवं नागरिक आपूर्ति राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा भी अयोध्या में रामलला मंदिर के बाद उनके गुरुकुल को कारिडोर के रूप में विकसित करने के पक्ष में हैं। उनका कहना है कि वह शीघ्र ही यह प्रकरण मुख्यमंत्री के सामने रखेंगे।

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