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आस्था बची, आबादी बही... जब सरयू के यू-टर्न ने बचाया 1100 साल पुराना बाबा नारायण दास का धाम

Published: Sat, 24 Oct 2026 10:09 AM (IST)

हेतमापुर में सरयू नदी के कटाव ने तबाही मचाई, जहां 150 साल पुरानी मस्जिद और कई घर बह गए। हालांकि, ...और पढ़ें

कटान के मुहाने पर हेतमापुर स्थित नारायण दास मंदिर। जागरण

कटान के मुहाने पर हेतमापुर स्थित नारायण दास मंदिर। जागरण

HighLights

  1. सरयू नदी ने हेतमापुर में मचाई भारी तबाही, घर बहे।

  2. 150 साल पुरानी मस्जिद और ईदगाह नदी में समाई।

  3. बाबा नारायण दास की समाधि चमत्कारिक रूप से बची।

प्रेम अवस्थी, बाराबंकी। सरयू तट पर बसा हेतमापुर गांव इन दिनों आस्था और तबाही की दोहरी कहानी बन गया है। 1100 साल पुराने बाबा नारायण दास की समाधि के बरामदे तक उफनकर लौट गई नदी ने 150 साल पुरानी उधिया मस्जिद समेत 75 पक्के घरों को अपनी गोद में समा लिया।

समाधि के सामने ही नदी ने यू-टर्न लिया, जिसे अफसर भी चमत्कार मान रहे हैं। इस बार मंदिर के चमत्कारिक रूप से बचने से आस्था और बढ़ी है। इस बार दीपावली पर लगने वाले मेला में पहले से कई गुणा ज्यादा भीड़ होने की उम्मीद है।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी मंदिर बचाने के निर्देश दिए थे। उधिया मजरे हेतमापुर में सूर्य उपासक बाबा नारायण दास की समाधि वाला मंदिर है। मान्यता है कि बाबा अपने जीवनकाल में इशारे से सरयू की धारा मोड़ देते थे। पिछले एक माह में वही मान्यता फिर चर्चा में है। बाढ़ कार्य खंड के अधिशासी अभियंता शशिकांत सिंह के अनुसार दो दिन तक समाधि पर पूजा की, निरंतर बोल्डार डाले गए। तब नदी बरामदे तक आकर लौट गई।

यह मंजर तब का है जब आधी रात को घाघरा अपने नाम के अनुरूप घाघरे की तरह घूमते हुए कटान कर रही थी।
नदी की कटान नीचे से होती है, ऐसे में एक झटके में 15-20 फीट जमीन समा जाती। अगस्त माह की कटान में 35 मकान, एक दूरसंचार केंद्र और एक शिव मंदिर सरयू में समाए।

27-28 सितंबर की रात 150 साल पुरानी उधिया मस्जिद भी दो से 10 सितंबर के मध्य कट गई। 10-12 और मकान, पशु अस्पताल की बाउंड्री भी नदी में समा गई।

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बाबा नारायण दास कौन 
स्थानीय अभिलेखों के अनुसार बाबा नारायण दास धाम करीब 1100 साल पुराना माना जाता है। घाघरा को यहां सरयू कहा जाता है, जो मानसरोवर के पास से निकलकर 1080 किमी बहकर गंगा में मिलती है। बाबा सूर्य उपासक थे और इसी तट पर तपस्या कर समाधि ली थी।

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