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अयोध्या हाईवे पर QR बोर्ड गायब, निर्माण लागत और कार्यदायी संस्था की पारदर्शिता पर उठे सवाल

Published: Fri, 23 Oct 2026 10:08 PM (GMT+05:30)Updated: Fri, 23 Oct 2026 10:11 PM (GMT+05:30)

अयोध्या हाईवे पर लगे क्यूआर बोर्ड्स से निर्माण लागत, कार्यदायी संस्था और रखरखाव जैसी महत्वपूर्ण जानकारी गायब है।

परियोजना की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे।

परियोजना की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे।

HighLights

  1. क्यूआर बोर्ड्स से निर्माण लागत और कार्यदायी संस्था की जानकारी गायब।

  2. हाईवे परियोजना की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हुए।

  3. यात्रियों को मिलने वाली कई जरूरी सेवाएं भी अधूरी।

संवाद सूत्र, अहमदपुर (बाराबंकी)। नेशनल हाईवे को स्मार्ट और हाईटेक बनाने की एक पहल की गई थी। उद्देश्य था कि हाईवे के किनारे परियोजना की जानकारी के लिए क्यूआर बोर्ड को लगाया जायेगा। ताकि मोबाइल से स्कैन करके परियोजना की जानकारी और जरूरी सेवाओं का लाभ यात्रियों को मिल सके। लेकिन निर्माण लागत,कार्यदायी संस्था का नाम सहित जरूरी जानकारी गायब है। जिससे परियोजना की पारदर्शिता और एनएचएआई पर कई सवाल खड़े है।

लखनऊ अयोध्या हाईवे को लखनऊ से रामसनेहीघाट तक पैकेज एक व अयोध्या तक दो पैकेज में बांटा गया है। जिसमें पैकेज एक करीब 53 किलोमीटर है। परियोजना की जानकारी के लिए इंदिरा नहर, दारापुर, रसौली, अहमदपुर टोल प्लाजा,रामसनेहीघाट सहित करीब पाँच जगहों पर परियोजना की पारदर्शिता के लिए हाईवे किनारे क्यूआर बोर्ड लगाये गए है।

ताकि यात्रियों द्वारा स्कैन करते ही परियोजना की जानकारी मिल सके। जिसमें हाईवे प्रोजेक्ट्स की कार्यदायी संस्था का नाम,लागत और मेंटेनेंस डिटेल्स को सार्वजनिक किया गया था। मिलने वाली आसपास की जरूरी सुविधाओ की जानकारी तुरंत स्क्रीन पर मिल जाएगी। लेकिन क्यूआर कोड पर निर्माण कार्यदायी संस्था,लागत, मेंटेनेंस की अवधि,सहित संबंधित जानकारी गायब है। यहाँ तक नौकरी छोड़ चुके प्रोजेक्ट मैनेजर और पेट्रोलिंग टीम का नम्बर दर्शया गया है।

परियोजना की पारदर्शिता का कैसे खुला राज

बस्ती से लखनऊ जा रहे धर्मराज की गाड़ी में तेल खत्म हो गया। उन्होंने अहमदपुर टोल प्लाजा पर लगे को क्यूआर कोड को स्कैन करके नजदीकी पेट्रोल पंप की जानकारी देखा। तो जानकारी सही मिली। लेकिन अन्य जानकारी पर पर्दा डाला गया था।

क्यूआर कोड मिलने वाली जरूरी सेवाएं

हाईवे पर लगे क्यूआर साइन बोर्ड पर प्रोजेक्ट से संबंधित यह जानकारी होनी चाहिए। जिसमें राष्ट्रीय राजमार्ग का नंबर, लागत, हाईवे का चेनेज, प्रोजेक्ट की लंबाई, निर्माण और रखरखाव का समय, हाईवे पेट्रोलिंग, टोल मैनेजर, प्रोजेक्ट मैनेजर, रेजिडेंट इंजीनियर, इमरजेंसी हेल्पलाइन 1033, एनएचएआई फील्ड ऑफिस का कॉन्टैक्ट नंबर और आस-पास की सुविधाओं जैसे अस्पताल, पेट्रोल पंप, शौचालय, पुलिस स्टेशन, रेस्टोरेंट, टोल प्लाजा की दूरी, ट्रक के लिए पार्किंग, पंचर ठीक करने की दुकान और वाहन सर्विस स्टेशन/ई-चार्जिंग स्टेशन आदि की जानकारी होनी चाहिए।

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