बाराबंकी में सरयू तट बना घड़ियालों का ठिकाना, दर्जनों की संख्या में दिखने से कई गांवों में खौफ का माहौल
बाराबंकी में सरयू नदी के किनारे घड़ियालों के लगातार दिखने से ग्रामीण दहशत में हैं और पशुपालकों को मवेशियों को पानी पिलाने में परेशानी हो रही है।

यह तस्वीर AI जेनेरेटेड है
HighLights
सरयू नदी किनारे घड़ियालों के दिखने से ग्रामीण भयभीत।
पशुपालकों को मवेशियों को पानी पिलाने में हो रही दिक्कत।
वन विभाग ने जागरूकता और सतर्कता अभियान चलाने की बात कही।
संवाद सूत्र, बाराबंकी। सरयू नदी के किनारे रेत पर रोजाना घड़ियाल बाहर निकलकर घंटों धूप सेकते नजर आ रहे हैं। इससे ग्रामीण दहशत में है। लगातार उनकी मौजूदगी से आसपास के गांवों के लोगों में भय बना हुआ है। इससे नदी किनारे बसे गांवों के लोगों में भय का माहौल है। सबसे अधिक परेशानी पशुपालकों को हो रही है, जो अब अपने मवेशियों को पानी पिलाने और नहलाने के लिए नदी में ले जाने से बच रहे हैं।
पूरेडलई क्षेत्र के कोठरी गौरिया, सूबेदार पुरवा, सेमरी, अतरसुइया, तेलवारी, गोबरहा और गौरी का पुरवा समेत दर्जनों गांवों के पशुपालक मवेशियों को चराने के बाद सरयू नदी तक ले जाते हैं। लेकिन पिछले कई दिनों से डेरेराजा, इटहुआ पूरब और तेलवारी गांव के सामने रेतीले तट पर घड़ियालों का झुंड दिखाई दे रहा है। ऐसे में नदी में उतरना जोखिम भरा हो गया है।
ग्रामीण सूबेदार सिंह और आशीष दीक्षित ने बताया कि घड़ियाल कई-कई घंटे तक रेतीले किनारों पर पड़े रहते हैं। इससे नदी के आसपास जाने वाले लोगों और मवेशियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। खतरे की आशंका में कई पशुपालकों ने मवेशियों को नदी तक ले जाना बंद कर दिया है। इससे उन्हें पशुओं को पानी पिलाने और नहलाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
क्षेत्रीय वन अधिकारी विशाल कुमार का कहना है इन दिनों घड़ियाल व मगरमच्छ की सन बास्किंग की प्रक्रिया चल रही है, और नदी तो उनका हब है। ग्रामीणों को सतर्कता के लिए कांबिंग कराई जाती है। सोमवार को टीम भेजकर जागरूक कराया जाएगा।