कोडीन सीरप कांड में अब होगी सबसे बड़ी कार्रवाई, बांदा की इस मेडिकल एजेंसी पर गिरने जा रही है गाज
अतर्रा की दो एजेंसियों के बाद अब हमीरपुर की ओम मेडिकल एजेंसी का लाइसेंस निरस्त होगा, जो कोडीन सीरप कांड ...और पढ़ें

HighLights
ओम मेडिकल एजेंसी का लाइसेंस निरस्त करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में।
मुख्य आरोपित प्रियांशु गुप्ता के बहनोई रवींद्र गुप्ता की है एजेंसी।
अतर्रा की दो एजेंसियों के बाद हमीरपुर की एजेंसी पर कार्रवाई।
जागरण संवाददाता, बांदा। कोडीन सीरप कांड में तीसरी एजेंसी की बारी आ गई है। मुख्य आरोपित प्रियांशु गुप्ता उर्फ किशन के बहनोई रवींद्र गुप्ता की हमीरपुर के टेढ़ा मोड़ स्थित ओम मेडिकल एजेंसी का लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई अब अंतिम चरण में है। औषधि निरीक्षक दिव्य प्रकाश मौर्य ने एजेंसी संचालक को नोटिस देकर कोडीनयुक्त कफ सीरप के कारोबार से जुड़े बिंदुओं पर जवाब मांगा था, लेकिन निर्धारित समय में जवाब नहीं दिया गया।
सहायक आयुक्त औषधि वीरेंद्र कुमार ने बताया कि मंगलवार को लाइसेंस निरस्तीकरण का पत्र तैयार कर लिया गया है। केवल औपचारिक कार्रवाई पूरी होने के बाद बुधवार को एजेंसी का लाइसेंस निरस्त किया जाएगा। तीन सितंबर को पकड़ी गई कोडीनयुक्त कफ सीरप की खेप से संबंधित बिल ओम मेडिकल एजेंसी के नाम मिला था।
इसके बाद एजेंसी के माध्यम से हुई दवाओं की खरीद-बिक्री और भुगतान से जुड़े लेनदेन को भी जांच के दायरे में लिया गया। संचालक रवींद्र गुप्ता मुख्य आरोपित प्रियांशु गुप्ता उर्फ किशन का बहनोई है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है। इसी मामले में औषधि विभाग ने फर्म से जुड़े अभिलेख और कारोबार को लेकर नोटिस जारी किया था।
मिली थीं अनियमितताएं
अतर्रा में पहले ही दो एजेंसियों पर कार्रवाई हो चुकी है। श्री श्याम मेडिकल एजेंसी और मामा मेडिकल एजेंसी के लाइसेंस सोमवार को निरस्त किए गए। इनमें पहली एजेंसी प्रियांशु गुप्ता उर्फ किशन और दूसरी प्रवीण उर्फ लकी के नाम पर संचालित थी। औषधि विभाग की जांच में लाइसेंस के सुरक्षित व प्रदर्शित नहीं मिलने तथा कुछ दवाओं के बिल उपलब्ध नहीं कराने जैसी अनियमितताएं मिली थीं।
निर्धारित समय में नोटिस का जवाब नहीं मिलने के बाद दोनों के खिलाफ कार्रवाई हुई। वहीं अतर्रा की श्रीराम मेडिकल एजेंसी का लाइसेंस फिलहाल निरस्त नहीं किया गया है। रामलीला मार्ग स्थित इस एजेंसी का लाइसेंस रोहित पांडेय के पिता कल्लूराम पांडेय के नाम है। सहायक आयुक्त औषधि वीरेंद्र कुमार ने बताया कि रोहित पांडेय आरोपित है, लेकिन एजेंसी के नाम कोडीनयुक्त कफ सीरप से संबंधित कोई बिल नहीं मिला है। संचालक ने विभाग के नोटिस का जवाब भी दे दिया है।
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ऐसे में फिलहाल लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई नहीं की गई है। हालांकि एजेंसी से कोडीनयुक्त कफ सीरप सहित संबंधित दवाओं की खरीद-बिक्री पर रोक लगाई जाएगी। औषधि विभाग के अनुसार विवेचना में यदि श्रीराम मेडिकल एजेंसी की भी किसी तरह की संलिप्तता सामने आती है तो उसका लाइसेंस भी निरस्त किया जाएगा।
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इस तरह कोडीनयुक्त कफ सीरप मामले में विभाग की कार्रवाई अतर्रा की दो एजेंसियों से आगे बढ़कर हमीरपुर की ओम मेडिकल एजेंसी तक पहुंच गई है और अब उसके लाइसेंस निरस्तीकरण की औपचारिकता पूरी की जानी है।
