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UP MLC Result 2026: बुंदेलखंड में भाजपा को लगातार दूसरी हार, विधानसभा चुनाव की राह कठिन

Published: Thu, 29 Oct 2026 04:39 PM (IST)

बुंदेलखंड में लोकसभा चुनाव के बाद अब एमएलसी चुनाव में भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है।

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जागरण संवाददाता, बांदा। बुंदेलखंड में लोकसभा चुनाव के बाद अब इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक एमएलसी चुनाव में भी भाजपा को झटका लगा है। सपा के डा. मानसिंह यादव ने भाजपा के अशोक कुमार राठौर को 27,663 मतों से हराकर जीत दर्ज की। इस सीट के 10 जिलों में सात बुंदेलखंड के हैं।

इसके बावजूद स्थानीय चेहरे के सहारे सपा को चुनौती देने की भाजपा की रणनीति सफल नहीं हुई। लोकसभा चुनाव में क्षेत्र की चार में से तीन सीटें गंवाने के बाद एमएलसी चुनाव में मिली हार ने आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के सामने संगठन और जनाधार मजबूत करने की चुनौती बढ़ा दी है।

बुंदेलखंड की चार संसदीय सीटों में तीन पर सपा

वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में बुंदेलखंड की चार संसदीय सीटों में से तीन पर सपा ने जीत दर्ज की थी। बांदा-चित्रकूट सीट पर सपा की कृष्णा देवी शिवशंकर पटेल ने भाजपा के आरके सिंह पटेल को 71,210 मतों से हराया था। हमीरपुर-महोबा सीट पर सपा के अजेंद्र सिंह लोधी 2,629 मतों से जीते थे।

जालौन सीट पर नारायण दास अहिरवार ने भाजपा के भानु प्रताप वर्मा को 53,898 मतों से हराया था। केवल झांसी-ललितपुर सीट पर भाजपा के अनुराग शर्मा ने कांग्रेस के प्रदीप जैन आदित्य को 1,02,614 मतों से शिकस्त दी थी।

लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद भाजपा ने संगठन में बदलाव कर अलग-अलग सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया। चित्रकूट में सामान्य वर्ग के लवकुश चतुर्वेदी की जगह अनुसूचित जाति के महेंद्र कोटार्य को जिलाध्यक्ष बनाया गया। बांदा में क्षत्रिय समाज के संजय सिंह की जगह लोधी समाज के कल्लू राजपूत को जिम्मेदारी दी गई।

हमीरपुर में ब्राह्मण समाज के सुनील पाठक की जगह निषाद समुदाय की शकुंतला निषाद को जिलाध्यक्ष बनाया गया। महोबा में वैश्य समाज के डा. अवधेश गुप्ता की जगह कुशवाहा समाज के मोहनलाल कुशवाहा को जिम्मेदारी सौंपी गई। अन्य जिलों और संगठन की निचली इकाइयों में भी बदलाव किए गए। हालांकि, इन प्रयासों के बाद भी पार्टी को स्नातक एमएलसी चुनाव में जीत नहीं मिल सकी।

स्थानीय प्रत्याशी पर दांव भी नहीं आया काम

इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में झांसी, ललितपुर, जालौन, बांदा, चित्रकूट, महोबा और हमीरपुर समेत 10 जिले शामिल हैं। इनमें सात जिले बुंदेलखंड के हैं, जबकि प्रयागराज, कौशांबी और फतेहपुर भी इस सीट का हिस्सा हैं। क्षेत्र में बुंदेलखंड की मजबूत हिस्सेदारी को देखते हुए भाजपा ने जालौन निवासी अशोक कुमार राठौर को प्रत्याशी बनाया था।

इसके बावजूद वह सपा के मौजूदा एमएलसी डा. मानसिंह यादव को नहीं हरा सके। डा. मानसिंह यादव को 60,358 मत मिले, जबकि अशोक कुमार राठौर को 32,695 मत प्राप्त हुए। इस तरह सपा ने 27,663 मतों से जीत दर्ज की। कुल 1,09,482 मतपत्रों की गणना हुई, जिनमें 9,596 मतपत्र निरस्त किए गए।

विधायकों और मंत्रियों की मौजूदगी के बावजूद हार

बुंदेलखंड के सात जिलों में कुल 19 विधानसभा सीटें हैं। इनमें भाजपा के 15 विधायक हैं। इनमें तिंदवारी के विधायक और प्रदेश सरकार में जलशक्ति राज्य मंत्री रामकेश निषाद भी शामिल हैं। वहीं, इस एमएलसी सीट में शामिल बुंदेलखंड से बाहर के प्रयागराज, कौशांबी और फतेहपुर जिलों की 21 विधानसभा सीटों में भाजपा के 11 और उसके सहयोगी दलों के दो विधायक हैं।

फतेहपुर की खागा सीट से विधायक कृष्णा पासवान और प्रयागराज शहर दक्षिण से विधायक व कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी भी इसी क्षेत्र में आते हैं। हालांकि, स्नातक एमएलसी चुनाव में मतदान करने वाले मतदाता विधानसभा चुनाव के मतदाताओं से अलग होते हैं। इसलिए इस नतीजे को विधानसभा चुनाव का सीधा संकेत नहीं माना जा सकता।

इसके बावजूद लोकसभा चुनाव में तीन सीटें गंवाने के बाद एमएलसी चुनाव में मिली हार भाजपा के लिए चिंता का विषय है। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को संगठन और कार्यकर्ताओं को मजबूत करने के साथ क्षेत्र में अपनी पकड़ कमजोर होने के कारणों की भी समीक्षा करनी होगी।

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