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यूपी एग्रीज योजना का कमाल, अब अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ेंगे बलरामपुर के 134 मत्स्य पालक

Published: Fri, 23 Oct 2026 12:16 PM (IST)

बलरामपुर में यूपी एग्रीज परियोजना के तहत 134 मत्स्य पालकों को आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण से जोड़ा जा रहा है। ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

HighLights

  1. मत्स्य पालकों को आधुनिक वैल्यू चेन और वैश्विक बाजार से जोड़ा जा रहा है।

  2. उन्नत किस्म के बीज और प्रोटीनयुक्त फीड उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

  3. एआई आधारित एक्वाकल्चर प्रबंधन और उन्नत मत्स्य पालन तकनीक का प्रशिक्षण।

चंद्र भूषण शुक्ल, बलरामपुर। प्रदेश सरकार व विश्व बैंक से वित्तपोषित यूपी डास्प विभाग के यूपी एग्रीज परियोजना के माध्यम से मत्स्य पालकों को आधुनिक वैल्यू चेन और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की पहल की गई है। परियोजना के तहत जिले में 10 कलस्टर विकसित किए गए हैं। प्रत्येक कलस्टर में लगभग 10 से 12 हेक्टेयर तालाब शामिल हैं।

इसमें करीब दो हेक्टेयर क्षेत्रफल तक के तालाब में मछली पालन करने वाले जिले के 134 मत्स्य पालकाें को उन्नत किस्म के बीज (फिंगरलिंग) और प्रोटीनयुक्त फीड उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। इससे तालाब से निकलने वाली मछली की खरीद, भंडारण, प्रसंस्करण और बाजार तक पहुंच की व्यवस्था मजबूत होगी।

परियोजना के तहत मत्स्य पालकों को आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया गया है। इसमें एआई आधारित एक्वाकल्चर प्रबंधन, स्वचालित फीडिंग सिस्टम और उन्नत मत्स्य पालन तकनीक शामिल है। तकनीकी विधि के माध्यम से मछली उत्पादन बढ़ाने के साथ लागत कम होगा। आइटीसी के नेटवर्क के माध्यम से मत्स्य पालकों और किसानों के उत्पादों की खरीद, कोल्ड स्टोरेज, प्रसंस्करण और विपणन की व्यवस्था बेहतर होगी।

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विकास खंड तुलसीपुर के पचपकड़ी के मत्स्य पालक बताते हैं कि करीब नौ वर्ष से मछली पालन करते हैं। इस पर यूपी एग्रीज परियाेजना के तहत साढ़े 12 हजार मछली बच्चे फ्री में मिले हैं। इसमें रोहू, नैनी, कतला शामिल है। बताया कि इस योजना से जुडने पर अधिकारियों ने तकनीकी विधि से मछली पालन करने की जानकारी भी दी है।

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जो पहले नहीं था, पहले पानी भरने के बाद तुरंत मछली के बच्चों को तालाब में डाल दिया जाता था। इससे आक्सीजन की कमी में बच्चे मर भी जाते थे। लेकिन प्रशिक्षण में बताया गया कि तालाब में पानी भरने के करीब 10 दिन बाद बच्चा डालें।

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यूपी डास्प व यूपी एग्रीज के माध्यम से 134 मत्स्य पालकों को उत्पादन से लेकर बाजार तक एकीकृत व्यवस्था से जोड़ा गया है। इनको साढ़े पांच लाख मछली के बच्चे दिए गए हैं। आधुनिक तकनीक, बेहतर इनपुट, प्रशिक्षण और बाजार की सीधी पहुंच से मत्स्य पालन को अधिक लाभकारी बनाने में मदद मिलेगी।

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- डा. भूपेंद्र सिंह चौहान, जिला परियोजना प्रबंधक