3 अरब की आएगी लागत, एमएलटीडी और बलरामपुर-भड़रिया तटबंधों के गैपों को दुरुस्त करने की तैयारी
बलरामपुर में 2022 की भीषण बाढ़ के बाद, भविष्य में ऐसी आपदा से बचने के लिए एमएलटीडी और बलरामपुर-भड़रिया तटबंधों ...और पढ़ें

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HighLights
2022 की बाढ़ के बाद तटबंधों की मरम्मत की तैयारी।
एमएलटीडी और बलरामपुर-भड़रिया तटबंधों के गैप भरे जाएंगे।
परियोजनाओं पर लगभग तीन अरब रुपये खर्च होंगे, बजट प्रतीक्षित।
श्लोक मिश्र, बलरामपुर। वर्ष 2022 में आई भीषण बाढ़ में गांवों के साथ शहर के कई मुहल्ले भी डूब गए थे। चारों तरफ पानी ही पानी था। पुन: शहर व उससे सटे गांवों के लोगों को बाढ़ की विभीषिका न झेलनी पड़े, इसके लिए तैयारी तेज कर दी गई है।
मेवालाल तालाब दिपवा (एमएलटीडी) तटबंध के चार गैपों एवं बलरामपुर-भड़रिया तटबंध के 24 गैंपों को दुरुस्त कराया जाएगा।
एमएलटीडी तटबंध को दुरुस्त कराने के लिए 37 करोड़ 35 लाख 63 हजार एवं बलरामपुर-भड़रिया तटबंध पर दो अरब 66 करोड़ 81 लाख 62 हजार रुपये खर्च होंगे। गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग (जीएफसीसी) पटना ने परियोजनाओं का निरीक्षण कर लिया है।
इन परियोजनाओं को बजट की प्रतीक्षा
बलरामपुर-भड़रिया तटबंध पर 24 गैप हैं। इन गैपों को भरने व तटबंध की पुनर्स्थापना के लिए 266 करोड़ की परियोजना तैयार की गई है।
इसी तरह मेवालाल तालाब-दिपवा तटबंध में चार गैपों को दुरुस्त करने के लिए 37 करोड़ का बजट प्रतीक्षित है। 58 किमी लंबे भोजपुर-शाहपुर तटबंध का अधिकांश हिस्सा सिद्धार्थनगर जनपद में है। आंशिक तटबंध बलरामपुर में है। इस गैप को भरने के लिए सिद्धार्थनगर से परियोजना बनाई गई है।
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10 माह पहले परियोजनाओं का हुआ था अनुमोदन
उप्र राज्य बाढ़ नियंत्रण परिषद की स्थायी संचालन समिति की 60वीं बैठक में 12 दिसंबर 2025 को दोनों परियोजनाएं अनुमोदित की गई हैं। दोनों परियोजनाएं 25 करोड़ से अधिक की होने के कारण तकनीकी एवं वित्तीय मूल्यांकन गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग के माध्यम से केंद्रीय जल आयोग की तकनीकी सलाहकार समिति से होनी है। इसके बाद परियोजना के क्रियान्वयन के लिए कार्यवाही आगे बढ़ेगी।
परियोजनाओं के तकनीकी एवं वित्तीय मूल्यांकन के लिए गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग लखनऊ भारत सरकार को मुख्य अभियंता गंडक सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग उप्र गोरखपुर के माध्यम से बीते तीन फरवरी को पत्र भेजा गया था। 28 अप्रैल को गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग पटना के चेयरमैन द्वारा परियोजना का स्थलीय निरीक्षण भी कर लिया गया है। स्वीकृति एवं धन आवंटन के बाद गैपों को पूर्ण कराया जाएगा।
-इं. भरत राम, अधिशासी अभियंता, बाढ़ खंड
