PM Kisan Yojana: इन किसानों को नहीं मिलेगी पीएम किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त, लिस्ट से हटा नाम
वरासत खतौनी और अधूरे अभिलेखों के कारण उन्हें यह लाभ नहीं मिल पाएगा, जबकि कई किसान ई-केवाईसी के लिए परेशान ...और पढ़ें

HighLights
15,736 किसान सम्मान निधि से वंचित रहेंगे।
विरासत खतौनी के कारण किस्त रोकी गई।
अभिलेख पूरे न होने से किसान परेशान।
जागरण संवाददाता, बलरामपुर। किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त आज भेजी जाएगी। जिले में लगभग दो लाख 56 हजार किसानों के बैंक खाते में धनराशि पहुंचेगी। वहीं, दूसरी तरफ 15736 किसानों को सम्मान निधि का लाभ नहीं मिलेगा, जिनका नाम खतौनी में वरासत के माध्यम से अंकित किया गया है।
2019 के बाद वरासत वाली खतौनी के आधार पर मिलने वाली सम्मान निधि रोक दी गई है। जिले में 21वीं किस्त दो लाख 72 हजार किसानों को मिली थी। नियम बदलने पर 22वीं किस्त 2,48,354 किसानों को ही मिल सकी थी। 23 हजार किसान योजना के लाभ से हटा दिए थे। इसमें अभी मात्र 8219 किसान ही अपने अभिलेख दे सके हैं। जिले में कुल 3,16,332 किसान कृषि विभाग में पंजीकृत हैं।
मार्च के बाद पीएम सम्मान निधि की किस्त पूर्व के भूमि धारक का मृत्यु प्रमाण पत्र व पट्टा धारक को जमीन का सत्यापन अभिलेख पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया।
ऐसे किसानों का नाम पूर्व भूमि धारक (पीएलओ) सूची में डाल दिया गया है। इसमें तीन श्रेणी के अभिलेख पूरी नहीं बनाई गई है। पहला पूर्व के भूमिधारक, दूसरा पिता का सम्मान निधि न बंद कराने व अंतिम जो किसान वरासत के अलावा अन्य श्रेणी में जमीन का मालिक बनने वाले शामिल हैं।
तीन वर्ष से नहीं मिली रही पीएम सम्मान निधि
सदर ब्लाक के ग्राम पंचायत बलरामपुर देहात काली थान के ननके ने बताया कि तीन वर्ष से पीएम सम्मान निधि की नहीं मिल रही है। जानकारी करने पर कर्मचारियों ने बताया कि ई-केवाइसी व अभिलेख में कमी होने पर किस्त रोक दी गई है। कई बार कार्यालय का चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन समस्या हल नहीं हो सका है।
ब्लाक श्रीदत्तगंज के गोमड़ी की जानवी ने बताया कि अपने पति का सम्मान निधि के आवेदन करने आए हैं। बताया कि दो वर्ष पूर्व में एक निजी सीएससी संचालक से आवेदन कराया था। अभी तक लाभ नहीं मिल सका है।
हर बार यही बताते हैं कि इस बार सम्मान निधि मिल जाएगी। कोई अधिकारी व कर्मचारी गांवों तक नहीं पहुंचते हैं, कि लोगों को सही जानकारी मिल सके। यही कहानी रागनी का भी वह अभी अपने पति का आवेदन करने आई है। दूसरे दिन आने को कह रहे हैं। दुर्गापुर गैंजहजवा के प्रकाश ने बताया कि तीन वर्ष पहले सम्मान निधि के लिए आवेदन किया था।
2019 के बाद जिस खतौनी में वरासत से नाम दर्ज किया गया है। उसमें पहले वाले मालिक का मृत्यु प्रमाण पत्र लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। अभिलेख पूरा करने पर पुन: योजना का लाभ मिलने लगेगा। किसानों के ई-केवाइसी व फार्मर रजिस्ट्री के लिए गांवों में अभियान चलाया जाता है।
-श्याम नरायण राम, उप कृषि निदेशक
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