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बलरामपुर में नारी सशक्तीकरण, चूल्हा-चौका छोड़ बनीं 'लखपति दीदी', खुद कमाने के साथ दूसरों को भी दे रहीं रोजगार

Published: Sat, 07 Nov 2026 01:52 PM (IST)

बलरामपुर में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 24 हजार महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर 'लखपति दीदी' बन गई ...और पढ़ें

यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है।

यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है।

HighLights

  1. 24 हजार महिलाएं स्वयं सहायता समूह से जुड़कर बनीं लखपति दीदी।

  2. आत्मनिर्भर बनने के साथ अन्य महिलाओं को भी दे रहीं रोजगार।

  3. विभिन्न कारोबारों से महिलाएं बन रही हैं आर्थिक रूप से सशक्त।

संवादसूत्र, बलरामपुर। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद जिले में 24 हजार महिलाएं अब तक अपनी जिंदगी बदल चुकी है। जो कभी चूल्हा-चौकी तक सीमित हुआ करती थीं, वह आज लखपति दीदी के नाम से प्रसिद्ध हो चुकी है। यह सभी महिलाएं कारोबार कर आत्मनिर्भर बनने की मिसाल पेश कर रही है। साथ ही गांवों की अन्य महिलाओं की कमाई करा रहीं हैं।

इसकी बानगी सदर ब्लॉक के हंसुआडोल की चंपा व गैंसड़ी की निशा अपने मेहनत के दम पर दो वर्ष में लखपति दीदी का दर्जा हासिल कर लिया है। वर्तमान में जिले में साढ़े 15 हजार समूह गठन है, इसमें एक लाख 26 हजार महिलाएं जुड़ी हैं।

9820 समूह को अब तक मिली सामुदायिक निधि
जिले में कुल 15252, महिला स्वयं सहायता समूह गठित हैं। इनमें से अब तक 9820 समूहों को सामुदायिक निवेश निधि व 9820 अधिक समूहों को रिवाल्विंग फंड यानि परिक्रमी निधि समूह की छोटे कारोबार के लिए मदद की गई है। चालू वित्तीय वर्ष में प्रशासन ने 199 समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रत्येक समूह को डेढ़ लाख रुपये की सामुदायिक निवेश निधि व 157 के रिवाल्विंग फंड आवंटित किया है।

इससे समूहों की महिलाओं ने सिलाई
कढ़ाई, मिठाई, पशुपालन, मसाला, किराना व कैंटीन की दुकानों के साथ खेती और पशुपालन जैसे काम शुरू कर दिए हैं। पिछले वर्ष से समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बजट में बढ़ोतरी की गई है। पहले प्रत्येक समूह को 15 हजार रुपये दिए जाते थे, अब दोगुणा कर दिया गया है। बैंक क्रेडिट लिंकेज की सीमा भी एक लाख 10 हजार से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये कर दी गई है। सदर ब्लॉक के ग्राम पंचायत हंसुआडोल की शीतला की समूह की चंपा दीदी बताती हैं कि दो वर्ष पूर्व समूह से जुड़ी थीं।

किराना स्टोर एवं ब्यूटी पार्लर से आमदनी होने पर दोना-पत्तल बनाने की इकाई लगाई है। साथ ही चार लोगों को रोजगार दिया है। इसी ब्लाक श्रीनगर गांव की पूजा समूह ममता सिंह बताती है, कि मुर्गी पालन कर रही हैं। वर्तमान में 500 मुर्गियां है। वर्ष भर में दो से तीन लाख तक आमदनी हो जाती है। साथ ही गांव की तीन महिलाओं को रोजगार दिया है।

इसी तरह तुलसीपुर, भुजहरा की गंगा स्वयं सहायता समूह की मनीषा भी दोना-पत्तल बनाकर आत्मनिर्भर बनने के साथ पांच और महिलाओं की आर्थिक तंगी दूर करने काम कर रही है। वहीं, गैसड़ी, महदेवा की निशा कुमारी व रनियापुर की साध्वी मसाला की खेती, शिवपुरा की ननकू देवी ने किराना स्टोर से लाखों की टर्न ओवर कर रही है।

जिले के अधिक से अधिक ग्रामीण महिलाओं को समूह से जोड़कर स्वरोजगार देने के लिए निरंतर प्रयास किया जा रहा है, ताकि महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें। - सुशील कुमार अग्रहरि, उपायुक्त स्वतः रोजगार

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