बलरामपुर की सड़कों पर 308 पहियों वाला महाबली ट्रक निकला तो थम गई रफ्तार, 5 घंटे गुल रही बिजली; हटाए गए 15 स्वागत द्वार
बलरामपुर में 308 पहियों वाले एक विशाल ट्रक के गुजरने से 5 घंटे बिजली गुल रही और 15 स्वागत द्वार ...और पढ़ें
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HighLights
308 पहियों वाले ट्रक से 5 घंटे बिजली गुल।
लखीमपुर खीरी के पीएलए प्लांट का बॉयलर ले जा रहा था।
गन्ने से बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक बनाने का देश का पहला प्लांट।
जागरण संवाददाता, बलरामपुर। 308 चक्का वाले ट्रक को निकालने के लिए भगवतीगंज उपकेंद्र के धर्मपुर फीडर की बिजली करीब पांच घंटे बंद रही। ट्रक पर रखे भारीभरकम बायलर को देखने के लिए सड़क के दोनों तरफ लोगों की भीड़ लगी रही। ट्रक को सकुशल निकालने के लिए पुलिस टीम रास्ता खाली करा रही थी। यही, नहीं बिजली तार और खंभा हटाने के साथ उतरौला से लेकर बलरामपुर में श्रावस्ती तक स्वागत द्वार को खोल कर अलग रख दिया गया।
करीब 15 प्रवेश द्वार खोले गए। इस ट्रक से लखीमपुर खीरी के कुंभी स्थित बलरामपुर चीनी मिल परिसर में लग रहे पालीलैक्टिक एसिड (पीएलए) के बॉयलर को ले जाया जा रहा है। 25 अक्टूबर तक कुंभी पहुंचने की उम्मीद है।
बेल्जियम से समुद्र के रास्ते उड़ीसा के पारादीप पोर्ट पहुंचा। 308 पहियों वाले हाइड्रोलिक ट्रक पर भारी भरकम वेसल (औद्योगिक बायलर या रिएक्टर वेसल) को रखकर लाया जा रहा है। बलरामपुर चीनी मिल लि. गन्ने से पर्यावरण के अनुकूल बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक (पीएलए) और को-पालिमर के निर्माण व अनुसंधान के लिए प्लांट लखीमपुर के कुंभी यूनिट में स्थापित कर रही है। इसमें कुल 100 करोड़ की लागत आएगी।
यह देश का पहला प्लांट है। यहां 100 टन प्रति वर्ष उत्पादन किया जाएगा। गन्ने से ही प्लास्टिक तैयार किया जाएगा। गन्ने से चीनी और उसके अवशेष को सूक्ष्म जीवों के माध्यम से पहले लैक्टिक एसिड में बदला जाएगा। फिर रासायनिक प्रक्रिया से पालीलैक्टिक एसिड में परिवर्तित करके बायोप्लास्टिक बनाया जाएगा, जो पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल रहेगा। पारंपरिक प्लास्टिक जहां नष्ट नहीं होती है, वहीं, यह डिस्पोज होकर कचरा और फिर खाद बन जाएगा। सिंगल यूज प्लास्टिक का विकल्प बनेगा।
