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तैनाती मिलते ही एक्शन मोड में आए बलिया के नए DM, अधिकारियों को दी हिदायत- कतई बर्दाश्त नहीं होगी लापरवाही

Published: Fri, 25 Sep 2026 09:09 AM (IST)

बलिया के नए जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने जिले में स्वच्छता, स्वास्थ्य, शिक्षा और जनकल्याणकारी योजनाओं को प्राथमिकता बताया। उन्होंने पात्रों ...और पढ़ें

नवागत जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह। जागरण

नवागत जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह। जागरण

HighLights

  1. पात्रों को आवास से आयुष्मान तक योजनाओं का लाभ मिलेगा।

  2. तीन माह में स्कूलों में फर्नीचर की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

  3. डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन व्यवस्था जल्द शुरू की जाएगी।

जागरण संवाददाता, बलिया। कलेक्ट्रेट सभागार में गुरुवार को नवागत जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने कहा कि जिले में स्वच्छता, स्वास्थ्य, शिक्षा और जनकल्याणकारी योजनाओं को लेकर प्रशासन की प्राथमिकताएं बताईं। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचाना और जिले को स्वच्छ एवं सुंदर बनाना प्रशासन की प्राथमिकता है। इसमें लापरवाही मिलने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी।

डीएम ने कहा कि जिले को झोपड़ी मुक्त बनाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाएं। पात्र परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाकर यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई व्यक्ति आवास के अभाव में झोपड़ी में रहने को मजबूर न हो। योजनाओं की जानकारी कामन सर्विस सेंटर और ग्रामीण क्षेत्रों में पंपलेट के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।

स्वच्छता व्यवस्था को लेकर उन्होंने सभी वार्डों में सफाई अभियान चलाने, नियमित कूड़ा निस्तारण और डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन व्यवस्था शुरू करने के लिए जल्द टेंडर प्रक्रिया पूरी करने को कहा। प्रत्येक दुकानदार के पास डस्टबिन होना अनिवार्य होगा।

इसके लिए एक सप्ताह की मोहलत दी जाएगी, इसके बाद नियमों का पालन नहीं करने वालों पर जुर्माना लगाया जाएगा। खराब स्ट्रीट लाइटों को ठीक कराने और जरूरत वाले स्थानों पर नई लाइट लगाने के निर्देश भी दिए गए। स्वास्थ्य योजनाओं की समीक्षा करते हुए डीएम ने 70 वर्ष से अधिक उम्र के पात्र बुजुर्गों के आयुष्मान कार्ड बनाने की प्रक्रिया तेज करने को कहा।

मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत पात्र बच्चों को प्रतिमाह 2500 रुपये की सहायता दिलाने के निर्देश दिए। शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी स्कूलों में बच्चे जमीन पर बैठकर न पढ़ें।

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बीएसए और ग्राम प्रधानों को तीन माह में विद्यालयों में फर्नीचर की व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई। जनसुनवाई में शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही पर संबंधित अधिकारियों से जवाब लेने की बात भी कही।

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