बहराइच पहुंचा ‘308 पहियों वाला’ ट्रक, 5 KMPH की रफ्तार से भारत के पहले बायोप्लास्टिक प्लांट का सफर जारी
बहराइच में बेल्जियम से आया 308 पहियों वाला विशालकाय ट्रक पहुंचा, जो लखीमपुर में बलरामपुर चीनी मिल के पहले बायोप्लास्टिक प्लांट के लिए भारी वेसल ले जा रहा है।

नानपारा टोल प्लाजा के निकट से होकर जाता 308 पहियों वाला ट्रक। जागरण
HighLights
बेल्जियम से आया 308 पहियों वाला विशालकाय ट्रक बहराइच पहुंचा।
लखीमपुर के बायोप्लास्टिक प्लांट के लिए वेसल ले जा रहा।
भारत का पहला गन्ने से बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक बनाने वाला प्लांट।
जागरण संवाददाता, बहराइच। बेल्जियम से लाई गई 308 पहिए वाला ट्रक जो कि अब 250 पहियों पर दौड़ रहा है, सोमवार को बहराइच जिले में पहुंच चुका है। यह ट्रक चंदौली और वाराणसी से होकर जिले से होते हुए लखीमपुर जाएगा।
308 पहियों वाले ट्रक के नाम से मशहूर हुए इस ट्रेलर पर भारी भरकम वेसल (औद्योगिक बॉयलर या रिएक्टर वेसल) को रखकर लाया जा रहा है, जो एक घंटे में पांच किमी की दूरी तय करता है। इससे वजन और लंबाई का अंदाजा लगाया जा सकता है। इसको देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी रही है।
लखीमपुर के कुंभी यूनिट में बन रहा प्लांट
बताया जाता है कि बलरामपुर चीनी मिल लिमिटेड गन्ने से पर्यावरण के अनुकूल बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक (पीएलए) और को-पालिमर के निर्माण व अनुसंधान के लिए प्लांट लखीमपुर के कुंभी यूनिट में स्थापित कर रही है। इसमें कुल 100 करोड़ की लागत आएगी। यह देश का पहला प्लांट है। यहां 100 टन प्रति वर्ष उत्पादन किया जाएगा।
इसी स्थान पर एक और बड़ा प्लांट स्थापित कर रही है। तीन हजार करोड़ से अधिक के निवेश से तैयार हो रहे प्लांट से 80 हजार टन प्रतिवर्ष उत्पादन होगा। गन्ने से ही प्लास्टिक तैयार किया जाएगा।
लोगों की उमड़ी रही भीड़
गन्ने से चीनी और उसके अवशेष को सूक्ष्म जीवों के माध्यम से पहले लैक्टिक एसिड में बदला जाएगा। फिर रासायनिक प्रक्रिया से पालीलैक्टिक एसिड में परिवर्तित करके बायोप्लास्टिक बनाया जाएगा, जो पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल रहेगा।
पारंपरिक प्लास्टिक जहां नष्ट नहीं होता है, वहीं यह डिस्पोज होकर कचरा और फिर खाद बन जाएगा। सिंगल यूज प्लास्टिक का विकल्प बनेगा। रविवार को रात में यह दुलारपुर टोल प्लाजा पहुंचा। इसके बाद सोवमार शाम छह बजे यह नानपारा के गुलालपुरवा टोल प्लाजा पहुंचा। देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी रही।
