चीनी से प्लास्टिक बनाने वाले भारत के पहले प्लांट में लगेगी ब्वायलर मशीन, 3000 करोड़ रुपये का बड़ा निवेश
भारत में पहला प्लांट लखीमपुर खीरी में बन रहा है, जहाँ चीनी और उसके वेस्ट मैटेरियल से पर्यावरण-अनुकूल प्लास्टिक उत्पाद, मुख्यतः जिप्सम बोर्ड, बनाए जाएंगे।

HighLights
भारत का पहला चीनी से प्लास्टिक बनाने वाला प्लांट।
लखीमपुर खीरी में 3000 करोड़ से अधिक का निवेश।
बेल्जियम से आई ब्वायलर मशीन वाराणसी पहुंची।
रवि पांडेय, वाराणसी। लखीमपुर खीरी में बलरामपुर चीनी मिल की कुंभी पीएलए (पाली लैक्टिक एसिड) डिविजन की भारत में पहला ऐसा प्लांट बन रहा है जहां चीनी और उसके वेस्ट मैटेरियल से प्लास्टिक बनाया जाएगा। इस प्लांट में बने प्लास्टिक से ज्यादातर मात्रा में जिप्सम बोर्ड बनेगा जिसका उपयोग प्रायः हर जगह कार्यालय या घरों में किया जा रहा है।
मशीन के साथ चल रहे टीम ने बताया कि प्लांट में चीनी को प्रोसेस करके एसिड के रूप में बनेगा, जिसके बाद इसे लैक्टाइड करके दाने के रूप में बनाया जाएगा। इसके बाद पीएलए रेज़िन (पाली लैक्टिक एसिड ) के जरिए प्लास्टिक के अलग-अलग उत्पाद बनाए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि प्लांट में सबसे ज्यादा जिप्सम बोर्ड बनाया जाएगा। जिसका प्रयोग प्रायः कार्यालय और व्यवसायिक जगहों पर किया जाएगा। यह प्लास्टिक वातावरण को नुकसान नहीं पहुंचाएगा।
तीन हजार करोड़ से अधिक लागत से बनने वाले प्लांट में विदेशी कंपनियों का सहयोग लिया जा रहा है। यह मशीन बेल्ज़ियम से शिपिंग कंपनी जेएम बक्सी द्वारा कंपनी तक पहुंचाया जाएगा। मंगलवार को यह मशीन डाफी टोल प्लाजा से आगे के लिए निकलेगी।
पांच महीने से ट्रक पर बसी है कर्मचारियों की गृहस्थी
308 पहियों वाला ट्रक चर्चा में बना हुआ है। पांच महीने पहले चला ट्रक कड़ी मशक्कत के बाद सोमवार को बाबा विश्वनाथ की नगरी पहुंचा तो ट्रक ला रहे कर्मी भी सुखद भावों में डूब गए। कहां रहते हैं सभी लोग? बताने लगे कि ट्रक ही हमारा घर है। ट्रक के केबिन के ठीक पीछे पूरी गृहस्थी है।
मशीन के साथ ट्रक पर बैठे कर्मचारी साजिब ने बताया कि पांचवां महीना होने को आया लेकिन मंजिल अभी दूर है। खाना इसी ट्रक पर बन रहा है और रात में ट्रक जहां रुकती है वहां तिरपाल से बने वैकल्पिक घर में सो जाते हैं।
इसी पर चारपाई और गृहस्थी के सभी सामान हैं। कपड़ा सुखाने के लिए ब्वायलर के बीच रस्सी बांधकर उसपर कपड़ा डाल देते हैं। साथ में राशन-पानी के साथ ही चूल्हा-चौका भी है।
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