लग्जरी लाइफ के लिए 'दलदल' में जा फंसा पीएचडी स्कॉलर, वॉट्सएप ग्रुप के एक मैसेज से खुला रहस्य
बागपत में लग्जरी जीवन जीने के लिए शिक्षित युवा साइबर अपराधी बन गए, जिसमें एक पीएचडी स्कॉलर और बीबीए छात्र शामिल हैं।
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HighLights
शिक्षित युवा लग्जरी जीवन के लिए साइबर अपराध में शामिल।
पीएचडी स्कॉलर और बीबीए छात्र भी गिरोह का हिस्सा थे।
पुलिस ने वॉट्सएप ग्रुप के मैसेज से गिरोह का पर्दाफाश किया।
जागरण संवाददाता, बागपत। लग्जरी जीवन जीने के लिए कम समय में अधिक रुपये कमाने के मकसद से पढ़े-लिखे युवा साइबर अपराधी बन गए। महिला मित्रों के लिए आभूषण तैयार कराए। गिरोह के सदस्य नेटवर्किंग के रूप में कार्य करते हैं।
पुलिस की सक्रियता बढ़ी तो एक आरोपित ने वाट्सएप ग्रुप में लिखा था कि हमारा साथी पकड़ा गया, मोबाइल तोड़कर फेंक दो...पुलिस ने पूछताछ के लिए बुलाए गए आरोपितों को थाने में ही गिरफ्तार कर लिया।
साइबर क्राइम थाना प्रभारी ब्रिजेश कुमार का कहना है कि पकड़ा गया आरोपित निशांत यादव पीएचडी स्कॉलर प्रथम वर्ष, सुमित ध्यानी बीबीए तृतीय वर्ष, प्रियांशु रावत बीबीए प्रथम वर्ष के छात्र हैं। शुभम, गौतम सोनकर और उमंग सोनकर कक्षा 12 उत्तीर्ण करने के बाद प्राइवेट बैंकों में नौकरी करने लगे थे, हालांकि वर्तमान में नौकरी नहीं करते हैं। तरुण भी 12वीं पास है। आरोपितों ने अपने शौक पूरे करने के लिए साइबर अपराध करना शुरू किया। महिला मित्रों को भी सोने-चांदी के आभूषण दिए थे।
नेटवर्किंग के रूप में काम करता था गिरोह
फरार आरोपित अंकित सिमकार्ड उपलब्ध कराता था। इसी तरह आरोपित बल्ली व अन्य आरोपित पीड़ित पॉलिसी धारकों से संबंधित इंश्योरेंस पॉलिसी डाटा उपलब्ध कराते थे। फर्जी आईडी पर मोबाइल सिम लिए जाते थे। यह गिरोह नेटवर्किंग के रूप में कार्य करता है।
पुलिस की सक्रिया देख गिरोह के सदस्यों को लग गया था कि अंकित पकड़ा गया है, इसलिए अपने डब्ल्यूई-6 नाम के वाट्सएप ग्रुप पर लिखा कि मोबाइल सिम उपलब्ध कराने वाला पकड़ा गया है, सभी अपने-अपने मोबाइल बंद कर तोड़ दो, कोई भी मोबाइल आन न करे, जबकि अंकित पकड़ा नहीं गया था। वह अब भी फरार है। ग्रुप में 25-30 सदस्य हैं।
यहां के हैं पीड़ित
पुलिस के मुताबिक एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत करने वाले 51 पीड़ित उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली राजस्थान, पंजाब, मध्य प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, झारखंड, लद्दाख, गोवा के शामिल हैं।
बता दें कि बीमा पॉलिसी के बहाने आनलाइन ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने आठ सदस्यों को गिरफ्तार किया। गिरोह का सरगना समेत कई आरोपित फरार हैं। आरोपित इंश्योरेंस कंपनी के अधिकारी और कर्मचारी बनकर लोगों के पास काल करते थे। 14 राज्यों के 51 लोगों से 1.20 करोड़ की ठगी सामने आ चुकी है।
