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रूहेलखंड का मिनी कुंभ: गंगा तट पर सजेगा तंबुओं का शहर, 17 नवंबर से शुरू होगा बदायूं का ऐतिहासिक ककोड़ा मेला

Published: Sat, 17 Oct 2026 07:51 PM (IST)

बदायूं का ऐतिहासिक ककोड़ा मेला 17 नवंबर से गंगा तट पर सजेगा, जिसे रूहेलखंड का मिनी कुंभ कहा जाता है। ...और पढ़ें

ककोड़ा मेला

ककोड़ा मेला

HighLights

  1. अगले सप्ताह से मेले के लिए पहुंचने लगेंगे साधु संत, जमने लगेंगे डेरे

जागरण संवाददाता, बदायूं। काकोड़ा मेले को अब केवल एक महीना शेष बचा है। बरसात थमते ही प्रशासन तैयारियों में जुट गया है। 17 नवंबर से ककोड़ा मेला शुरू होगा। गंगा किनारे श्रद्धालुओं के आस्था के इस महापर्व को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए अधिकारी खुद मैदान में उतरकर हर व्यवस्था का बारीकी से निरीक्षण कर रहे हैं।

ककोड़ा मेला केवल एक प्रशासनिक आयोजन नहीं, बल्कि जिले के लाखों श्रद्धालुओं की गहरी आस्था, लोक संस्कृति का प्रतीक है। हर साल की तरह इस बार भी जब दूर दराज से परिवार गंगा स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पहुंचेंगे।

उन्हें किसी परेशानी का सामना न करना पड़े, इसकी पूरी कोशिश की जा रही है। शनिवार को अधिकारी मेला क्षेत्र का निरीक्षण करने पहुंचे। मौके पर पहुंचकर साफ-सफाई, शुद्ध पेयजल, प्रकाश, आवागमन के रास्तों और सुरक्षा इंतजामों का जायजा लिया।

मेले को पुरानी जगह पर ही बसाने की उम्मीद है। सभी विभागों को समयबद्ध तरीके से काम पूरा करने की हिदायत दी गई है, ताकि रेत पर बसने वाले इस अस्थायी शहर में हर कदम पर श्रद्धालुओं को अपनापन और सुविधा महसूस हो।

गंगा मैया के जयकारों, ढोल-नगाड़ों और लोकगीतों की गूंज सुनने के लिए ग्रामीण और श्रद्धालु बेहद उत्सुक हैं। हर कोई बेसब्री से उस दिन का इंतजार कर रहा है जब रेतीली ढलान पर भक्ति का अनोखा संगम देखने को मिलेगा।

23 नवंबर को मुख्यमंत्री आएं ककोड़ा...करें मेले का उद्धाटन

जिले के कादरचौक क्षेत्र के गंगा भागीरथी तट पर लगने वाले मिनी कुंभ ककोड़ा मेला को राजकीय मेला घोषित करने व इसके राजकीय उद्घाटन के लिए महंत बाबा नन्हेंदास ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर आमंत्रण दिया है।

पत्र में महंत ने कहा कि प्रतिवर्ष 15 से 20 लाख श्रद्धालु और संत महात्मा मेले में आते हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों के आश्वासनों के बावजूद अब तक इसे राजकीय मेले का दर्जा नहीं मिला है। श्रद्धालुओं की इच्छा है कि मुख्यमंत्री स्वयं 23 नवंबर को आकर मां गंगा का आशीर्वाद लें और इसका राजकीय उद्घाटन करें।

साथ ही, महंत ने जिला प्रशासन, पुलिस और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत से मेले में खुलेआम जुआ, शराब और वित्तीय घोटालों का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने प्रशासन से सनातन संस्कृति की मर्यादा बनाए रखने की मांग की है।

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