‘पहले बेटे को मारूंगा…’ सात घंटे तक पुलिस देती रही दुहाई, फिर आधी रात को आई धमाके की आवाज और टूट गया सन्नाटा
आजमगढ़ के शंभूपुर में एक व्यक्ति ने पत्नी समेत तीन लोगों की हत्या के बाद अपने बच्चों को बंधक बना ...और पढ़ें

रोते बिलखते परिजन व घर पर बैठी पुलिस। जागरण
HighLights
शंभूपुर में अरविंद ने पत्नी सहित तीन लोगों की हत्या की।
बच्चों को बंधक बनाकर गोली मारने की धमकी दे रहा था।
पुलिस कार्रवाई में बेटा घायल, आरोपी अरविंद मुठभेड़ में ढेर।
जागरण संवाददाता, आजमगढ़। शंभूपुर में पत्नी समेत तीन लोगों की हत्या के बाद अरविंद अपने तीन बच्चों और लाइसेंसी रिवाल्वर के साथ कमरे में बंद हो गया था। पुलिस और स्वजन करीब सात घंटे तक उसे समझाकर बच्चों को सुरक्षित बाहर भेजने की अपील करते रहे, लेकिन वह नहीं माना। पुलिस के अनुसार वह लगातार बच्चों को गोली मारने की धमकी भी दे रहा था।
देर रात कमरे से गोली चलने की आवाज सुनाई दी तो एसएसपी डा. अनिल कुमार, एसओजी प्रभारी संजय सिंह और आरक्षी प्रदीप ने बच्चों की जान बचाने के लिए दरवाजा तोड़कर कमरे में प्रवेश किया। अंदर नौ वर्षीय शौर्य गोली लगने से गंभीर रूप से घायल मिला। पुलिस उसे तत्काल अस्पताल ले गई, जहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में अरविंद घायल हुआ और अस्पताल में चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पोस्टमार्टम में नजदीक से गोली चलने के संकेत
एसएसपी ने बताया कि पोस्टमार्टम में शौर्य के एंट्री वुंड पर ब्लैकनिंग, टैटूइंग और स्कार्चिंग के चिह्न मिले हैं, जो सामान्यतः बहुत नजदीक से गोली चलने पर पाए जाते हैं। घटनास्थल पर पुलिस टीम और बच्चे के बीच करीब आठ से 10 फीट की दूरी थी। पोस्टमार्टम में गोली की ट्रैजेक्टरी तिरछी और ऊपर की ओर मिली। पुलिस का कहना है कि बच्चे की कम ऊंचाई को देखते हुए यह स्थिति नजदीक से नीचे से ऊपर की ओर गोली चलने से मेल खाती है। एंट्री वुंड का आकार भी बरामद .32 बोर रिवाल्वर की गोली के अनुरूप बताया गया है। फोरेंसिक जांच जारी है।

बार बार कह रहा था कि पहले बेटे को मारूंगा गोली
सकुशल बचाई गई परी ने बताया कि उसके पिता अरविंद ने ही भाई शौर्य को गोली मारी थी। उसने यह भी बताया कि अरविंद बच्चों को जान से मारने की धमकी दे रहा था। एसएसपी ने बताया कि बातचीत के दौरान उसने कई बार कहा कि पहले वह बेटे को गोली मारेगा, उसके बाद बेटियों को। घटनाक्रम के दौरान उसका हिंसक व्यवहार जारी था और बच्चों पर तत्काल खतरा बना हुआ था।
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एसएसपी ने बताया कि आरोपित के साथ कमरे में बंद एक साल की बेटी की हालत भी गंभीर होते जा रही थी, वह लगातार रो रही थी। रात में उसके रोने की आवाज बंद होने के बाद पुलिस टीम अभी सोच ही रही थी कि कहीं उसने बच्ची के साथ कोई अनहोनी तो नहीं कर दी, तभी गोली की आवाज चलते ही आगे की कार्रवाई करते हुए दोनों बच्चियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। हालांकि इस घटना में बड़ी बच्ची परी भी घायल हुई थी।
