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फर्जी दानपत्र के खेल में फंसे 22 लोग, आजमगढ़ के मदरसा फर्जीवाड़े में पूर्व-वर्तमान कमेटी पर FIR

Published: Fri, 25 Sep 2026 08:33 AM (IST)

मदरसा जामिया नूरुल उलूम मुबारकपुर की फर्जी मान्यता मामले में पूर्व और वर्तमान प्रबंध समिति के 22 सदस्यों के खिलाफ ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

HighLights

  1. मदरसा जामिया नूरुल उलूम मुबारकपुर की मान्यता रद्द होने के बाद कार्रवाई।

  2. फर्जी दानपत्र और भूमि अभिलेखों में धोखाधड़ी की पुष्टि हुई।

  3. पूर्व व वर्तमान प्रबंध समिति के 22 सदस्यों पर FIR दर्ज होगी।

जागरण संवाददाता, आजमगढ़। मुबारकपुर स्थित मदरसा जामिया नूरुल उलूम की मान्यता निलंबित करने के बाद अब प्रबंध समिति के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचना की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। सहायक रजिस्ट्रार फर्म्स सोसाइटीज कार्यालय से विवरण प्राप्त होने के बाद जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी वर्षा अग्रवाल ने पूर्व की 1998 और 2025 में बनी वर्तमान प्रबंध समिति के 11-11 सहित कुल 22 पदाधिकारियों व सदस्यों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए थाना प्रभारी मुबारकपुर को आज ही पत्र प्रेषित किया जा रहा है।

एक प्रबंध समिति में प्रबंधक, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष, सह कोषाध्यक्ष और सदस्य सहित कुल 11 लाेग शामिल हैं। यह कार्रवाई मदरसे के मान्यता से संबंधित भूमि व भवन के अभिलेखों में फर्जीवाड़ा कर मान्यता लेने की पुष्टि के बाद मदरसा शिक्षा परिषद की रजिस्ट्रार अंजना सिरोही के आदेश के बाद की जा रही है।

हाजी अली इमाम ने अपनी शिकायत में मदरसे की मान्यता से संबंधित भूमि व भवन के अभिलेखों में फर्जीवाड़े का आरोप लगाया था। जिस पर रजिस्ट्रार ने मदरसा प्रबंधन को स्पष्टीकरण और मूल दानपत्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। जांच में सामने आया कि मदरसा प्रबंधन ने वर्ष 1998 में आलिया स्तर की स्थायी मान्यता फर्जी दानपत्र के आधार पर प्राप्त की थी।

यह दानपत्र 20 जून 1997 का बताया गया था। इसमें भूमि तहसील मोहम्मदाबाद गोहना, जनपद आजमगढ़ में अंकित थी। हालांकि, वर्ष 1988 में ही मऊ जनपद का गठन हो चुका था। मोहम्मदाबाद गोहना तब मऊ जिले का हिस्सा था। जिससे दानपत्र संदिग्ध हो गया। परिषद ने प्रबंध समिति को अपना पक्ष रखने के कई अवसर दिए। लेकिन उपलब्ध कराए गए जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए।

जांच में और भी कई गंभीर विसंगतियां सामने आईं। वर्ष 1997 के दानपत्र में आजमगढ़ का उल्लेख था, जबकि मोहम्मदाबाद गोहना मऊ जिले में था। फसली वर्ष 1998 से 2004 तक के खसरा अभिलेखों में संबंधित भूमि पर मदरसे का कोई उल्लेख नहीं मिला। दानपत्र में प्रबंधक निहाल अहमद को दर्शाया गया, जबकि उस समय वैध प्रबंधक जहीन अहमद थे।

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रजिस्ट्रार के प्राथमिकी के आदेश में यह स्पष्ट नहीं था कि प्राथमिकी किसके किसके खिलाफ दर्ज करानी है। इस पर जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने रजिस्ट्रार से किन लोगों पर प्राथमिकी दर्ज कराना है, के संबंध में मार्गदर्शन मांगा था। इस संबंध में रजिस्ट्रार ने निर्देश जारी किया कि सहायक रजिस्ट्रार फर्म्स, सोसाइटीज के कार्यालय विवरण प्राप्त कर संबंधित के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाए।

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‘प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए रजिस्ट्रार से मार्गदर्शन मांगा था। उनका निर्देश है कि वर्ष 1998 में मान्यता न्यता के लिए कूटरचित दानपत्र प्रस्तुत करने वाली प्रबंध समिति और वर्तमान समय में भी परिषद व शासन को वहीं कूटरचित अभिलेख प्रस्तुत करने वाली वर्तमान प्रबंध समिति के सदस्यों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराएं। इनका विवरण सहायक रजिस्ट्रार फर्म्स सोसाइटीज कार्यालय से प्राप्त करें। इसके लिए चिट फंड कार्यालय को पत्र भेजा गया था, जहां से दोनों वर्ष के प्रबंध समिति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करा जाएगी। इसके लिए थाना प्रभारी मुबारकपुर के पत्र भेजा रहा है।

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-वर्षा अग्रवाल, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी।