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विजयादशमी पर रामलला का भव्य महाभिषेक, ट्रस्ट ने शुरू की कन्या पूजन की नई परंपरा

Published: Tue, 20 Oct 2026 10:07 PM (IST)

विजयदशमी के अवसर पर अयोध्या के राम मंदिर में रामलला का महाभिषेक और शस्त्र पूजन किया गया।

राम मंदिर में कन्याओं को प्रसाद वितरित करते ट्रस्टी कृष्णमोहन : ट्रस्ट

राम मंदिर में कन्याओं को प्रसाद वितरित करते ट्रस्टी कृष्णमोहन : ट्रस्ट

HighLights

  1. राम मंदिर में विजयदशमी पर रामलला का विशेष महाभिषेक संपन्न।

  2. श्रीरामजन्मभूमि ट्रस्ट ने कन्या पूजन की नई परंपरा शुरू की।

  3. डेढ़ दर्जन कन्याओं के चरण पखारकर उन्हें श्रद्धापूर्वक सम्मानित किया।

जागरण संवाददाता, अयोध्या। विजयादशमी के अवसर पर मंगलवार को राम मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान सम्पन्न हुए। प्रातःकाल गर्भगृह में विराजमान रामलला का दूध, दही, घी, चीनी एवं नारियल जल से विधि-विधानपूर्वक महाभिषेक किया गया।

इस अवसर पर शास्त्रोक्त विधि से शस्त्र पूजन भी सम्पन्न हुआ। परकोटे में निर्मित मां दुर्गा मंदिर में भी मां दुर्गा के शस्त्रों का विधिवत पूजन हुआ। मध्याह्न राजभोग में रामलला को विशेष छप्पन भोग अर्पित किया गया।

डेढ़ दर्जन कन्याओं के पखारे पांव

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मीडिया सलाहकार सुभाष चंद्र सिंह ने बताया कि विजयादशमी के अवसर पर इस वर्ष श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने नई पहल शुरू करते हुए रामजन्मभूमि परिसर स्थित यज्ञशाला में लगभग डेढ़ दर्जन कन्याओं के चरण पखारकर विधि-विधान से उनका पूजन किया तथा चुनरी भेंट कर सम्मानित किया गया।

सनातन परंपरा के अनुसार कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर श्रद्धापूर्वक पूजन किया गया। इस अनुष्ठान में श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के न्यासी एवं निर्मोही अखाड़े के महंत दिनेंद्रदास मुख्य यजमान रहे। आचार्य केशव शर्मा व भवानी सिंह ने धार्मिक विधि से पूजन सम्पन्न कराया।

रामलला का विशेष महाभिषेक

कन्याओं को ससम्मान भोजन कराने के उपरांत फल, चॉकलेट के पैकेट, टॉफ़ी, स्टेशनरी सामग्री एवं दक्षिणा भेंट की गई। इस अवसर पर ट्रस्ट के मुख्य कार्यपालक अधिकारी एयर मार्शल जितेन्द्र मिश्र (सेवानिवृत्त), सचिव जगदीश आफले तथा ट्रस्टी कृष्ण मोहन भी उपस्थित रहे।

शारदीय नवरात्र के प्रथम दिन रामलला के समक्ष विधि-विधान से कलश (घट) स्थापना की गई थी। नवरात्र के विशेष अनुष्ठानों के अन्तर्गत पांच अर्चकों ने शतचण्डी पाठ का पारायण किया। नवमी तिथि पर दशांश हवन एवं पूर्णाहुति के साथ नवरात्र के धार्मिक अनुष्ठान सम्पन्न हुए। इसके उपरान्त विजयादशमी पर रामलला का विशेष महाभिषेक एवं शस्त्र पूजन किया गया।

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