राम मंदिर ट्रस्ट को मिलेगा नया CEO? 11 जुलाई को अहम बैठक; रेस में 2 रिटायर्ड IAS अफसर
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आठ आरोपियों के जेल जाने और दो ट्रस्टियों के इस्तीफे के बाद श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन की संभावना बढ़ गई है।

अयोध्या राम मंदिर।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लवलेश कुमार मिश्र,अयोध्या। राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले की एसआइटी जांच के बीच ही आठ आरोपितों के जेल चले जाने और विभिन्न आरोपों के चलते दो ट्रस्टियों के त्यागपत्र दे देने से अब श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन की संभावना प्रबल हो उठी है।
विशेष जांच दल (एसआइटी) ने भी प्रारंभिक रिपोर्ट में न केवल पुनर्गठन की संस्तुति की है, बल्कि किसी प्रशासनिक अधिकारी को मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) बनाने की भी आवश्यकता जताई है।
ऐसे में 11 जुलाई को प्रस्तावित ट्रस्ट की त्रैमासिक बैठक महत्वपूर्ण हो चली है। बैठक में अभी सप्ताह भर से अधिक समय शेष है, इसलिए माना जा रहा कि केंद्र सरकार भी इस बीच सीईओ की नियुक्ति के संबंध में अंंतिम निर्णय ले लेगी और प्रधानमंत्री स्वदेश लौट चुके होंगे।
एसआइटी के मंगलवार को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपने के बाद गुरुवार को प्राथमिकी दर्ज हो जाने और शुक्रवार को आरोपितों के जेल जाने के बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय व सदस्य डॉ. अनिल कुमार मिश्र पर त्यागपत्र का दबाव बढ़ गया था। बताया जा रहा कि मीडिया में चल रहीं विभिन्न खबरों के चलते संघ व विहिप के दबाव पर दोनों पदाधिकारियों ने पीएमओ के निर्देश पर इस्तीफा सौंपा है।
हालांकि इस्तीफे को लेकर भी तमाम अटकलें हैं, परंतु शनिवार को कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि ने एक पत्र ट्रस्ट के एक्स हैंडल पर पोस्ट कर इसकी जानकारी सार्वजनिक की। साथ ही यह भी बताया कि ट्रस्ट की बैठक में इसे स्वीकृत करने पर विचार होगा।
ट्रस्ट की त्रैमासिक बैठक 11 जुलाई को संभावित है। ट्रस्टी स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ का कहना है कि बैठक में ट्रस्टियों से चर्चा के बाद इस्तीफे पर निर्णय लिया जाएगा। उधर, ट्रस्ट में सीईओ की नियुक्ति पर भले अभी निर्णय नहीं हुआ है, परंतु सेवानिवृत्त दो प्रशासनिक अधिकारियों के नाम चर्चा में हैं।
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र का नाम पहले ही चल रहा था। अब रिटायर्ड आइएएस योगेश्वरराम मिश्र का भी नाम लिया जाने लगा है।
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प्रयागराज के मूल निवासी और 2005 बैच के आइएएस अधिकारी रहे योगेश्वरराम मिश्र वर्तमान में उत्तर प्रदेश राज्य लोकसेवा अधिकरण में सदस्य (प्रशासनिक) पद पर तैनात हैं। वह जनवरी से मार्च 2016 में अयोध्या में जिलाधिकारी भी रहे हैं।
त्यागपत्र होगा स्वीकृत, तो तीन पद हो जाएंगे रिक्त
यदि दोनों ट्रस्टियों का त्यागपत्र स्वीकृत होगा, तो ट्रस्ट में तीन पद रिक्त हो जाएंगे। एक पद अयोध्या राज परिवार के मुखिया रहे बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के कारण लगभग एक वर्ष से खाली है।
वहीं, ट्रस्ट के अध्यक्ष महांत नृत्यगोपालदास, सदस्य व अधिवक्ता के. परासरण सहित कुछ अन्य ट्रस्टी स्वास्थ्य व अधिक आयु के कारण पहले से ही सक्रिय नहीं हैं। वे बैठकों में भी ऑनलाइन ही सम्मिलित हो पाते हैं। ऐसे में अगर ट्रस्ट का पुनर्गठन होता है, तो इन ट्रस्टियों के स्थान पर भी नये नामों पर विचार किया जा सकता।
सीईओ के लिए बदलनी पड़ेगी ट्रस्ट की उपविधि
यदि केंद्र सरकार ट्रस्ट में किसी सीईओ की नियुक्ति करती है, तो इसके लिए पहले उपविधि (बायलाज) में परिवर्तन करना पड़ेगा विधि मामलों के जानकार बताते हैं कि बिना ट्रस्ट की नियमावली बदले सीईओ की नियुक्ति नहीं की जा सकती है। वर्तमान नियमावली में सीईओ पद का प्रविधान नहीं है।
