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रामनगरी अयोध्या में बिखरी शक्ति उपासना की अद्भुत छटा, कहीं महागौरी, कहीं सती ने की तपस्या; कहीं गिरे पट

Published: Sat, 10 Oct 2026 03:59 PM (IST)

रामनगरी अयोध्या में शक्ति उपासना की अद्भुत परंपरा है, जहाँ नवरात्र के दौरान विभिन्न देवी मंदिरों में आस्था का सैलाब ...और पढ़ें

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HighLights

  1. अयोध्या में शक्ति उपासना की अद्भुत परंपरा।

  2. छोटी देवकाली मंदिर, मिथिला की कुलदेवी महागौरी।

  3. सती माता के पट गिरने से बना पाटेश्वरी मंदिर।

रघुवरशरण, अयोध्या। रामनगरी शक्ति के विविध रूपों से सज्जित है। आस्था की यह परंपरा साल के दोनों नवरात्र के अवसर पर शिखर छूती है। पौराणिक महत्व के अनेक देवी मंदिर आस्था के केंद्र में होते हैं। दर्शनीय स्थलों में छोटी देवकाली मंदिर प्रमुख है। छोटी देवकाली के बारे में मान्यता है कि वह मिथिला की कुल देवी मां महागौरी हैं और भगवान राम से विवाह के बाद मां सीता महागौरी को अपने साथ लेकर आईं और उन्हें अयोध्या के तत्कालीन राजप्रासाद के ईशान कोण पर पूरे गौरव से प्रतिष्ठित किया।

युगों बाद छोटी देवकाली के रूप में महागौरी की प्रतिष्ठा प्रवहमान है। छोटी देवकाली का स्थापत्य तो औसत है, पर धार्मिक महिमा अपार है। शक्ति उपासना के महनीय केंद्र के रूप में बड़ी देवकाली भी है। मां का यह स्वरूप अयोध्या के सूर्यवंशीय राजाओं की कुलदेवी के रूप में पूजित-प्रतिष्ठित था। अयोध्या-फैजाबाद के बीच मां जालपादेवी की विरासत भी पौराणिक है। पौराणिक आख्यान के अनुसार भोले बाबा से परित्यक्त हो सती माता भगवान राम के प्रति आस्था पुख्ता करने अयोध्या आईं और यहां उचित स्थान देखकर उन्होंने घोर तपस्या की।

कैंट थाना के पीछे स्थित पाटेश्वरी देवी की गणना पौराणिक पीठ के रूप में होती है। माना जाता है कि यहां सती माता का पट गिरा था और इसी विरासत से समीकृत हो यह मंदिर पाटेश्वरी देवी के मंदिर के तौर पर विकसित हुआ। चुटकी माता मंदिर और लोटनी भवानी को अनादि माना जाता है। मान्यता है कि भगवान राम की बाल्यावस्था में चुटकी माता भगवान को चुटकी बजाकर सुलाती थीं और लोटनी भवानी भगवान की प्रसन्नता सुनिश्चित करने के लिए लोट-पोट हो जाती थीं।

शक्ति उपासना में उन्मीलित एवं मां कारुण्यमयी कल्याणी मंदिर के संस्थापक कृष्णकुमार त्रिपाठी के अनुसार साधना की दृष्टि से भगवान राम एवं हनुमानजी के साथ शक्ति की उपासना परस्पर पूरक है और संतों-साधकों की नगरी अयोध्या में यह सच्चाई पूरी गरिमा एवं शास्त्रीयता से प्रतिष्ठित है।

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