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राम मंदिर मामला: आरोपियों ने परिजनों के खातों में जमा किए लाखों रुपये; चोरी से भाई-पत्नी और रिश्तेदार भी हुए मालामाल

Published: Fri, 25 Sep 2026 10:02 PM (IST)

राममंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में पुलिस चार्जशीट से खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने लाखों रुपये अपने और परिजनों के ...और पढ़ें

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HighLights

  1. आरोपियों ने चोरी की राशि परिजनों के खातों में जमा की।

  2. ब्लैक मनी को सफेद करने का प्रयास किया गया।

  3. महंगी चीजें खरीदीं और रिश्तेदारों को भी दिए पैसे।

जागरण संवाददाता, अयोध्या। राममंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में पुलिस द्वारा न्यायालय में दाखिल की गई चार्जशीट में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। इसमें आरोपितों द्वारा चोरी की गई राशि के निवेश के साथ यह भी पता चला है कि उन्होंने अपने सगे संबंधियों, भाई, पत्नी और अन्य रिश्तेदारों के खातों में कैश जमा कर ब्लैक मनी को सफेद करने का प्रयास किया।

आरोपित अविनाश शुक्ला उर्फ शनि ने अपने और परिजनों के विभिन्न बैंक खातों में लगभग 6.71 लाख रुपये, लवकुश मिश्रा ने अपनी पत्नी सुप्रिया मिश्रा के बैंक खाते में लगभग 14.39 लाख रुपये, करुणेश पाण्डेय ने अपने परिजनों के बैंक खाते में लगभग 20.18 लाख रुपये, रमाशंकर मिश्रा ने लगभग 20.93 लाख रुपये नकद जमा किए।

मनीष यादव ने सनी यादव के खाते में दो लाख रुपये कैश, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू ने अपने और अपनी पत्नी के विभिन्न खातों में लगभग 8.48 लाख रुपये के साथ ही अनुकल्प मिश्रा ने अपने पिता रवींद्र मिश्रा के नाम पर स्विफ्ट डिजायर कार खरीदने के लिए तीन लाख रुपये और भागवत कथा के आयोजन पर 7.33 लाख रुपये खर्च किए।

शादी के लिए दिया कैश

अविनाश शुक्ला उर्फ शनि ने अपने भाई अभिषेक शुक्ला को तीन लाख रुपये ब्रेजा कार खरीदने के लिए और भाई आशीष शुक्ला को छह लाख रुपये उसकी शादी के लिए कैश दिए।

रामशंकर यादव ने अर्टिगा कार और एक बुलेट खरीदी। रमाशंकर मिश्रा ने 1,03,000 रुपये का एक कैमरा और 22,200 रुपये तथा 2900 रुपये की अंगूठियां खरीदीं। अनुकल्प मिश्रा ने अपने एचडीएफसी खाते में कुल लगभग 21,10,900 रुपये कैश जमा किया।

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इसी खाते से अपने पिता रवींद्र कुमार के खाते में 12,00,000 रुपये भेजे। इसके अलावा, 17.5 लाख रुपये भी अपने रिश्तेदारों और मित्र रामेन्द्र, कौशल और राजीव तिवारी को पांच लाख रुपये प्रत्येक को नगद देकर अपने इंडियन बैंक खाते में जमा कराये।

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लवकुश मिश्रा की दो बार नौकरी लगी। वर्ष 2024 में गणना के लिए रखा गया, लेकिन बाद में हटा दिया गया। फिर वर्ष 2025 में एजेंसी के माध्यम से गणना कक्ष में नियुक्त किया गया।