राम मंदिर चढ़ावा मामले में बड़ा खुलासा, आरोपी अविनाश ने 105 में से 85 बार की चोरी
राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में दाखिल चार्जशीट के अनुसार, आरोपी अविनाश शुक्ल 105 में से 85 चोरी की घटनाओं में शामिल पाया गया है।

HighLights
अविनाश शुक्ल 105 में से 85 चोरी घटनाओं में मुख्य आरोपी।
मास्टरमाइंड अनुकल्प मिश्र सहित आठ आरोपियों पर चार्जशीट दाखिल।
अविनाश से 20.39 लाख नकद, 1121 डॉलर और आभूषण बरामद।
प्रहलाद तिवारी, अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में न्यायालय में दाखिल चार्जशीट के अनुसार, आरोपित अविनाश शुक्ल मंदिर परिसर में चोरी की घटनाओं में सबसे अधिक बार शामिल पाया गया। जांच में कुल 105 चोरी की घटनाएं चिह्नित की गई हैं, जिनमें 85 घटनाओं का संबंध अविनाश से जोड़ा गया है।
सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने इन घटनाओं का ब्योरा आरोप पत्र में दर्ज किया है। 105 घटनाओं में 83 बार एक ही नाम सामने आने से चढ़ावा चोरी की जांच का यह आंकड़ा चार्जशीट का सबसे उल्लेखनीय हिस्सा बन गया है। पुलिस ने जांच में सामने आए साक्ष्यों के आधार पर कुल आठ आरोपितों के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया है।
3300 से अधिक संदेश रिकवर
बताया जाता है कि चढ़ावा चोरी के मास्टर माइंड अनुकल्प मिश्र से अविनाश का लगातार संपर्क भी जांच के दायरे में रहा। दोनों के बीच टेक्स्ट मैसेज के जरिये बातचीत होती थी। इसमें मध्यस्थ की भूमिका में लवकुश रहा। लवकुश अनुकल्प का बहनोई है। सर्विलांस सेल ने इनके 3300 से अधिक संदेश रिकवर किए। पुलिस ने इन संवादों को भी साक्ष्यों के रूप में चार्जशीट में शामिल किया है।
जांच के दौरान अविनाश के ठिकाने से 20.39 लाख रुपये नकद और 1,121 अमेरिकी डालर बरामद किए जाने का उल्लेख है। इसके अलावा दो सोने की चेन, एक अंगूठी और चांदी जैसी धातु की वस्तु मिलने की जानकारी भी पुलिस दस्तावेज में दर्ज है। अनुकल्प मिश्र ने 56 बार, लवकुश व रमाशंकर ने एक-एक बार नगदी चुराई। मनीष ने 16 बार नगदी चुराई थी, करुणेश पांडेय ने दो बार खुद नकदी चुराई और 68 बार सहयोग किया। अविनाश ने चार बार, लवकुश ने 52 और मनीष ने 19 बार नगदी चुराने में सहयोग किया था।
यह भी पढ़ें- यूपी में बनेंगे 35 रोड-फ्लाईओवर और बाईपास, आगरा-रामपुर सहित इन जिलों की सड़कों का होगा चौड़ीकरण
प्रति घंटे 34 व एक दिन में 816 पन्ने : आरोपपत्र में 173 गवाहों के बयान और 422 दस्तावेज शामिल किए गए हैं। 73,480 पन्नों को 90 दिनों में बांटें तो औसतन 816 पन्ने प्रतिदिन का दस्तावेजीकरण हुआ। 24 घंटे के हिसाब से प्रति घंटे चार्जशीट के करीब 34 पन्ने लिखे गए।
यह भी पढ़ें- यूपी के सभी सरकारी कर्मचारियों को पूरे करने होंगे दो कोर्स, मुख्य सचिव ने जारी किया आदेश
हालांकि यह केवल चार्जशीट के कुल आकार पर आधारित गणना है, इससे विवेचना के दौरान जुटाई गई सामग्री और उसे विधिक दस्तावेज का रूप देने के काम का पैमाना समझा जा सकता है।
