हादसे में मौत के बाद भी कंपनी ने नहीं किया बीमा का भुगतान, अब ब्याज के साथ देना होगा हर्जाना
सड़क हादसे में पति की मौत के बाद बीमा कंपनी द्वारा भुगतान से इनकार करने पर अयोध्या की स्थायी लोक अदालत ने अहम फैसला सुनाया है।

इस फोटो को एआई टूल की मदद से बनाई गई है।
HighLights
स्थायी लोक अदालत ने बीमा कंपनी को भुगतान का आदेश दिया।
मृतक की पत्नी को 15 लाख रुपये ब्याज सहित मिलेंगे।
बेटी के भविष्य के लिए भी न्यायालय ने राशि तय की।
जागरण संवाददाता, अयोध्या। पति की सड़क हादसे में मौत के बाद बीमा की रकम के लिए भटकती रही विधवा को न्यायालय से राहत मिल गई है। स्थायी लोक अदालत के पीठासीन अधिकारी मनोज कुमार तिवारी व न्यायिक सदस्यगण राजेश कुमार शुक्ल एवं अजीत सिंह ने कंपनी को मृतक की पत्नी रूपाली को 15 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ देने का आदेश दिया है।
इसके साथ ही 10 हजार रुपये वाद व्यय और 20 हजार रुपये मानसिक व शारीरिक कष्ट के लिए भी देने होंगे। कंपनी को 60 दिन के भीतर भुगतान करना होगा। आदेश न मानने पर 15 फरवरी 2024 से भुगतान की तिथि तक चक्रवृद्धि ब्याज भी देना होगा।
तारुन थाने के जयसिंहमऊ, बहिरा गांव निवासी संदीप कुमार ने मोटरसाइकिल खरीदने के साथ 15 लाख रुपये की व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा पालिसी ली थी। जिसमें पत्नी रूपाली को नामिनी बनाया था। 22 मार्च 2023 को रसूलाबाद बाजार से तारुन मार्ग के पास सड़क हादसे में संदीप की मृत्यु हो गई।
पति की मौत के बाद रूपाली ने बीमा कंपनी को दुर्घटना की सूचना और आवश्यक प्रपत्र भी दिए। पहले तो कंपनी ने आश्वासन दिया फिर बाद में भुगतान से इन्कार कर दिया। राहत नहीं मिलने पर उन्होंने 15 फरवरी 2024 को स्थायी लोक अदालत की शरण ली।
बीमा कंपनी ने कहा कि दुर्घटना की सूचना पुलिस और कंपनी को देरी से दी गई तथा मांगे गए प्रपत्र उपलब्ध नहीं कराए गए। न्यायालय ने पाया कि पत्रावली में मौजूद साक्ष्यों के अवलोकन से स्पष्ट है कि बीमा कंपनी को सूचना सही समय पर दी गई थी।
चार वर्षीय बेटी के लिए एफडी होगी धनराशि
न्यायालय ने मृतक की चार पुत्री की पढ़ाई, परवरिश व शादी के लिए आठ लाख रुपये 15 दिनों के अंदर 21 वर्ष की आयु तक सावधि योजना के तहत जमा करने का आदेश दिया है। साथ ही चार लाख रुपये पांच वर्षों तक रूपाली के नाम सावधि योजना में जमा की जाएगी। शेष धनराशि से रूपाली अपना व पुत्री की परवरिश करेगी।
