विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यूपी में पूर्व सपा MLC कमलेश पाठक सहित 10 को उम्रकैद, डबल मर्डर केस में कोर्ट का फैसला

Published: Wed, 19 Aug 2026 01:50 PM (IST)Updated: Wed, 19 Aug 2026 02:14 PM (IST)

औरैया के दोहरे हत्याकांड में सपा के पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक, उनके भाई संतोष पाठक समेत 10 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।

दोहरे हत्याकांड में सपा के पूर्व MLC कमलेश पाठक समेत 10 को उम्रकैद की सजा।

दोहरे हत्याकांड में सपा के पूर्व MLC कमलेश पाठक समेत 10 को उम्रकैद की सजा।

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

जागरण संवाददाता, औरैया। जिले के बहुचर्चित अधिवक्ता मंजुल चौबे और उनकी चचेरी बहन सुधा चौबे हत्याकांड में बुधवार को छह साल बाद अदालत का फैसला आया। विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने सपा के पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक, उनके भाई पूर्व ब्लॉक प्रमुख संतोष पाठक समेत 10 आरोपितों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।

लंबे समय से चल रहे इस मुकदमे के फैसले को लेकर न्यायालय परिसर के साथ ही पूरे जिले में चर्चाएं रहीं। मामले में एक आरोपित नाबालिग होने के कारण उसका मुकदमा किशोर न्याय बोर्ड में विचाराधीन है।

घटना के बाद से ही यह मामला औरैया के चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल रहा। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोपितों के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया था। करीब छह वर्षों तक चली सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष ने अपने-अपने पक्ष में साक्ष्य और गवाह पेश किए। इसके बाद अदालत ने फैसला सुनाते हुए 10 आरोपितों को हत्या के मामले में दोषी माना।

जमीन के विवाद ने बढ़ाई थी दोनों परिवारों में रंजिश

पुलिस के अनुसार, घटना की जड़ पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास स्थित करीब एक बीघा जमीन को लेकर शुरू हुए विवाद से जुड़ी थी। इसी जमीन को लेकर कमलेश पाठक और अधिवक्ता मंजुल चौबे के बीच मतभेद बढ़ते चले गए थे। कभी दोनों के बीच गहरी दोस्ती थी और राजनीतिक व सामाजिक गतिविधियों में साथ दिखाई देते थे, लेकिन समय के साथ दोनों के रास्ते अलग हो गए।

बताया जाता है कि कमलेश पाठक मंदिर के पास स्थित जमीन पर अपना प्रभाव बढ़ाना चाहते थे, जबकि मंजुल चौबे इसका विरोध कर रहे थे। जमीन को लेकर शुरू हुआ विवाद धीरे-धीरे व्यक्तिगत और राजनीतिक रंजिश में बदल गया। दोनों पक्षों के बीच तनातनी बढ़ने के बाद इलाके में भी लोगों की नजर इस विवाद पर रहने लगी थी।

विवाद के दौरान हुई थी फायरिंग

पुलिस के मुताबिक, घटना वाले दिन कमलेश पाठक मंदिर परिसर के पास जमीन पर कुर्सी डालकर बैठे थे। इसी दौरान मंजुल के पिता वहां पहुंचे और दोनों पक्षों में कहासुनी शुरू हो गई। विवाद बढ़ने पर दोनों परिवारों के लोग मौके पर पहुंच गए। कमलेश के भाई संतोष और रामू भी वहां पहुंचे।

आरोप है कि विवाद बढ़ने के दौरान मारपीट शुरू हुई और इसी बीच फायरिंग हो गई। गोलियां चलने से अधिवक्ता मंजुल चौबे और उनकी चचेरी बहन सुधा जमीन पर गिर पड़े। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में अफरातफरी मच गई और पुलिस ने पहुंचकर स्थिति को संभाला।

दोहरी हत्या की सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया था। मामले में कमलेश पाठक, उनके भाइयों समेत कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने अलग-अलग स्थानों पर दबिश देकर आरोपितों को गिरफ्तार किया था।

कभी जिगरी दोस्त थे कमलेश और मंजुल

मंजुल चौबे और कमलेश पाठक के बीच कभी बेहद करीबी संबंध थे। आसपास के लोग मंजुल को कमलेश पाठक की परछाई तक कहते थे। मंजुल छात्र राजनीति से जुड़े और तिलक महाविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष भी चुने गए। उस समय कमलेश पाठक ने उन्हें राजनीतिक रूप से आगे बढ़ाने में सहयोग किया था।

समय के साथ मंजुल की अपनी राजनीतिक पहचान बनने लगी। वर्ष 2006 के नगर पालिका चुनाव के दौरान दोनों के बीच मतभेद सामने आने लगे। बाद में मंजुल चौबे भाजपा नेताओं के करीब होते गए, जबकि कमलेश पाठक सपा के साथ बने रहे। राजनीतिक मतभेद के बीच पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास जमीन का विवाद सामने आया और दोनों की पुरानी दोस्ती दुश्मनी में बदल गई।

कम उम्र में विधायक बनने से लेकर एमएलसी तक का सफर

कमलेश पाठक औरैया की राजनीति में लंबे समय तक प्रभावशाली नाम रहे। महज 28 वर्ष की उम्र में वह सपा से विधायक बने थे। इसके बाद उन्होंने मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 1990 में वह विधान परिषद सदस्य रहे और 1991 में दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री बने।

वर्ष 2002 में दिबियापुर विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर दोबारा विधायक बने। वर्ष 2007 में उन्होंने दिबियापुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। वर्ष 2012 में सिकंदरा विधानसभा सीट से भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद 2013 में सपा सरकार ने उन्हें रेशम विभाग का अध्यक्ष बनाकर राज्यमंत्री का दर्जा दिया। वर्ष 2015 में सपा ने उन्हें दोबारा एमएलसी बनाया।

हत्या के बाद गैंग्सटर एक्ट में भी हुई कार्रवाई

दोहरे हत्याकांड के बाद पुलिस और प्रशासन ने आरोपितों के खिलाफ गैंग्सटर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की थी। प्रशासन ने कमलेश पाठक समेत अन्य आरोपितों की संपत्तियों को भी कार्रवाई के दायरे में लिया था। बताया गया कि कमलेश पाठक की करीब 36.15 करोड़, संतोष पाठक की 9.75 करोड़ और रामू पाठक की करीब 7.51 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई थी।

छह साल चली सुनवाई, फैसले पर टिकी थीं निगाहें

दोहरे हत्याकांड की सुनवाई के दौरान मुकदमे में कई तारीखें पड़ीं। अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से बड़ी संख्या में गवाह पेश किए गए। दोनों पक्षों की लंबी बहस के बाद अदालत ने निर्णय सुनाया।

छह साल से लंबित इस मामले में 10 आरोपितों को उम्रकैद मिलने के बाद अब पीड़ित परिवार के लोगों ने न्याय मिलने की बात कही है। वहीं, मामले से जुड़े अन्य कानूनी पहलुओं पर आगे की प्रक्रिया जारी रहेगी।

यह भी पढ़ें- अपनी एक्स की शादी में 'गिफ्ट बम' देने वाले व्यक्ति को उम्रकैद की सजा, धमाके में गई थी दूल्हे और उसके भाई की जान

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।