सीखने की ललक: कागज-कलम थामकर दादा-दादी पहुंचे एग्जाम सेंटर, महिलाओं ने भी दी परीक्षा
औरैया में उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत 128 केंद्रों पर 2014 नवसाक्षरों ने साक्षरता परीक्षा दी। इस दौरान महिलाओं, ...और पढ़ें

HighLights
औरैया में उल्लास नवभारत साक्षरता परीक्षा का आयोजन।
2014 नवसाक्षरों ने 128 केंद्रों पर दी परीक्षा।
महिलाओं, पुरुषों और वरिष्ठजनों में दिखा सीखने का उत्साह।
जागरण संवाददाता, औरैया। उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत रविवार को जिले में साक्षरता परीक्षा आयोजित की गई। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बनाए गए 128 परीक्षा केंद्रों पर 15 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के 2014 नवसाक्षरों ने परीक्षा में शामिल होकर अपनी बुनियादी साक्षरता का आकलन कराया। परीक्षा को लेकर नवसाक्षरों में खासा उत्साह दिखाई दिया। महिला-पुरुषों के साथ वरिष्ठजनों ने भी उत्साहपूर्वक परीक्षा दी।
साक्षरता निदेशालय, उत्तर प्रदेश के पूर्ण साक्षरता के लक्ष्य के तहत जिले में चिह्नित निरक्षरों को कक्षा संचालन के माध्यम से पढ़ने-लिखने और बुनियादी गणित का ज्ञान कराया गया था। रविवार को उनकी सीखने की प्रगति का आकलन करने के लिए परीक्षा कराई गई। जिले के सभी विकासखंडों में प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया गया था।
देखने को मिला परीक्षा को लेकर उत्साह
केंद्रों पर परीक्षार्थियों के बैठने, पेयजल, प्रकाश और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की गईं। प्रश्नपत्र में पढ़ने, लिखने और बुनियादी संख्यात्मक ज्ञान से जुड़े प्रश्न पूछे गए। कई केंद्रों पर नवसाक्षर पहली बार परीक्षा के माध्यम से अपनी सीखने की क्षमता का आकलन करते नजर आए। उम्रदराज परीक्षार्थियों में भी परीक्षा को लेकर उत्साह देखने को मिला।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संजीव कुमार ने कहा कि साक्षरता केवल अक्षर ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को दैनिक जीवन में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जिले में 128 केंद्रों पर 2014 नवसाक्षरों का परीक्षा में शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती।
यह भी पढ़ें- यूपी में वाहनों के चालान सिस्टम में हुआ बड़ा बदलाव, अब 30 दिन के अंदर अधिकारियों को करना होगा समाधान
उन्होंने परीक्षा के सफल आयोजन के लिए नोडल शिक्षकों, केंद्र व्यवस्थापकों, प्रेरकों, स्वयंसेवकों और बेसिक शिक्षा विभाग की टीम को बधाई दी। जिला समन्वयक प्रमोद विश्वकर्मा ने बताया कि उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के माध्यम से ऐसे वयस्कों को साक्षर बनाने का प्रयास किया जा रहा है, जो किसी कारणवश औपचारिक शिक्षा से वंचित रह गए।
यह भी पढ़ें- हिमालय छोड़कर इटावा पहंच रहे ये खास गिद्ध, चंबल से लेकर सफारी पार्क तक दिखा अनोखा नजारा
कार्यक्रम में पढ़ने-लिखने के साथ बुनियादी गणित और दैनिक जीवन में उपयोगी ज्ञान व कौशल पर भी जोर दिया जा रहा है। परीक्षा के माध्यम से नवसाक्षरों की सीखने की प्रगति का आकलन किया गया है।
