एतिहासिक तिगरी मेला और गढ़मुक्तेश्वर के संगम पर मंडराए असमंजस के बादल, गंगा किनारे बनेंगे 4948 अस्थायी टॉयलेट
अमरोहा में तिगरी गंगा मेला की तैयारियां जोरों पर हैं, पर गढ़मुक्तेश्वर से जोड़ने वाले पैटून पुल की मंजूरी पर ...और पढ़ें

गढ़मुक्तेश्वर और तिगरी गंगा मेला के संगम पर मंडराए असमंजस के बादल।
HighLights
पैटून पुल की मंजूरी पर शासन स्तर पर असमंजस।
तिगरी-गढ़मुक्तेश्वर मेलों का संगम अधर में।
मेला स्थल पर 4948 अस्थायी शौचालय बनेंगे।
जागरण संवाददाता, अमरोहा। तिगरी गंगा मेला की तैयारियों में प्रशासन जुटा है। हर विभाग कामों के टेंडर निकालने की प्रकि्रया में लगा है। लेकिन, पैटून पुल के निर्माण के लिए अभी तक शासन स्तर पर मंजूरी नहीं मिल पाई है। जिसकी वजह से गढ़मुक्तेश्वर और तिगरी गंगा मेला के संगम पर अमसंजस के बादल मंडरा रहे हैं। अगर मंजूरी नहीं मिली तो इस साल दोनों मेलों का संगम नहीं हो पाएगा।
हर साल की तरह इस बार भी कार्तिक पूर्णिमा पर तिगरी में गंगा मेला का आयोजन होगा। पिछले साल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तिगरी व गंगा मेला को जोड़ने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए थे। जिस पर डीएम अमरोहा व हापुड़ ने कुछ दिन पहले तिगरी मेला स्थल का जायजा लिया था। दोनों मेलों को पैटून पुल से जोड़ने के लिए जगह भी चिन्हित की थी।
इसके बाद प्रशासन ने पैटून पुल निर्माण के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था। परन्तु अभी तक शासन ने उसको मंजूरी नहीं दी है। जिसकी वजह से दोनों मेलों को जोड़ने की संभावना कम जताई जा रही हैं।
हालांकि, अभी प्रशासन इंतजार कर रहा है। मेला में टेंट सिटी का निर्माण किया जाएगा। इसमें लोगों को किराए पर तंबू उपलब्ध करवाए जाएंगे। गंगा मेला को साफ सुथरा रखने के साथ-साथ ग्रीन फील्ड भी बनाया जाएगा। इसके लिए मेला में छह हजार से अधिक पौधे लगाए जाएंगे।
4948 अस्थायी शौचालयों का होगा निर्माण
तिगरी मेला को लेकर प्रत्येक विभाग अपनी तैयारी में जुट गया है। पंचायती राज विभाग ने भी मेला स्थल पर अस्थायी शौचालयों के निर्माण कराने की तैयारियां प्रारंभ कर दी है। डीपीआरओ नितिन कुमार ने बताया कि मेला में 4948 अस्थायी शौचालयों का निर्माण कराया जाएगा जबकि, 200 सफाई कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी।
प्रत्येक वर्ष तिगरी मेला में लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। हजारों अस्थायी शौचालय बनाए जाते हैं लेकिन, इस बार पंचायती राज विभाग ने अस्थायी शौचालय के मल को वाहनों के जरिए चुचैला कलां गांव में स्थित फीगल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट में भेजा जाएगा और उसका निस्तारण का कार्य किया जाएगा। डीपीआरओ ने बताया कि अभी इस पर विचार किया जा रहा है। उच्चाधिकारियों से विचार-विमर्श के बाद अगला कदम उठाया जाएगा।
