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अमरोहा: कलम के साथ लाठी-तलवार का पाठ! शिक्षिका सुमन रानी ऐसे बना रहीं बेटियों को 'झांसी की रानी'

Published: Fri, 06 Nov 2026 06:30 AM (IST)

शिक्षिका सुमन रानी अमरोहा के शेखूपुर झकड़ी में छात्राओं को किताबी ज्ञान के साथ आत्मरक्षा के लिए लाठी-तलवार चलाना सिखाती ...और पढ़ें

हसनपुर के कंपोजिट विद्यालय शेखूपुर झकड़ी में लाठी चलाने का प्रशिक्षण प्राप्त करती बेटियां। स्रोत विभाग

हसनपुर के कंपोजिट विद्यालय शेखूपुर झकड़ी में लाठी चलाने का प्रशिक्षण प्राप्त करती बेटियां। स्रोत विभाग

HighLights

  1. रोजाना एक घंटा छात्राओं को सिखाती हैं लाठी-तलवार चलाने के गुर

  2. कलम की ताकत के साथ बढ़ा रहीं बेटियों का आत्मविश्वास

जागरण संवाददाता, अमरोहा। बेटियों के हाथों में कलम हो और आत्मरक्षा के लिए हुनर भी, इसी सोच को साकार कर रही हैं हसनपुर विकास खंड के शेखूपुर झकड़ी गांव स्थित कंपोजिट विद्यालय की इंचार्ज अध्यापिका सुमन रानी। वह छात्राओं को किताबी ज्ञान देने के साथ रोजाना एक घंटा लाठी और तलवार चलाने का अभ्यास कराती हैं।

इसका असर है कि विद्यालय की बेटियां अब आत्मविश्वास के साथ स्कूल आती-जाती हैं। खास बात यह है कि सुमन रानी ने पारिवारिक परिवेश में सीखे इस हुनर को बिना किसी औपचारिक प्रमाण पत्र के गांव की बेटियों तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया है।

शिक्षा और आत्मरक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए वर्ष 2023 में राज्यस्तर पर बेसिक शिक्षा मंत्री भी उन्हें सम्मानित कर चुके हैं। कंपोजिट विद्यालय शेखूपुर झकड़ी में सुमन रानी वर्ष 2008 में सहायक अध्यापिका के रूप में तैनात हुई थीं।

उस समय विद्यालय में बच्चों का नामांकन काफी कम था। शैक्षिक गुणवत्ता के साथ मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव था। इसके चलते अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला कराने से कतराते थे।

करीब छह माह बाद उन्हें विद्यालय की इंचार्ज अध्यापिका की जिम्मेदारी मिली। इसके बाद उन्होंने विद्यालय की तस्वीर बदलने का प्रयास शुरू किया। कंपोजिट ग्रांट से पेयजल, शौचालय, चहारदीवारी और रंगाई-पुताई समेत जरूरी व्यवस्थाएं दुरुस्त कराईं।

इसके साथ ही घर-घर जाकर अभिभावकों से संपर्क किया और बच्चों को बेहतर शिक्षा देने का भरोसा दिलाया। उनके प्रयासों से धीरे-धीरे विद्यालय में नामांकन बढ़ने लगा और शैक्षिक गुणवत्ता में भी सुधार हुआ।

वर्तमान में विद्यालय में 220 बच्चे पंजीकृत हैं। सुमन रानी का उद्देश्य केवल बच्चों को किताबी ज्ञान देना नहीं था, बल्कि छात्राओं को आत्मनिर्भर और निडर बनाना भी था।

इसी सोच के साथ उन्होंने गांव में अखाड़ा संचालित करने वाले हरिराज गुरुजी से लाठी और तलवार चलाने का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद स्वयं अभ्यास करने के साथ छात्राओं को भी आत्मरक्षा के गुर सिखाने लगीं।

कई मंचों पर मिल चुका है सम्मान

सुमन के शिक्षा और महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में किए गए प्रयासों को विभिन्न मंचों पर सराहना मिली है। महिला सशक्तीकरण, मीरा मंच और शान-ए-अमरोहा जैसे सम्मानों से उन्हें नवाजा जा चुका है।

तत्कालीन जिलाधिकारी और बीएसए मोनिका ने भी उन्हें सम्मानित किया है। वर्ष 2023 में राज्यस्तर पर बेसिक शिक्षा मंत्री की ओर से सम्मान मिलना उनकी उपलब्धियों में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव रहा।

राष्ट्रीय आय एवं छात्रवृत्ति योजना में हर साल चयनित हो रहे बच्चे

सुमन का जोर छात्राओं की आत्मरक्षा के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर भी है। निपुण भारत मिशन के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए वह विद्यालय के बच्चों की शैक्षिक क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान देती हैं।

आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के मेधावी बच्चों को आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति योजना की परीक्षा की तैयारी भी कराती हैं।

उनकी और विद्यालय के स्टाफ की मेहनत का परिणाम है कि हर साल दो से चार बच्चों का चयन इस योजना में हो रहा है। इस योजना के माध्यम से चयनित विद्यार्थियों को कक्षा नौ से 12 तक की पढ़ाई जारी रखने के लिए छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है।

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