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अमरोहा: SC-ST मुआवजा राशि हेराफेरी मामले में नया मोड़, जांच कमेटी ने हाथ खड़े कर बंद किया चैप्टर

Published: Tue, 03 Nov 2026 06:28 PM (IST)

अमरोहा में अनुसूचित जाति एवं जनजाति (SC-ST) अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत पीड़ितों को मिलने वाली सहायता राशि में गड़बड़ी ...और पढ़ें

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HighLights

  1. दोनों पक्षों से भी कमेटी ने जाना था मामला, पहले जांच होने का पता चलते ही हुई खामोश

जागरण संवाददाता, अमरोहा। जनपद में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत पीड़ितों को मिलने वाली सहायता राशि में गड़बड़ी का मामले में नया मोड़ आ गया है। इस प्रकरण की जांच कर रही कमेटी के जवाब ने पूरा चैप्टर बंद कर दिया है।

उसने जांच से हाथ खींच लिये हैं और अधिकारियों को स्पष्ट लिखा है कि पहले ही मामले की जांच हो चुकी है और शासन को रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। इसलिए अब जांच का कोई औचित्य नहीं है। हालांकि, यह निर्णय कमेटी ने दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद लिया है।

न्याय मंच के अध्यक्ष बृजलाल जाटव एडवोकेट की शिकायत पर तत्कालीन मंडलायुक्त आन्जनेय कुमार ने उपनिदेशक समाज कल्याण अधिकारी से जांच कराई थी। डीडी ने यहां कार्यालय आकर रिकार्ड खंगाला था।

जिसमें वर्ष 2022 से अब तक एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में पीड़ितों को शासनादेश के अनुरूप पूरी मुआवजा राशि नहीं दिए जाने का मामला पकड़ में आया था।

मंडलायुक्त ने 28 जुलाई को पहली जांच रिपोर्ट को अधूरा माना था और कुछ बिंदुओं को शामिल कर दोबारा जांच रिपोर्ट मांगी थी। जांच अधिकारी ने वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2026-27 तक के प्रकरणों की जांच की थी।

इसमें उन्होंने पाया था कि एससी-एसटी एक्ट की धारा 3(2) 5ए के तहत पुलिस विभाग से भेजे गए प्रस्तावों का समुचित परीक्षण किए बिना कम राशि का भुगतान किया गया है। इससे योजना का पूरा लाभ पीड़ितों को नहीं मिला है।

जांच में उन्होंने जिला समाज कल्याण अधिकारी पंखुरी जैन, तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी स्व. आशीष कुमार, प्रधान सहायक अशोक कुमार, कनिष्ठ सहायक काकुल देव और ग्राम विकास अधिकारी प्रमोद कुमार को दोषी मानते हुए मंडलायुक्त को रिपोर्ट भेज दी थी।

इसमें शामिल तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी आशीष कुमार की मृत्यु हो चुकी है। न्याय मंच के अध्यक्ष ने अनुसूचित आयोग में भी मामले की शिकायत की थी। जिस पर आयोग ने डीएम से जवाब मांगा था।

डीएम के निर्देश पर सीडीओ ने सीवीओ व सहायक निदेशक मत्स्य को जांच सौंप दी थी। कमेटी ने दोनों पक्ष की बात को सुना और उच्चाधिकारियों को पहले से ही जांच होने का पत्र लिखते हुए जांच करने से हाथ खड़े कर दिए।

 

इस मामले की जांच पहले हो चुकी हैं। मामला शासन स्तर तक पहुंच गया है। इसलिए दोबारा जांच नहीं की जा सकती है। इसके बारे में उच्चाधिकारियों को लिखकर दिया गया है।

- डाॅ. आभा दत्त, सीवीओ/जांच अधिकारी


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