खेती बनी करोड़ों का बिजनेस! अमरोहा के 14 हजार किसानों ने रचा इतिहास, FPO से ₹2.10 करोड़ का टर्नओवर
अमरोहा के 14 हजार से अधिक किसान एफपीओ के माध्यम से खेती को सफल व्यवसाय में बदल रहे हैं, जिससे ...और पढ़ें

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HighLights
12 एफपीओ संभाल रहे सप्लाई की कमान, ड्रोन व प्रोसेसिंग से मिल रही नई उड़ान
जागरण संवाददाता, अमरोहा। किसान खेती को बिजनेस बना रहे है। सामूहिक शक्ति के बूते 14 हजार किसान कृषि उद्यमिता की इबारत लिख रहे हैं। पारंपरिक खेती से किनारा करने के साथ ही बिचौलियों के मंसूबों पर भी पानी फेर रहे हैं। किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के जरिए छोटे किसान आर्थिक रूप से मजबूत हुए हैं। छोटे और सीमांत किसानों के लिए आर्थिक संबल बन चुके हैं।
जिले में कुल 31 एफपीओ पंजीकृत हैं, जिनसे 14,039 शेयर होल्डर किसान जुड़े हैं। पिछले साल 2024-25 में जिले के 27 एफपीओ ने सक्रिय व्यापार में उतरकर 5 लाख से लेकर 2.10 करोड़ रुपये तक का टर्नओवर दर्ज किया है।
वर्ष 2026-27 में जिले के 12 एफपीओ पूरी सक्रियता के साथ प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और थोक आपूर्ति की कमान संभाल रहे हैं, जिससे किसानों को उनकी उपज का सीधा लाभ मिल रहा है।
प्राकृतिक खेती, शहद, हल्दी और 'ताइवानी पिंक अमरूद' बनी नई पहचान
जिले के एफपीओ ने विशिष्ट फसलों में अलग पहचान बनाई है। प्रगतिशील किसान प्राकृतिक खेती, जैविक हल्दी, शुद्ध शहद, जैविक गुड़ और अमरोहा के मशहूर ताइवानी पिंक अमरूद के उत्पादन व मूल्य संवर्धन में जुटे हैं।
श्रीअन्न (मिलेट्स) से तैयार उत्पादों की सीधी ब्रांडिंग और पैकेजिंग से किसानों को सामान्य मंडियों की तुलना में 20 से 30 प्रतिशत तक अधिक लाभ मिल रहा है।
दो एफपीओ ने पेश की मिसाल
किसानों की उपज की सामूहिक खरीद-बिक्री और बड़े खरीदारों से सीधा संपर्क साधने में जिले के दो एफपीओ ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। इनमें एक प्रखंड बायो एनर्जी किसान प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड व दूसरा अमरोहा कृषक विकास प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड है।
दोनों ने बिचौलियों की भूमिका समाप्त कर किसानों के खेतों से ही सीधे उपज उठाने और बड़े व्यापारिक केंद्रों तक पहुंचाने की सुगम व्यवस्था बनाई है।
मिलेट्स मंडी से बाजार का रास्ता
जनपद में हाट केंद्र स्थापित किए गए हैं। किसानों की आय में निरंतर वृद्धि बनाए रखने के लिए कृषि विभाग ने कार्ययोजना तैयार की है। पहली प्राथमिकता स्थानीय स्तर पर बीज उत्पादन (सीड प्रोडक्शन) में एफपीओ की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करना है।
ताकि क्षेत्र को गुणवत्तापूर्ण बीजों के लिए आत्मनिर्भर बनाया जा सके। दूसरी, कृषि विज्ञान केंद्रों के शोध को सीधे खेतों तक पहुंचाने के लिए 'लैब टू लैंड' अप्रोच को लागू करना है और तीसरी, राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय मंडियों से अमरोहा के एफपीओ का सीधा और निर्बाध नेटवर्क स्थापित करना है।
एफपीओ के जरिए किसानों को आधुनिक खेती से जोड़ा जा रहा है। 14 हजार से अधिक किसान इस व्यवस्था के हिस्सेदार हैं। गत वर्ष 27 एफपीओ ने करोड़ों रुपये का कारोबार किया था। आने वाले दिनों में सीड प्रोडक्शन और लैब टू लैंड अप्रोच के जरिए एफपीओ को और अधिक सशक्त किया जाएगा।
- महेंद्र पाल सिंह, उप कृषि निदेशक
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