अंबेडकर नगर में अफसर बनने का सपना रह गया अधूरा, सड़क हादसे में बुझा घर का चिराग
अंबेडकरनगर के प्रत्यूष पटेल का सिविल सेवा अधिकारी बनने का सपना सड़क हादसे में अधूरा रह गया। पिता की मृत्यु ...और पढ़ें
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HighLights
प्रत्यूष पटेल का सिविल सेवा अधिकारी बनने का सपना अधूरा।
पीईटी परीक्षा देने जाते समय सड़क हादसे में मृत्यु।
परिवार के इकलौते आर्थिक सहारे की असामयिक मौत।
अरविंद सिंह, जागरण। अंबेडकरनगर। बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक विद्यालय बनपुरवा भड़सारी में शिक्षक रहे दिलीप कुमार वर्मा की पांच वर्ष पहले हुई असमयिक मृत्यु के बाद प्रत्यूष पटेल ही अपने घर का इकलौता चिराग संग आर्थिक सहारा थे। करीब एक वर्ष पूर्व उन्हें दिवंगत पिता के स्थान पर अनुकंपा पर बेसिक शिक्षा विभाग में लिपिक की नौकरी मिली थी। वह परिवार के साथ जिला मुख्यालय पर बीएसए कार्यालय के पास किराए के मकान में रहते थे। यहां उनकी बड़ी बहन सुरभी और मां रंजना वर्मा रहती थीं। उनकी मौत से मां और बहन की आंखों के आगे अंधेरा छा गया। इकलौते पुत्र प्रत्यूष के अभी अविवाहित होने से घर का चिराग भी बुझ गया।
इब्राहिमपुर थाना में बहादुरपुर खूखूतारा गांव के प्रत्यूष में तरक्की की ललक थी। चचेरे भाई आदित्य पटेल ने बताया कि पढ़ाई में शुरूआत से तेज रहे प्रत्यूष सिविल सेवा में जाना चाहते थे।इसके लिए पीसीएस परीक्षा की तैयारियां कर रहे थे। परिवार की परिस्थितियों को देख कर आर्थिक संबल बनने में उन्होंने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में मृतक आश्रित पर लिपिक की सेवा ग्रहण की थी। यहां, नौकरी करते हुए उन्होंने प्रारंभिक पात्रता परीक्षा (पीईटी) का आवेदन किया था।
उन्हें परीक्षा केंद्र रायबरेली जनपद में अमावा रोड पर थाना मिल एरिया के देवानंदपुर में श्री केबी सिन्हा राजकीय बालिका इंटर कालेज आवंटित हुआ था। वहां, पहली पाली में सुबह 10 बजे से परीक्षा में इनको शामिल होने था। उन्हें नौ बजे तक परीक्षा केंद्र के अंदर दाखिल होना था। इसके लिए वह अकबरपुर से सुबह पांच बजे से पहले ही बाइक से निकले थे। एक घंटे बाद करीब छह बजे सुलतानपुर जिले में सेमरी के निकट टांडा-रायबरेली हाइवे पर हादसे का शिकार हो गए। बताया गया कि डबल डेकर निजी बस से इनकी बाइक में सामने से जोरदार टक्कर लगी। हेलमेट पहनने के बाद भी वह नहीं बच सके।चचेरे भाई आदित्य ने बताया कि हेलमेट तक फट गया। सिर में गहरी चोट लगने से उनकी मृत्यु हो गई।
शहर में घर बनाने की रही चाह
प्रत्यूष नौकरी मिलने के बाद अकबरपुर में मां व बहन के लिए घर बनाना चाहते थे। इसके बाद ही अपनी शादी करते। घर बनाने के लिए वह भूमि तलाश रहे थे। कई जगह देखा, लेकिन पसंद नहीं आई। वहीं, प्रत्यूष के पिता दिलीप कुमार वर्मा की भी मृत्यु नवंबर में हुई थी। स्वजन के अनुसार 23 नवंबर 2021 में मौत हुई थी। दिलीप कुमार वर्मा को शिक्षा विभाग में अपने शिक्षक पिता सती प्रसाद वर्मा के निधन पर मृतक आश्रित में नौकरी मिली थी। उनके मौत के बाद प्रत्यूष को मृतक आश्रित में नौकरी मिली।
परिवार व सहकर्मियों ने टोका था
बीएसए कार्यालय के अजय गुप्त, सुरेश तिवारी, ओंकार वर्मा ने प्रत्यूष को बाइक से परीक्षा देने के लिए जाने से टोका था। बड़ी बहन सुरभी ने बाइक को कार से जाने की सलाह दी थी। इसके बावजूद सुबह वह बुलेट बाइक से अकेले निकल पड़े। डीआइओएस कौस्तुभ कुमार सिंह, बीएसए डा.पूनम मिश्रा व कार्यालय के सहकर्मी शोकाकुल परिवार को सहारा देने में पहुंच गए। पोस्टमार्टम हाउस पर उनकी शालीनता की चर्चाएं होती रहीं। प्रत्यूष का अंतिम संस्कार सरयू नदी के सहजौरा इल्तिफातगंज तट पर कर दिया।
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