अंबेडकरनगर में दीपावली पर बढ़ी देशी मिठाइयों की धूम, चीनी के खिलौने और लखनऊ की रेवड़ी बनी पहली पसंद
अंबेडकरनगर में धनतेरस और दीपावली पर लोग चमकीली मिठाइयों से दूरी बनाकर चीनी के खिलौने, रेवड़ी और अन्य देशी मिठाइयों ...और पढ़ें

HighLights
चमकीली मिठाइयों से दूरी बनाकर लोग देशी मिठाइयों को पसंद कर रहे।
चीनी के हाथी, घोड़े, गुड़िया जैसे खिलौनों की मांग बढ़ी है।
लखनऊ की रेवड़ी और जौनपुर के चना-लाई की बिक्री तेज।
संवाद सूत्र, अंबेडकरनगर। धनतेरस व दीपावली के पर्व पर इस बार लोग चमकीली मिठाई से दूरी बना रहे हैं। चीनी से निर्मित खिलौना मिठाई की मांग बढ़ी है। चीनी के हाथी, घोड़े, बतख, गुड़िया आदि आकार में लाल, सफेद एवं पीले आदि खाद्य रंग से निर्मित मिठाइयां और चूड़ा-लइया दुकानों में सजी हैं। दीपावली में इन्हीं मिठाइयों से मां लक्ष्मी तथा गणेशजी को भोग लगाया जाता है।
लखनऊ की रेवड़ी, जौनपुर, अयोध्या संग अन्य जिलों में चीनी के खिलौने बाजारों में बिक रहे हैं। हाथी-घोड़ा 100 से 110 रुपये प्रति किलोग्राम, रेवड़ी 100 रुपये, गट्टे 80 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिक रहे हैं। जौनपुर,वाराणसी के चना, लाई व चूड़ा की मांग अधिक है। अकबरपुर शहर समेत ग्रामीणांचल तक सड़क के किनारे स्टाल सज गए हैं। अकबरपुर इंदलोक कालोनी की शांति देवी ने बताया कि पूजा की सामग्री के साथ लाई-चूड़ा खिलौना मिठाई खरीद ली है।
त्योहार में समय कम मिलता है, पहले से खरीदारी कर रही हूं ताकि मौके की भीड़ से बचा जा सके। शहजादपुर के दुकानदार मोनू गुप्त ने कहा कि ग्राहकों की मांग अनुसार हाथी-घोड़ा, गुड्डा-गुड़िया विभिन्न रंगों में बनाई जा रही हैं। थोक संग फुटकर बिक्री अच्छी है। बीते वर्ष की तुलना में इस बार चीनी से बनी मिठाइयों की मांग अधिक है।
पहले लोग एक किलो तक लेते थे, अब दो से तीन किलो ले रहे हैं। दुकानदार रईस अहमद ने कहा कि चना, गुड़, रेवड़ी, गट्टे बड़ी मात्रा में स्टोर किए हैं। अब लोग मिलावटी मिठाई छोड़कर स्थानीय मिठाई ज्यादा खरीद रहे हैं। पंडित शिवपूजन चौबे ने कहा कि इस बार चीनी से निर्मित मिठाई, गट्टा, तिल का लड्डू, हाथी-घोड़ा समेत अन्य देशी मिठाई ही खरीदेंगे और इसी से भगवान को भोग लगाएंगे।
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