मनीष उर्फ सांप को शेरसिंह की हत्या में उम्रकैद: रस्सी से गला घोंटकर मुंह में ठूंसा था गुटखे का बंडल; उम्र की दलील खारिज
अलीगढ़ अदालत ने पांच साल पुराने मजदूर शेर सिंह हत्याकांड में दोषी मनीष उर्फ सांप को उम्रकैद की सजा सुनाई ...और पढ़ें

मनीष उर्फ सांप इंसेट में।
HighLights
अलीगढ़ कोर्ट ने मनीष उर्फ सांप को उम्रकैद सुनाई।
पांच साल पहले मजदूर शेर सिंह की हत्या का मामला।
अदालत ने अपराध की गंभीरता को प्रमुख माना।
जागरण संवाददाता, अलीगढ़। करीब पांच साल पहले हुई मजदूर की हत्या में अदालत ने दोषी मनीष उर्फ सांप को उम्रकैद की सजा सुनाई है। हत्या की परिस्थितियों को गंभीर मानते हुए उसे सजा सुनाई। अभियुक्त को कम उम्र और पारिवारिक परिस्थितियों का लाभ नहीं मिल सका।
अदालत ने कहा कि अभियुक्त की कम उम्र और सुधार की संभावना महत्वपूर्ण परिस्थितियां हैं, लेकिन अपराध की गंभीरता को देखते हुए इन्हें सजा कम करने का आधार नहीं बनाया जा सकता। एससी/एसटी एक्ट की धारा में अलग-अलग आजीवन कारावास के साथ कुल एक लाख रुपये अर्थदंड लगाया।
बरौला जाफराबाद निवासी मजदूर की पांच साल पहले हुई थी हत्या
बन्नादेवी क्षेत्र में यह घटना सात नवंबर 2021 की रात को हुई थी। बरौला जाफराबाद निवासी मजदूर शेर सिंह काम के लिए घर से निकला था। रात में घर नहीं लौटने पर स्वजन ने तलाश शुरू की। अगले दिन उसका शव बैकुण्ठी देवी के प्लाट में मिला। शेर सिंह के गले में प्लास्टिक की रस्सी का फंदा पड़ा था। मुंह में पन्नियों में गुटखे का बंडल ठूंसा गया था और आंखों के नीचे चोट के निशान थे। मृतक के भाई मुन्नालाल की तहरीर पर बन्नादेवी थाने में अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था।
कोर्ट ने कहा- अपराध की गंभीरता के आगे पारिवारिक परिस्थितियां नहीं हो सकतीं हावी
वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी सत्यभान सिंह और एडीजीसी चमन प्रकाश शर्मा के अनुसार विवेचना के दौरान मनीष उर्फ सांप का नाम सामने आया। मृतक के अनुसूचित जाति से होने के कारण मामले में एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(V) भी जोड़ी गई। पुलिस ने आरोपपत्र दाखिल किया। मुकदमे में 16 गवाह सूचीबद्ध किए गए, जिनमें नौ की गवाही हुई। 31 अगस्त 2026 को बचाव पक्ष का साक्ष्य पूरा हुआ।
सजा पर बहस के दौरान बचाव पक्ष ने मनीष की उम्र करीब 24 वर्ष बताते हुए नरमी की मांग की। दलील दी गई कि उसकी मां के अलावा परिवार में कोई सहारा नहीं है और वह अविवाहित है। वहीं अभियोजन ने हत्या के तरीके और परिस्थितियों को गंभीर बताते हुए अधिकतम सजा की मांग की।
मारते-घसीटते ले जाने को माना गंभीर परिस्थिति
सुनवाई के दौरान एडीजे विशेष एससी/एसटी प्रतिभा सक्सेना की अदालत ने माना कि शेर सिंह के साथ हिंसात्मक व्यवहार किया गया और उसे मारते-घसीटते हुए ले जाया गया। उसका शव खुले प्लाट में मिला। यह परिस्थितियां अपराध की गंभीरता को दर्शाती हैं। हालांकि मामले में मृत्युदंड के लिए आवश्यक असाधारण परिस्थितियां पूरी तरह स्थापित नहीं हुईं, इसलिए उम्रकैद को उचित दंड माना गया।
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आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड
अदालत ने मनीष उर्फ सांप को धारा 302 आईपीसी में सश्रम आजीवन कारावास व 50 हजार रुपये अर्थदंड तथा एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(V) में आजीवन कारावास व 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर दोनों धाराओं में तीन-तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
