RMPSU में P.HD की 40% सीटें खाली, शोध पर्यवेक्षकों की तलाश तेज, 15 अक्टूबर तक आवेदन का मौका
राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में 40% से अधिक पीएचडी सीटें खाली हैं क्योंकि शिक्षक शोध पर्यवेक्षण में रुचि नहीं ...और पढ़ें

राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय
HighLights
आरएमपीएसयू में 40% से अधिक पीएचडी सीटें खाली।
शोध पर्यवेक्षकों की कमी के कारण सीटें नहीं भर पा रहीं।
नए आवेदन 15 अक्टूबर तक, पुराने पर्यवेक्षक भी अपडेट करें।
जागरण संवाददाता, अलीगढ़। राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के लिए कैंपस व संबद्ध महाविद्यालयों में शोध कार्य को बढ़ावा देने में शिक्षक (पर्यवेक्षक) ही रुचि नहीं दिखा रहे, जिससे प्रबंधन के लिए पीएचडी प्रवेश की प्रक्रिया पूर्ण करना चुनौती बन गया है।
सत्र 2026-27 के लिए नियुक्त तमाम शोध पर्यवेक्षकों के रुचि न दिखाने से विभिन्न विषयों में 40 प्रतिशत से अधिक सीटें अभी तक खाली हैं। इन्हें भरने के लिए इच्छुक शिक्षकों से 15 अक्टूबर तक नए सिरे से आवेदन मांगे गए हैं। पहले से अनुमोदित शोध पर्यवेक्षकों को भी अपने अधीन उपलब्ध रिक्त सीटों की जानकारी अपडेट करने का अवसर दिया गया है।
आरएमपीएसयू से संबद्ध महाविद्यालयों में पीएचडी प्रवेश की प्रक्रिया धीमी
कुलसचिव प्रबुद्ध सिंह की ओर से जारी निर्देशों में कहा गया है कि नियमों के अनुसार एक समय में आचार्य अधिकतम आठ, सह आचार्य छह और सहायक आचार्य चार पीएचडी शोधार्थियों का मार्गदर्शन कर सकते हैं। नई प्रक्रिया का उद्देश्य केवल पर्यवेक्षकों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि वास्तव में उपलब्ध शोध मार्गदर्शन क्षमता को सामने लाना भी माना जा रहा है। पहले नियुक्त 277 पर्यवेक्षकों में कई के स्तर पर शोधार्थियों के मार्गदर्शन के लिए अपेक्षित रुचि सामने नहीं आने से सीटों का पूरा उपयोग नहीं हो सका।
नए शोध पर्यवेक्षकों के साथ पुराने पर्यवेक्षकों को सीटें अपडेट करने का अवसर
ऐसे में अब विश्वविद्यालय पुराने पर्यवेक्षकों से भी वास्तविक रिक्त सीटों का ब्योरा मांग रहा है। नियमों के मुताबिक शोध पर्यवेक्षक विश्वविद्यालय अथवा संबद्ध महाविद्यालय के पूर्णकालिक शिक्षक ही हो सकते हैं। आवेदन के साथ नियुक्ति, पीएचडी और शोध प्रकाशनों से संबंधित अभिलेख देने होंगे। शिक्षक को अपनी पीएचडी, शोध प्रकाशनों, पूर्व में मार्गदर्शन किए गए शोधार्थियों और वर्तमान में उपलब्ध रिक्त सीटों की जानकारी भी देनी होगी।
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पात्र पर्यवेक्षकों की आवश्यकता
विश्वविद्यालय ने कैंपस एवं महाविद्यालय में शोध को बढ़ावा देने के लिए स्पष्ट किया है कि पीएचडी पाठ्यक्रम के संचालन के लिए पात्र शोध पर्यवेक्षकों की उपलब्धता जरूरी है। अब निगाह इस पर है कि दूसरी कवायद के बाद कितने नए पर्यवेक्षक सामने आते हैं और पहले से खाली पड़ी शोध सीटों में से कितनी वास्तव में भर पाती हैं। 23 अक्टूबर को रिसर्च इंटरेंस टेस्ट (आरईटी) व 28 अक्टूबर को साक्षात्कार की तिथि निर्धारित की है।
