AMU छात्रसंघ चुनाव: Gen-Z की पसंद और क्षेत्रीय समीकरण तय करेंगे प्रत्याशी, 5 को है इलेक्शन
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में 5 नवंबर को होने वाले छात्रसंघ चुनाव के लिए छात्रावासों में प्रत्याशियों के चयन पर मंथन ...और पढ़ें

एएमयू में छात्र संघ चुनाव में प्रत्याशी चयन को लेकर बैठक करते छात्र । सौ. छात्र
HighLights
5 नवंबर को एएमयू में छात्रसंघ चुनाव प्रस्तावित।
प्रत्याशी चयन में जेन-जी की पसंद और क्षेत्रीय समीकरण महत्वपूर्ण।
भोजन गुणवत्ता, छात्राओं का प्रतिनिधित्व प्रमुख चुनावी मुद्दे।
संतोष शर्मा, अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में पांच नवंबर को प्रस्तावित छात्रसंघ चुनाव को लेकर छात्रावासों में सरगर्मी तेज हो गई है। विभिन्न छात्रावासों में क्षेत्रीय समूहों की बैठकें हो रही हैं। इनमें संभावित प्रत्याशियों के नामों पर चर्चा के साथ तीन-चार दावेदारों में से किसी एक को सामने लाने की रणनीति बनाई जा रही है। छात्रों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि किस चेहरे पर दांव लगाया जाए।
छात्रों का मानना है कि इस बार प्रत्याशी चयन में क्षेत्रीय समीकरणों के साथ नई पीढ़ी यानी जेन-जी की पसंद और सोच को समझना भी अहम होगा।
पीएचडी स्कालर इमरान खान का मानना है कि जेन-जी चुनाव में वो केवल झंडा उठाकर ही पीछे नहीं चलेगा बल्कि उन समस्याओं का समाधान भी चाहेगा जिनसे छात्र जूझ रहे हैं। खाने की गुणवत्ता, कमरा आवंटन, साफ-सफाई और पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल होना उनकी पहली मांग हैं।
एएमयू में पांच नवंबर होंगे छात्र संघ चुनाव, प्रत्याशियों की खोज में लगे छात्र
एएमयू में बिहार, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, गोंडा-बस्ती-सिद्धार्थनगर (जीबीएस), गाजीपुर-आजमगढ़ और अलीगढ़ के स्थानीय छात्रों से जुड़े समूह सक्रिय हैं। इनके अलावा कश्मीर, बंगाल, असम और केरल के छात्र भी अपनी भागीदारी के हिसाब से किसी प्रत्याशी के समर्थन में एकजुट हो सकते हैं। हर रोज विभिन्न समूह छात्रावासों में बैठक कर रहे हैं। देर रात तक चलने वाली इनमें संभावित दावेदारों के नामों पर विचार कर प्रत्याशी पर सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है।
आठ साल बाद होने जा रहे हैं छात्र चुनाव
करीब आठ साल बाद छात्रसंघ चुनाव होने जा रहे हैं। इस दौरान परिसर में छात्रों की नई पीढ़ी आई है, जिसकी अपेक्षाओं और राजनीतिक सोच का आकलन पुराने तौर-तरीकों से करना आसान नहीं होगा। ऐसे में प्रत्याशी ऐसा होना चाहिए, जो नए विद्यार्थियों से संवाद कर सके और उनकी समस्याओं को समझे। केवल क्षेत्रीय समर्थन पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि छात्रों के साथ उसका जुड़ाव भी महत्वपूर्ण रहेगा।
छात्र नेता सलमान गौरी का मानना है कि आज छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच संवाद का जो रास्ता बंद हो चुका है। यूनियन इस संवाद को पुनर्जीवित करने का एक अहम मंच बन सकती है।
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जेन-जी को चाहिए प्रोटीन युक्त भोजन
छात्रावासों में कमरों के आवंटन और डाइनिंग की व्यवस्था जैसे मुद्दे चुनाव में प्रमुखता से उठ सकते हैं। विद्यार्थियों की मांग है कि भोजन की गुणवत्ता बेहतर हो और उसमें प्रोटीन सहित जरूरी पोषक तत्वों का ध्यान रखा जाए। नई पीढ़ी स्वास्थ्य और कैलोरी को लेकर भी जागरूक है। इसके लिए छात्र जरूरत पड़ने पर भोजन पर थोड़ा अधिक खर्च करने को भी तैयार हैं। हाल के दिनों में विभिन्न छात्रावासों में भोजन की गुणवत्ता को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों को भी इसी असंतोष से जोड़कर देखा जा रहा है।
छात्र हित पहले, फिर देश-दुनिया के मुद्दे
पीएचडी स्कालर आकिब खुर्शीद के अनुसार चुनाव में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा हो सकती है, लेकिन छात्रसंघ चुनाव का प्राथमिक उद्देश्य विद्यार्थियों का प्रतिनिधित्व करना है। विद्यार्थियों के लिए देश-दुनिया की राजनीति को समझना भी जरूरी है, क्योंकि यही युवा आगे चलकर विभिन्न क्षेत्रों में अपनी भूमिका निभाएंगे।
छात्र संघ चुनाव में छात्राओं को मिले पर्याप्त प्रतिनिधित्व
एएमयू छात्रसंघ के आगामी चुनाव में छात्राओं को नेतृत्व में पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने की मांग उठी है। छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष अब्दुल हफीज गांधी ने सुझाव दिया है कि तीन प्रमुख पदों, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सचिव में से कम से कम एक पद छात्राओं के लिए आरक्षित किया जाए। इसके अलावा 10 कैबिनेट सदस्यों में कम से कम चार पद छात्राओं के लिए आरक्षित करने की व्यवस्था हो।
अब्दुल हफीज ने कही ये बात
अब्दुल हफीज गांधी ने कहा कि वर्तमान चुनाव में आपसी सहमति से अनौपचारिक व्यवस्था के तहत इसे लागू किया जा सकता है। चुनाव के बाद छात्रसंघ के संविधान में संशोधन कर तीन प्रमुख पदों में से एक पद छात्राओं के लिए स्थायी रूप से आरक्षित करने का प्रावधान किया जाना चाहिए।
उम्र आ रही आड़े, चुनाव अधिकारी से मिले छात्र
चुनाव लड़ने के लिए बहुत से छात्रों की उम्र आड़े आ रही है। इसे लेकर छात्र नेताओं ने मुख्य चुनाव अधिकारी प्रो. जावेद तालिब से मुलाकात की। छात्रों का कहना है कि बीए, बीएसी और बीकाम का पहले तीन साल का कोर्स होता था, अब चार साल में हो रहा है। 17 से 22 साल का स्नातक छात्र ही चुनाव लड़ सकता है।
चार साल का कोर्स होने से समय तो बढ़ गया लेकिन चुनाव के लिए उम्र नहीं बढ़ी। प्रो. तालिब ने बताया कि छात्रों की मांग पर एक कमेटी का गठन किया जाएगा, जो 24 धंटे में रिपोर्ट सौंपेंगी। उसके बाद तय किया जाएगा क्या करना है।
पैरामेडिकल के विद्यार्थियों की सबसे बड़ी चिंताएं हमारे कॉलेज का अब तक पंजीकृत न होना है। वजीफ़ा भी नहीं मिलता। उम्मीद है इन समस्याओं को यूनियन गंभीरता से समझेगी।
अब्दुल्लाह, छात्र पैरामेडिकल
जेन-जी इस चुनाव में उसे वोट करेगा जो प्रत्याशी उसे कनेक्ट करेगा। ये चुनाव जेन जी का है। इनके बीच का जो प्रत्याशी होगा वो सफलता का परचम फहराएगा।
मोहम्मद कैफ, बीडीएस छात्र
एक सामान्य छात्र के लिए अच्छे प्लेसमेंट और बेहतर इंटर्नशिप के अवसर हासिल करना काफी मुश्किल होता है। हमें उम्मीद है कि छात्रसंघ हमारी आवाज बनेगा ।
फ़ुआद अहमद अंसारी, विधि छात्र
