अलीगढ़ में 200 से अधिक शस्त्र लाइसेंस अटके: जम्मू-कश्मीर से नहीं मिली NOC, फर्जी की आशंका!
अलीगढ़ में जम्मू-कश्मीर से जारी 200 से अधिक असलहा लाइसेंसों का पंजीकरण एनओसी न मिलने के कारण अटका हुआ है। ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
HighLights
अलीगढ़ में 200 से अधिक जम्मू-कश्मीर असलहा लाइसेंस अटके हैं।
एनओसी न मिलने से पंजीकरण प्रक्रिया बाधित, वैधता पर सवाल।
प्रशासन बिना सत्यापन के लाइसेंसों को मान्यता देने को तैयार नहीं।
सुरजीत पुंढीर, अलीगढ़। जम्मू-कश्मीर में कभी आसानी से जारी हुए असलहा लाइसेंस अब अलीगढ़ में पंजीकरण के दौरान जांच के घेरे में आ गए हैं। दूसरे राज्यों से जारी लाइसेंस के सत्यापन की प्रक्रिया में जम्मू-कश्मीर के करीब 200 से अधिक मामले ऐसे सामने आए हैं, जिनकी अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) नहीं मिल पा रही है। इनमें से कई लाइसेंस 15 से 20 वर्ष पुराने हैं।
अलीगढ़ प्रशासन की ओर से संबंधित जिलों को पत्र भेजने व रिमाइंडर देने के बावजूद जवाब नहीं मिलने से इनका पंजीकरण अटका हुआ है। ऐसे में इन लाइसेंसों की वैधता को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि लाइसेंस धारकों की ओर से पंजीकरण के लिए आवेदन करने के बाद भी प्रशासन बिना सत्यापन के उन्हें मान्यता देने को तैयार नहीं है। जम्मू-कश्मीर के विभिन्न जिलों से जारी इन लाइसेंसों की मूल प्रक्रिया की जांच के लिए वहां के प्रशासन से लगातार पत्राचार किया जा रहा है। हालांकि, अभी तक अपेक्षित एनओसी नहीं मिलने से करीब दो सौ लाइसेंस धारक इंतजार कर रहे हैं।
15 से 20 वर्ष पहले जारी हुए लाइसेंस के पंजीकरण पर उठ रहे हैं सवाल
जिले में पंजीकरण के लिए पहुंचे लाइसेंसों में जम्मू-कश्मीर के कई जिलों के मामले शामिल हैं। इनमें किस्तवाड़, बारामूला, पुलवामा, कठुआ, श्रीनगर, राजौरी, ऊधमपुर व कुलगाम से जारी लाइसेंस प्रमुख हैं। इन जिलों से जारी लाइसेंस धारक अब अलीगढ़ में पंजीकरण कराना चाहते हैं। इसके लिए प्रशासन संबंधित जिलों से लाइसेंस जारी करने के समय की प्रक्रिया, अभिलेखों व अन्य जरूरी तथ्यों का सत्यापन करा रहा है। एनओसी मिलने के बाद ही पंजीकरण हो सकता है।
शोपियां और कठुआ से जारी लाइसेंस भी अटके
जिले के सुढ़ियाल निवासी राजपाल सिंह इसका एक उदाहरण हैं। उन्होंने करीब एक दशक पहले जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में रहते हुए असलहा लाइसेंस बनवाया था। बाद में अलीगढ़ आने के बाद उन्होंने यहां लाइसेंस के पंजीकरण के लिए आवेदन किया। प्रशासन ने शोपियां के संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजकर लाइसेंस जारी करने की पूरी प्रक्रिया का सत्यापन करते हुए एनओसी मांगी।
एनओसी के लिए प्रशासन ने संबंधित जिलों कई बार भेजे पत्र व रिमाइंडर
काफी समय बीतने के बाद भी जवाब नहीं आया। इसके बाद प्रशासन ने रिमाइंडर भी भेजा, लेकिन अब तक एनओसी नहीं मिली है। इसी तरह पिसावा निवासी धर्मेंद्र कुमार ने भी कई वर्ष पहले जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले से असलहा लाइसेंस जारी कराया था। जिले में आने के बाद इनके लाइसेंस का पंजीकरण भी एनओसी के अभाव में अटका हुआ है। ऐसे अकेले दो मामले नहीं हैं। जिले में जम्मू-कश्मीर के विभिन्न जिलों से जारी करीब 200 से अधिक लाइसेंस इसी प्रक्रिया में फंसे हुए हैं।
43 लाख की आबादी पर 37 हजार लाइसेंस
जिले में करीब 43 लाख की आबादी के बीच लगभग 37 हजार शस्त्र लाइसेंस पंजीकृत हैं। इनमें सबसे अधिक लाइसेंस बंदूक और राइफल के हैं। दूसरे जिलों से जारी लाइसेंस का यहां पंजीकरण कराने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है। प्रशासन का जोर है कि बिना संबंधित जिले से सत्यापन व एनओसी प्राप्त किए किसी भी लाइसेंस का पंजीकरण न किया जाए।
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फर्जीवाड़े की आशंका से गहन जांच
जम्मू-कश्मीर से जारी लाइसेंसों के सत्यापन में हो रही देरी ने फर्जीवाड़े की आशंका को भी जन्म दिया है। हालांकि, एनओसी नहीं मिलने का अर्थ यह नहीं है कि सभी लाइसेंस फर्जी हैं। संबंधित जिलों से जवाब नहीं मिलने के कारण उनकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। प्रशासन की ओर से प्रत्येक मामले की अलग-अलग जांच की जा रही है। जांच में लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में गड़बड़ी मिलने पर आगे नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
दूसरे जिले से जारी असलहा लाइसेंस का जिले में पंजीकरण कराने से पहले संबंधित जिले से एनओसी लेना अनिवार्य है। इसके लिए प्रशासन की ओर से पत्र भेजे जाते हैं। कई बार संबंधित जिले से एनओसी नहीं मिलने पर पंजीकरण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाती है। पूरी जांच व गहन समीक्षा के बाद ही पंजीकरण किया जाता है।
