करवा चौथ सरगी: परंपरा और सेहत का अनूठा मेल, अलीगढ़ के मार्केट में ड्राई फ्रूट्स और ताजे फल की डिमांड
करवा चौथ पर सरगी की थाली में अब परंपरा के साथ सेहत का भी संगम देखने को मिल रहा है। ...और पढ़ें

सेंटर प्वाइंट स्थित एवन दालसेव वाले शोरुम में सजी सरगी की थाली। जागरण
HighLights
सास के स्नेह और आशीर्वाद का प्रतीक है सरगी
पारंपरिक पकवानों के साथ पौष्टिक विकल्प भी शामिल
ड्राई फ्रूट्स, मखाना और ताजे फल की बढ़ी मांग
जागरण संवाददाता, अलीगढ़। करवा चौथ पर सरगी की थाली सुबह व्रत से पहले खाए जाने वाले पकवानों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह सास के स्नेह और आशीर्वाद का प्रतीक भी है। पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा में समय के साथ बदलाव आया है। पहले सरगी की थाली में फेनियां, मठरी, मिठाइयां और पारंपरिक पकवान अहम होते थे, जबकि अब कई महिलाएं इसमें फल, ड्राई फ्रूट्स, मखाना और दूसरी पौष्टिक चीजें भी शामिल कर रही हैं।
ड्राई फ्रूट्स, मखाना, ताजे फल और हेल्दी मिठाइयों को मिल रही प्राथमिकता
सेंटर प्वाइंट स्थित एवन दालसेव शोरूम के संचालक रोहित गोयल ने बताया कि महिलाएं सरगी के लिए अपनी पसंद के खाद्य पदार्थ खरीदने के साथ ही थाली को खास बनाने के लिए नए विकल्प भी तलाश रही हैं।
पारंपरिक खानपान के साथ सेहत का ध्यान रखने की यह सोच त्योहार की तैयारियों में नया रंग जोड़ रही है। महिलाएं परंपरा निभाते हुए मठरी और मिठाइयों की बास्केट भी खरीद रही हैं, जिनमें कई तरह के पकवान शामिल होते हैं।

सेंटर प्वाइंट स्थित एवन दालसेव वाले शोरुम में सरगी की थाली पसंद करती ग्राहक। जागरण
दुकानदार सतीश ने बताया कि करवा चौथ नजदीक आने के साथ सरगी से जुड़ी खरीदारी बढ़ने लगी है। महिलाएं अपनी पसंद और परिवार की परंपराओं के अनुसार सरगी की थाली तैयार कर रही हैं। इस बार सरगी में परंपरा और सेहत का मेल देखने को मिल रहा है।
सालों से चली आ रही परंपरा में इस बार कुछ बदलाव किया है। थाली में ऐसी चीजें शामिल की हैं, जिनसे दिनभर शरीर में ऊर्जा बनी रहे।
आशा देवी, सुदामा पुरी
