अलीगढ़ नगर निगम में हाउस टैक्स वसूली में घोटाला: आउटसोर्स कर्मचारियों ने थमाईं फर्जी रसीदें, छह बर्खास्त
अलीगढ़ नगर निगम में गृहकर वसूली में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसमें आउटसोर्स कर्मचारियों ने उपभोक्ताओं से पैसे लेकर ...और पढ़ें

नगर निगम सेवाभवन में संपत्ति कर बिलों के संबंध में आ रही लोगों की भीड़। जागरण
HighLights
आउटसोर्स कर्मचारियों ने गृहकर वसूली में किया 50 लाख का फर्जीवाड़ा।
उपभोक्ताओं को फर्जी रसीदें थमाईं, सरकारी खजाने में पैसे जमा नहीं किए।
छह कर्मचारी बर्खास्त, जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की गई।
जागरण संवाददाता, अलीगढ़। नगर निगम के गृहकर विभाग में संपत्ति कर वसूली के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ है। कुछ आउटसोर्स कर्मचारियों ने उपभोक्ताओं से गृहकर, वाटर और ड्रेनेज टैक्स की रकम वसूल ली, लेकिन उसे सरकारी खजाने में जमा नहीं कराया। उपभोक्ताओं को भुगतान की फर्जी रसीद थमा दी गईं।
मामला तब खुला, जब संपत्ति कर जमा कर चुके लोगों के पास इस वर्ष का बिल पहुंचा, जिसमें पुराना बकाया जुड़ा मिला। अब तक ऐसी 22 शिकायतें सामने आ चुकी हैं। करीब पांच-छह महीने से यह खेल चल रहा था।
फर्जीवाड़े की रकम 50 लाख रुपये से अधिक होने की आशंका जताई जा रही है। इस प्रकरण में छह आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर उन्हें ब्लैकलिस्ट किया गया है। जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है।
छह आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाएं खत्म, ब्लैकलिस्ट किए
नगर निगम के गृहकर विभाग की ओर से आउटसोर्स कर्मचारियों को ई-पाश मशीनें दी गई थीं। इन कर्मचारियों को घर-घर जाकर संपत्ति कर की वसूली करनी थी। आरोप है कि इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर उपभोक्ताओं से रकम लेने के बाद उसे नगर निगम के खाते में जमा नहीं कराया गया। सिस्टम में हेरफेर कर भुगतान दर्ज दिखाया जाता था और उपभोक्ता को रसीद दे दी जाती थीं।
जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ मामलों में उपभोक्ताओं के पास नगर निगम के लोगो वाली रसीदें हैं। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि ये रसीदें नगर निगम कार्यालय से जारी हुईं या फर्जी तरीके से तैयार की गईं।
नए बिल में पुरानी राशि जुड़कर आने पर लगा पता
अधिकारियों की जांच में ई-पाश मशीनों के माध्यम से सिस्टम में किए गए लेनदेन और वास्तविक रूप से नगर निगम के खाते में जमा रकम का मिलान किया जा रहा है। शहर में नगर निगम के 90 वार्ड हैं और करीब 2.80 लाख भवन संख्या दर्ज है। अधिकांश वार्डों में संपत्ति कर के बिल जारी कर वसूली की गई है। ऐसे में जांच का दायरा बढ़ने पर फर्जीवाड़े की रकम और शिकायतों की संख्या बढ़ने की आशंका है।
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अब लोग लगा रहे नगर निगम के चक्कर
भाजपा नेता मनीष अग्रवाल ‘वूल’ ने बताया कि चार लोग इसी प्रकरण में उनके संपर्क में आए थे। पार्षद पुष्पेंद्र सिंह जादौन ने बताया कि रामघाट रोड पर चाय विक्रेता के सामने भी यही समस्या है। उसने भी भुगतान किया लेकिन पिछली राशि बिल में जुड़कर आ रही है। नामित पार्षद वीरेंद्र सिंह ने बताया कि उनके पास भी एक प्रकरण ऐसा आया है।
तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन
नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने पिछले छह महीनों की संपत्ति कर वसूली का डेटा भी तलब किया है। तीन सदस्यीय जांच टीम इस रिकॉर्ड के आधार पर वसूली और जमा रकम का मिलान करेगी। उन्होंने बताया कि जांच पूरी होने के बाद फर्जीवाड़े की वास्तविक रकम और इसमें शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी। पिछले छह महीनों का वसूली का डेटा तलब किया गया है।
इन जिम्मेदारों की थी संलिप्तता
इस खेल में कर निर्धारण अधिकारी कार्यालय में कंप्यूटर ऑपरेटर शुभम सक्सेना, नगर स्वास्थ्य विभाग में कंप्यूटर ऑपरेटर अमित कुमार, कॉल टेकर कार्मिक पंकज कुमार, बिल वितरक प्रशांत कुमार, सुमित सैनी व मनीष कुमार की संलिप्तता सामने आई है। इन सभी की सेवा समाप्त कर दी गई है।
स्याही हुई हवा, उड़ रहे होश
ई-पॉश मशीन से दी गई रसीद वैसी ही पतली व लंबी होती है जैसे पेट्रोल पंप या एटीएम से निकलती हैं। इनकी स्याही सात से आठ दिनों में अपने आप उड़ जाती है। केवल सफेद कागज रह जाता है। इस फर्जीवाड़े में ऐसे भी प्रकरण हैं जिनमें उपभोक्ताओं ने नकद राशि कर्मचारियों को दी। कर्मियों ने कहा कि कल जमा करके पक्की रसीद पहुंचा देंगे।
इनको ई-पॉश की मशीन से निकली रसीद दी गई, बाद में पक्की रसीद मिली नहीं। अब उनकी उस रसीद से स्याही हवा होने से लिखावट गायब हो गई है। उपभोक्ताओं के होश उड़ रहे हैं। उनके पास भुगतान किए जाने का कोई साक्ष्य भी नहीं है। अब, वे इसलिए नहीं बोल पा रहे हैं क्योंकि इन्होंने बिल को कम करके जमा कराने की जुगत लगाई थी।
इस प्रकरण में 22 शिकायतें निगम में आई हैं। तीन सदस्यीय कमेटी विस्तृत जांच कर रही है। आउटसोर्सकर्मी हों या स्थायी कर्मचारी, रिपोर्ट के आधार पर जो भी इसमें संलिप्त मिलेगा उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई होगी। जिन छह कार्मिकों की सेवा समाप्त की गई है उनके विरुद्ध मुकदमा भी पंजीकृत कराया जाएगा। उनसे ही जनता की राशि की रिकवरी भी कराई जाएगी।
