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अलीगढ़: बांग्लादेश-पाकिस्तान में हिंदुओं पर हमलों के विरोध में AMU से उठी आवाज, प्रत्याशियों ने की निंदा

By Jagran NewsEdited By: Shiv Govind Mishraa
Published: Wed, 04 Nov 2026 01:47 AM (IST)

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में छात्रसंघ चुनाव प्रचार के दौरान बांग्लादेश और पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं पर हो रहे हमलों के खिलाफ आवाज उठाई गई।

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HighLights

  1. एएमयू छात्रों ने बांग्लादेश-पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर हमलों का विरोध किया।

  2. छात्रसंघ चुनाव प्रचार में राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई।

  3. मोहन भागवत को एएमयू आने का न्योता, आजम खान की रिहाई का समर्थन।

जागरण संवाददाता, अलीगढ़। बांग्लादेश और पाकिस्तान में हिंदुओं समेत अल्पसंख्यक समुदायों पर हो रहे हमलों और भेदभाव के विरोध में मंगलवार को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में आवाज उठी। पांच नवंबर को होने वाले छात्रसंघ चुनाव से पहले आयोजित अंतिम भाषण में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सचिव पद के 15 प्रत्याशियों ने विश्वविद्यालय के मुद्दों के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर भी विचार रखे।

अध्यक्ष पद के प्रत्याशी मो. इंतखाब ने बांग्लादेश और पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ हो रही ज्यादती की निंदा की। उन्होंने कहा कि दुनिया के किसी भी देश में अल्पसंख्यकों के अधिकारों का हनन नहीं होना चाहिए। फलस्तीन, सीरिया और ईरान के साथ बांग्लादेश और पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों के मुद्दों पर भी विद्यार्थियों को आवाज उठानी चाहिए।

अध्यक्ष पद के प्रत्याशी मो. नोमान अशरफ ने हिंदू-मुस्लिम एकता पर संवाद के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत को एएमयू आने का न्योता दिया। उन्होंने कहा कि यदि भागवत अमेरिका में हिंदू-मुस्लिम एकता पर बोल सकते हैं तो उन्हें एएमयू आकर भी इस विषय पर संवाद करना चाहिए। उन्होंने भाषण के निर्धारित विषय राष्ट्र निर्माण में छात्र नेतृत्व का योगदान पर भी सवाल उठाए।

आजम खान की रिहाई का मुद्दा उठाया

प्रत्याशियों ने शरजील इमाम, उमर खालिद, सफूरा जरगर, मीरान हैदर और गुलफिशा फातिमा का जिक्र किया। इंतखाब ने भीड़ हिंसा की घटनाओं में मोहसिन, पहलू खान, अखलाक और तबरेज के नाम लेते हुए ऐसी घटनाओं का विरोध किया। उन्होंने समान नागरिक संहिता, बुलडोजर कार्रवाई और मुस्लिम समुदाय के आर्थिक बहिष्कार की अपीलों पर भी सवाल उठाए।

नई शिक्षा नीति, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की व्यवस्था, मौलाना आजाद राष्ट्रीय फैलोशिप की बहाली और मुस्लिम समुदाय के लिए आरक्षण की मांग की। साथ ही जौहर विश्वविद्यालय और पूर्व छात्रसंघ सचिव आजम खां की रिहाई का समर्थन किया।

500 रुपये में लड़ रहे चुनाव

उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशी अशफाक हुसैन ने अपने अलग अंदाज से छात्रों को आकर्षित करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि न बाइक रैली निकाली और न पोस्टर लगाए। केवल 500 रुपये में चुनाव लड़ रहे हैं। जीतने पर अपने पैसे से एनेक्सी बनवाने का दावा किया।

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एएमयू की जमीन को लेकर अधिकारियों पर निशाना साधते हुए नारा दिया, एक कचौरी, दो समोसा, इन डीलरों का क्या भरोसा। छात्रावासों की बदहाल स्थिति पर कहा कि एक कमरे में कई-कई छात्र रहने को मजबूर हैं।

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