SBI की लापरवाही पर आयोग का बड़ा फैसला: बीमा क्लेम देने का आदेश, खाते में बैलेंस न होने पर भी काटा था प्रीमियम
भारतीय स्टेट बैंक की लापरवाही के कारण खाते में पर्याप्त रकम होने के बावजूद बीमा प्रीमियम नहीं कटा, जिससे ग्राहक को क्लेम नहीं मिला।

HighLights
बैंक ने खाते में रकम होने पर भी प्रीमियम नहीं काटा।
उपभोक्ता आयोग ने SBI को बीमा क्लेम देने का आदेश दिया।
मानसिक उत्पीड़न व मुकदमा खर्च के लिए भी मुआवजा मिलेगा।
जागरण संवाददाता, अलीगढ़। भारतीय स्टेट बैंक के खाते में धनराशि होने के बावजूद प्रीमियम नहीं काटने पर ग्राहक को बीमा क्लेम नहीं मिला। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने इसे बैंक की लापरवाही मानते हुए मृतक की मां को दो लाख रुपये बीमा क्लेम के रूप में देने के आदेश दिए हैं। मानसिक उत्पीड़न के पांच हजार रुपये और मुकदमे के खर्च के पांच हजार रुपये भी देने होंगे। आयोग ने परिवाद लंबित रहने की अवधि और भविष्य के लिए सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का भी आदेश दिया है।
यह है पूरा मामला
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष हसनैन कुरैशी और सदस्य पूर्णिमा सिंह राजपूत की पीठ ने नौ अक्टूबर 2026 को यह निर्णय सुनाया। मामला क्वार्सी क्षेत्र की नीलकंठेश्वर कालोनी निवासी शीला देवी पत्नी ओमवीर सिंह की ओर से वर्ष 2017 में दाखिल परिवाद से संबंधित है।
परिवाद के अनुसार, शीला देवी के बेटे शिवराज सिंह ने वर्ष 2014 में रामघाट रोड स्थित एसबीआई शाखा में खाता खुलवाया था। खाते से संबंधित बीमा पालिसी के लिए 100 रुपये प्रीमियम जमा किया गया था। इसके तहत दो लाख रुपये का बीमा कवर था।
बैंक खाते की विवरणी में 18 अक्टूबर 2014 को बीमा प्रीमियम के रूप में 100 रुपये काटे जाने का उल्लेख मिला। 11 जनवरी 2016 को शिवराज सिंह की दुर्घटना में मृत्यु हो गई। शीला देवी बीमा पालिसी में नामित थीं। उन्होंने क्लेम के लिए चार अप्रैल 2016 को आवेदन किया। बीमा कंपनी यह कहते हुए राशि का भुगतान नहीं किया कि प्रीमियम जमा नहीं किया गया। शीलादेवी ने आयोग में परिवाद दाखिल किया।
आयोग ने परीक्षण कराया तो सामने आया कि 15 अक्टूबर 2015 को खाते में 500 रुपये जमा किए गए थे। इसके बाद 22 नवंबर 2015 तक खाते में 100 रुपये से अधिक की धनराशि उपलब्ध रही। ऐसे में अगले बीमा वर्ष 18 अक्टूबर 2015 से 17 अक्टूबर 2016 के लिए प्रीमियम काटने की पर्याप्त धनराशि थी। फिर भी प्रीमियम काटकर जमा नहीं किया गया।
